विजय की कलम

पहलगाम आतंकी हमले के जवाब मे ऑपरेशन सिंदूर भारत की सेना ने चलाया और पाकिस्तान के छक्के छुड़ा दिए जिस तरह 4 दिन में पाकिस्तान को चांदनी दिखा दी और नानी याद करा दी वह पाकिस्तान की सेना 40 सालों तक नहीं भुलेगी भारतीय सेनाओ के बढ़ते कदम को अचानक सिजफायर कर क्यों रोका गया ?
शुरुआत में अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रम्प आगे आए और उन्होंने जो भाषण दिया व्यक्त जारी किया बयान जारी किया जो सोशल मीडिया में चल रहा था उसके मुताबिक ट्रम्प सिज फायर का श्रेय लेता दिख रहा है बाद में उसने अपने बयान पलटते हुवे भी देखे गए.हालांकि भारत औऱ पाकिस्तान के सेना प्रमुख के मध्य युद्ध विराम कि चर्चा फोन पर हुई जिसके बाद सिज फायर निर्णय लिया गया. विभिन्न मुद्दों पर चर्चाए हुई जिसमे आतंकी गतिविधियों पर भारत का रुख शक्त औऱ स्पष्ट था कि यदि आतंकी गतिविधि हुई उसे भारत युद्ध कि घोषणा समझेगा औऱ वो युद्ध के लिए अपने सैन्य बल को रोक नहीं पाएंगे. वही भारत कि जनता के मन मे पाकिस्तान के प्रति जो रोष है उसे वो युद्ध के रूप मे शांत करना चाहती थी. भारत कि सेना पाकिस्तान के 60किमी अंदर तक घुस कर मुँह तोड़ जवाब दे रहा था उसके सारे वार को निश्तो नाबूत कर चुके थे फिर सीज फायर करने से देश कि जनता का मन क्षुब्ध है अगर यह युद्ध 10 दिन तक चलता तो पिऔकै, भारत में वापस आ जाता, सिंध आजाद देश बन जाता और बलूचिस्तान भी आजाद हो जाता इतना अच्छा मौका था हमारे पास फिर हमने उसका उपयोग क्यों नहीं किया?
क्या हम फिर से एक और बड़ी आतंकवादी घटना का इंतजार कर रहे हैं फिर हम वही काम करेंगे चार दिन गोली चलाएंगे फिर हम शांति से चुप्प हो जाएंगे?
आखिर यह कब तक चलता रहेगा 75 सालों से तो सब देखते आ रहे हैं?
जिती हुई बाजी हमने गाव दी, मुझे ऐसा लग रहा है? क्योंकि यह जीत अधूरी है पूरी नहीं है? पूरी तब होती जब पिओके भारत के पास आ जाता, बलूचिस्तान और सिंध आजाद होता ,ओर आतंकवादियों के सरगना हमारे हाथ में आते या मारे जाते पर ऐसा कुछ नहीं हुआ?
हमने सिज फायर कर दिया उनकी बात बिना शर्त मान ली आखिर क्यों?
कम से कम आतंकवादी के सरगना को तो हम मांग सकते थे कि उन्हें हमारे हवाले कर दो तब हम सिज फायर नहीं करेंगे ,?
ओर हमारी मिसाइल उनकाे वही दफन कर देगी जहां पर छुपे बैठे हैं पर हमने ऐसा कुछ नहीं कहा कुछ ना कुछ तो जरूर अंतरराष्ट्रीय दबाव है जो सामने नहीं आ रहा है पर वक्त आने पर यह बात भी सामने आएगी पर पैसा बड़ा या देश बड़ा यह अब सोचने की बात है अगर देश बड़ा है तो हमें सिज फायर नहीं करना चाहिए था?
जब तक हम अपनी मंजिल तक पहुंच न जाते और इस समस्या को हमेशा के लिए खत्म नहीं कर देते? पर हमारे नेताओं ने कहा है कि अभी यह पूर्ण सीज फायर नहीं है ऑपरेशन सिंदूर अभी स्थगित किया गया है पाकिस्तान की सेना💂💂💂 दोबारा ऐसा कुछ करेगी या आतंकवादी हमला होगा तो उसका जवाब इससे भी ज्यादा भयंकर होगा, और यह बात सबको पता है कि पाकिस्तान कुत्ते की पूछ है कभी सीधी नहीं होगी वह दो-चार महीना शांत रहेगी फिर से आतंकवादियों को भेजना शुरू कर देगी,भारत पर कुछ ना कुछ बड़ा हमला करने के लिए,
और रही बात तुर्की और अजर बेजान का बॉयकॉट करना बहुत अच्छा प्रयास है और अच्छा कार्य है लेकिन सिर्फ तुर्की और अजरबैजान का ही क्यों इसके साथ-साथ चिन का भी बॉयकॉट करना चाहिए क्योंकि जब युद्ध चल रहा था तब पाकिस्तान को चिन भी सपोर्ट कर रहा था ओर फिर कहीं ना कहीं अमेरिका का भी उसके पास सपोर्ट था अगर ऐसा नहीं होता तो वहां पर बैठा हुआ वर्ल्ड 💰बैंक पाकिस्तान को वित्त सहायता नहीं देता उन्होंने सहायता देकर यह स्थापित कर दिया है कि अमेरिका सिर्फ अपनी सोचता है और दूसरे की नहीं सोचता वह हर युद्ध में अपना कमाई और अपना भला सोचता है उसे पता था कि अगर भारत यह युद्ध और लंबा खींचेगा तो पाकिस्तान का सर्वनाश होना निश्चित है और एशिया में भारत एक मजबूत शक्ति बनकर उभरेगा इसलिए उसने यह दोहरी चाल चली ताकि चीन को भी खुश कर सके पाकिस्तान को भी खुश कर सके और अपनी जय जय कार भी करवा सके और इसकी चाल में हमारे लोग फंस गए , प्रतिबंध लगाना है तो अमेरिका पर भी लगाना होगा लेकिन दिखाकर नहीं अंदर ग्राउंड लगाना होगा यहां की जनता को बताना होगा कि तुर्की अज़रबैजान अमेरिका और चीन का कोई भी सामान ना खरीदे नहीं कोई बिजनेस करें नहीं ही वहा जाए टूरिस्ट लोग बाय कार्ट करें और बॉयकॉट और अन्य देशो का भी होना चाहिए जो जो पाकिस्तान का आतंकवादी को सपोर्ट कर रहे हैं जैसे हमारा पड़ोसी देश बांग्लादेश उसे भी सबक सिखाना जरूरी है भारत में एक से एक टूरिस्ट स्पॉट है साउथ में पूर्वोत्तर राज्यों में जहां तक आज तक हम पहुंचे नहीं है पर्यटन मंत्रालय को चाहिए कि ऐसे टूरिस्ट स्पॉट को खोज कर छान कर भारत की जनता के सामने लाएं ताकि भारत की जनता अपने ही देश में घूमे फिरे और यही का पैसा यहीं पर रहे और हमारी अर्थव्यवस्था और मजबूत होगी क्योंकि बाहर जाने से डॉलर भी हमारे हाथ से बाहर जाता है हमारे पास रहेगा और रुपए भी हमारे पास रहेगा और हम और मजबूत बनेंगे मतलब आम के आम और गुठलियों के दाम
संपादकीय