
प्रथम यज्ञ भूखंड जहां पर होता है तीन नदियों का संगम जिसे कहते हैं सनातन धर्म का मुकुट वह है प्रयागराज इस नाम का मतलब है खुशबू शांति का राज प्रयागराज जहां पर मां गंगा मां यमुना वह अधीषय रूप से मां सरस्वती का वास, है वह प्रयागराज है,जहां पर 144 साल के बाद आया है मांह कुंभ जहां पर 60 करोड़ से अधिक संनातनी लोगों ने लगाई है डुबकी वह प्रयागराज है जिसने विश्व भर में संनातन का नाम ऊचा किय है संनातनियों को जगाया है धर्म का झंडा ऊंचा किया है उस मांह कुंभ मे श्री सिंधु अमर धाम आश्रम झूलेलाल नगर चक्कर भाटा के संत लाल दास जी के सानिध्य में 121 भक्त जनों का जत्था धर्म नगरी झूलेलाल नगर से निकलकर पेंड्रा होते हुए शहडोल में रुका जहां पर शहडोल वासियों ने सभी भक्तों का स्वागत सत्कार किया वह रात्रि भोजन की व्यवस्था की वहां से निकालकर, सीधी, मिर्जापुर होते हुए

प्रयागराज पहुंचा, सांई जी के सानिध्य में प्रयागराज पहुंचकर अपने आप को धन्य महसूस किया और जैसे ही सभी लोग मांह कुंभ में पहुंचे, गंगा मैया के किनारे संगम स्थल पर पहुंचकर गंगा मैया में संगम में डुबकी लगाई तो तन के साथ-साथ मन भी प्रसन्न हो गया ऐसा लगा मानो अगर पृथ्वी पर स्वर्ग है तो वह यही है यही है और इसी वक्त है इसी क्षण है जो हमें मिला है विधि विधान के साथ पूजा अर्चना की गई आरती की गई और सभी ने कुंभ का आनंद लिया मेले का आनंद लिया वह अलग-अलग आए हुए भारतीय संतों के दरबार में पहुंचकर दर्शन किए सकुशल वापस सभी भक्तजन प्रयागराज से निकालकर चक्करभाटा पहुंचे वहा से अपने-अपने शहरो की ओर प्रस्थान किया इस अवसर पर संत लाल दास जी ने अपनी अमृतवाणी में कहा कि 144 साल के बाद ऐसा अवसर आया है ऐसा महाकुंभ आया है हम सभी के लिए बड़ा ही गर्व का पर्व है बल्कि इससे महापर्व कहा जाए तो कोई गलत नहीं होगा 45 दिनों तक अगर कोई महापर्व पूरे विश्व में मनाया जा रहा है तो वह है हमारा संनातनी धर्म का महा कुंभ का पर्व जहां पर 60 करोड़ से ज्यादा लोगों ने डुबकी लगाई है अगर ऐसा कोई पर्व है तो वह है हमारे संनातन धर्म का हमारा पर्व महाकुंभ ऐसी पावन धारा में ऐसी पावन नगरी में ऐसे संगम में डुबकी लगाकर तंन तो हमारा स्वच्छ
हो गया लेकिन मन को भी स्वच्छ होना जरूरी है जब तक मन का पाप नहीं धुलेगा तब तक तन को धोने का कोई अर्थ नहीं रह जाता है अगर आप इस जगह पर आए हैं और संगम में डुबकी लगा रहे हैं तो तन के साथ-साथ मन को भी धोए तभी उसका फल और यहाँआने का तात्पर्य है पूरा होगा आप सभी संनातन धर्मियों को इस महाकुंभ की बहुत-बहुत बधाइयां और शुभकामनाएं

महाशिवरात्रि के पर्व की भी बहुत-बहुत बधाइयां शुभकामनाएं जो की 2 दिन बाद आने वाला है इस महा कुंभ में 121 भक्त जनों का जत्था जो की छत्तीसगढ़ मध्य प्रदेश महाराष्ट्र के अलग-अलग शहरों से आए हैं सभी लोगों ने सांई जी का धन्यवाद किया कि आपके सानिध्य में इस महाकुंभ में हमें संगम में डुबकी लगाने का अवसर मिला कोई भी कार्य अगर संत जनो के सानिध्य में होता है तो उसका लाभ डबल मिलता है और हम बड़े भाग्यशाली हैं कि आपके सानिध्य में हमें ऐसा अवसर मिला इस पूरे कार्यक्रम में बाबा गुरमुख दास सेवा समिति के सभी सदस्यों का विशेष सहयोग रहा इस पूरे कार्यक्रम को कवर करने के लिए हमर संगवारी के प्रधान संपादक विजय दुसेजा विशेष तौर पर बिलासपुर से प्रयागराज पहुंचे वह कवर किया