विजय की कलम
जैसे-जैसे चुनाव की तारीख नजदीक आ रही है वैसे-वैसे चुनावी गर्मी भी अब बढ़ रही है क्योंकि ठंड अब धीरे-धीरे वापस जा रही है और गर्मी सता रही है ऊपर से चुनावी गर्मी , जैसा माहौल चल रहा है नगरी निकाय चुनाव में बीजेपी फुल फॉर्म में दिख रही है और कांग्रेस बैक फुट पर आ गई है पूरे प्रदेश का यही हाल है विधानसभा चुनाव के बाद लोकसभा चुनाव हुए दोनों में हार के कारण कांग्रेस पार्टी उभर नहीं पाई है और रही सही कसर नगरी निकाय चुनाव में जिस तरह उठक पठक हुई और अपनों के ही जुबानी रूपी बाण चले जिससे उन्हें के नेता घायल हो गए कार्यकर्ता नाराज हो गए कई कार्यकर्ता निर्दलीय खड़े हो गए तो कुछ ने पार्टी बदल ली कुछ मान मनोबल से मान भी गए पर दिल से जुड़ नहीं पाए इन सारे चीजों को देखकर एक ही सार निकलता है कि क्या इस बार बिलासपुर में कांग्रेस वापसी कर पाएगी?
वैसे कुछ लोगों का कहना है

( भाजपा की पूजा जनता की बन गई पर कांग्रेस का नायक जनता का नहीं बन पाया?)
(खड्डा बहुत बड़ा है सामने अशोक विधानी खड़ा है)
इस बार कांग्रेस के लिए चुनावी माहौल आसान नहीं है उन्हीं के नेताओं के ऊपर पार्टी के वरिष्ठ अध्यक्ष पर जो आरोप लग रहे हैं और जिस तरह 70 वार्डों में एक में तो बीजेपी ने खाता खोल भी दिया बचे 69 वार्ड कांग्रेस कुछ में ही लड़ाई में दिख रही है बाकी में तो बचाव में दिख रही है भाजपा केंद्र व राज्य में सत्ता में बैठी है उसका पूरा फायदा उसको यहां मिल रहा है कुछ वार्डों में जरूर नाराजगी नजर आ रही है पर जैसा माहौल है उसे तो देख कर यही लगता है

( कांग्रेस की हार है भाजपा फुल बहुमत पार है )
वैसे एक बात तो बहुत सुनने को मिलती है कांग्रेस को कांग्रेसी ही लोग हराते हैं और जैसा अभी नजारा दिख रहा है उसमें तो साफ समझ में बात आ रही है नायक अकेला पड़ गया है अपनों से लड़े की ,विपक्ष से लड़े ,की चुनाव लड़े ,क्या-क्या करें ,अकेला नायक ,यह फिल्मी नायक नहीं है जो सबसे लड़कर विजयी बन जाएगा? यह तो कांग्रेस का नायक है जो अपनों से ही लड़ कर विजय प्राप्त कर ले वही बहुत है?
वैसे जनता भी अभी

खामोश है पर पूजा को सिंधी समाज का होने का फायदा जरूर मिल रहा है ठोक के भाव में उन्हें वोट प्राप्त होंगे यह नजारा तो समझ में आ गया है पर अन्य समाज में उसे मेहनत ज्यादा करनी होगी तभी इस लड़ाई को जीत पाएगी और बिलासपुर नगर की महापौर बन पाएगी , इतना तो तय है बिलासपुर ईस बार इतिहास बनाएगा और पूजा की पूजा होगी कमल खिलेगा पर क्या जनता को उसका हक मिलेगा?
अब यह तो आने वाला समय ही बताएगा किसको क्या मिलता है किसके हिस्से में सत्ता आती है और कोन ठोकरें खाता है (संपादकीय)
