छत्तीसगढ़ :- शहर से लेकर गांव तक सड़क से लेकर खेत तक गौवंश अपना हक मांग रहा है लेकिन शहर में हांका दल और गांव में किसानों के डंडे के अलावा इन्हें कुछ नही मिल रहा है यह आइने कि तरह देखा जा सकता है शासन और प्रशासन द्वारा नियम और कानून बनाये गये है कि जो पशुपालक इन्हें आवारा छोडेगा उनके खिलाफ कानूनी कार्यवाही की जाएगी लेकिन आज तक न तो प्रशासन और न ही शासन इन पशुपालकों को चिन्हित कर पाया है? कब तक यह वेजुवान तड़फते रहेंगे चिल्लाते रहेंगे यह सवालिया निशान बना है और बना रहेगा? सड़क से सदन तक बड़ी बड़ी कार्यवाही और खुलासे को लेकर मुद्दे उठाये जाते हैं लेकिन इन वेजुवान गौवंश केवल शहर में हांका दल और गांव में किसानों के शिकार बनते हैं। राष्ट्रीय पशु की संज्ञा देने की बात भी कई सामाजिक संगठन गौमाता के नाम पर रोटी सेंकने का दिखावा कर चुके हैं लेकिन अब वह भी चुप्पी साधे बैठे हैं। इन वेजुवान गौ वंश को कब और कौन न्याय देगा? किसान कहते हैं कि मेरी खेती घर रहे गौवंश और शहरी कहते हैं कि सड़क दुघर्टना के कारण है गौवंश तो फिर यह जाये तो जाये कहा?