चौतरफा मनमानी के चलते 20 वर्षो में सिर्फ खुला मैदान बनकर रह गया समिति
अध्यक्ष का निर्वाचन तो दिखावा है पूरा संचालन समिति प्रबंधक के जिम्मे
सेवा सहकारी समिति मर्यादित लाखासार काठाकोनी तखतपुर विकास खंड अंतर्गत ग्राम लाखासार मुख्य मार्ग पर खुले मैदान में 20वर्षो से अधिक अनियमितताएं ,भ्रष्टाचार ,लापरवाही और मनमर्जी मन माफिक संचालित हो रहा है जिसमे पूरा सहकारीता पर प्रश्न चिन्ह उठ रहा इस समिति में कुल 213 किसान लाभान्वित है हर वर्ष करोड़ो में धान खरीदी की जाती है जिससे समिति को लाभ मिलता रहा है किन्तु इस लाभ प्राप्त राशि का समिति में व्यप्त असुविधाओं को दूर करने में कभी भी समिति के पूर्व अध्यक्षों के विचारो में नहीं आया न बैठक में कोई मुद्दा बना .इस समिति में अभी नवंबर माह में नए कार्यकारिणी का चुनाव संपन्न हुवा है नवनिर्वाचित अध्यक्ष यशवंत दुबे से हमारे संवाददाता से समिति में चल रहे अनियमितताओं पर चर्चा में बताया गया कि बीते वर्षो में जो भी समिति के अध्यक्ष चुन कर आए थे वे लोग सिर्फ अपने बारे में सोचे है समिति का विकास कभी कोई मुद्दा या एजेंडा नहीं बना.लाखासार सेवा सहकारी समिति खुले मैदान में संचालित है कुल 9एकड़ भूमि आवंटित जिसमे 2एकड भूमि पर ग्राम के बाहुबलियों का कब्ज़ा है जिस पर कभी कोई भी कार्यवाही नहीं हुई .इस संदर्भ में तहसील सकरी से लेकर एसडीएम तखतपुर तक शिकायत की जा चुकी है किन्तु कोई कार्यवाही नहीं हुई .इस समिति को डिजिटल सेंटर घोषित किया गया है किन्तु मजे की बात है की यह सेंटर भी समिति का नहीं है वहाँ एक छोटा सा खपरैल नुमा कच्चा मकान है बमुश्किल से 10बाई 12 फुट में निर्मित है और इसको बेजा कब्जाधारियों ने अपना कब्जा दिखाने के लिए बलपूर्वक बनाया है और समिति मजबूरीवश इसी कब्जा वाली मकान को अपना कार्यालय बनाई है.अब सोचने वाली बात है की समिति ने कभी अपने लिए एक कार्यालय और गोदाम बनाने के लिए क्यों विचार नहीं किया सरकारी बारदाने खुले में पड़े हुवे है जिसको नुकसान होने का सीधा खतरा है इस केंद्र में करोड़ो के धान खरीदी की जा चुकी है जिसमे न तो गेट है न ताला चारो तरफ से बारबेट वायर कि जाली से घेरा गया और मुख्य प्रवेश द्वार पर भी बारबेट वायर का टेम्पररी घेराव किया गया जो कही से भी सुरक्षित नहीं लगता आगजनी चोरी लूट जैसे खतरे को खुला निमंत्रण दे रहा है .इस समिति में 15से 20 वर्षो में सिर्फ अध्यक्ष की बदली हुई है प्रबंधक आज वटवृक्ष कि भांति जमे हुवे है .एक मात्र प्रबंधक ही है जिसको इस खुले में संचालित धान खरीदी केंद्र पोष रहा है विकास सिर्फ प्रबंधक का हुवा बाकि सारे विकास चर्चा का मुद्दा बना हुवा है.सहकारिता में सुचना का अधिकार कानून लागू नहीं है जिसका बेजा लाभ का प्रतिक है लाखासार धान खरीदी केंद्र ऐसे न जाने कितने भ्रष्टचार का उदाहरण सहकारिता आम जनता के जानकारी के बाहर है.किसानो कि गाढी कमाई ऐसे कितने प्रबंधक और पूर्व अध्यक्ष निगल गए है जिसका हिसाब मिलना मुश्किल है,
