हाईकोर्ट ने मांगा जवाब, हजारों युवा प्रतीक्षा में
- सुरेश सिंह बैस
बिलासपुर। आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के लिए केंद्र सरकार द्वारा वर्ष 2019 में लागू किए गए 10 प्रतिशत आरक्षण का लाभ छत्तीसगढ़ के युवाओं को अब तक नहीं मिल सका है। सात वर्ष बीत जाने के बाद भी राज्य में यह प्रावधान प्रभावी नहीं हो पाया है। परिणामस्वरूप हजारों पात्र युवा शैक्षणिक संस्थानों और सरकारी नौकरियों में आरक्षण के लाभ से वंचित हैं।
केंद्र में 2019 से लागू है ईडब्ल्यूएस प्रावधान
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने वर्ष 2019 में संविधान संशोधन के माध्यम से आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य वर्ग को 10 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया था। देश के अनेक राज्यों में यह व्यवस्था लागू भी हो चुकी है, किंतु छत्तीसगढ़ में यह अब तक अमल में नहीं आ सकी है।
राज्य में कांग्रेस और भाजपा दोनों ही दलों की सरकारें रहीं, परंतु ईडब्ल्यूएस आरक्षण को लेकर ठोस निर्णय नहीं लिया जा सका।
हाईकोर्ट की सख्ती
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने भी इस मामले में राज्य सरकार से जवाब तलब किया है। जस्टिस ए.के. प्रसाद की एकलपीठ ने याचिकाकर्ता पुष्पराज सिंह व अन्य की याचिका पर सुनवाई करते हुए सरकार से पूछा कि आखिर प्रदेश में ईडब्ल्यूएस आरक्षण अब तक लागू क्यों नहीं किया गया। कोर्ट ने राज्य सरकार को चार सप्ताह में जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे।याचिका में तर्क दिया गया है कि जब मध्य प्रदेश सहित अन्य राज्यों में 10 प्रतिशत ईडब्ल्यूएस आरक्षण प्रभावी है, तो छत्तीसगढ़ के युवाओं को इससे वंचित रखना समानता के अधिकार का उल्लंघन है।
76 प्रतिशत आरक्षण का विवाद बना रोड़ा
विधिक विशेषज्ञों के अनुसार, दिसंबर 2022 में तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की सरकार ने कुल आरक्षण सीमा को बढ़ाकर 76 प्रतिशत करने का विधेयक पारित किया था। इसमें एसटी को 32 प्रतिशत, एससी को 13 प्रतिशत, ओबीसी को 27 प्रतिशत तथा ईडब्ल्यूएस को 4 प्रतिशत आरक्षण का प्रस्ताव था।
इस कदम ने आरक्षण व्यवस्था को कानूनी उलझनों में डाल दिया, क्योंकि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा निर्धारित 50 प्रतिशत की सीमा से यह काफी अधिक था। राजभवन और न्यायिक प्रक्रिया के बीच यह विधेयक अटक गया और इसी के साथ ईडब्ल्यूएस प्रावधान भी प्रभावी नहीं हो सका।
भाजपा सरकार के सामने चुनौती
वर्तमान में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में भाजपा सरकार है। हाईकोर्ट की टिप्पणी के बाद अब यह स्पष्ट करना आवश्यक हो गया है कि राज्य सरकार केंद्र के अनुरूप 10 प्रतिशत ईडब्ल्यूएस आरक्षण को स्वतंत्र रूप से लागू करेगी या पूर्ववर्ती विवादित विधेयक के समाधान की प्रतीक्षा करेगी।
भाजपा के वरिष्ठ विधायक व पूर्व मंत्री अजय चंद्राकर ने पूर्ववर्ती सरकार को इस स्थिति के लिए जिम्मेदार ठहराया है। उनका कहना है कि आरक्षण का राजनीतिकरण किया गया, जिससे संवैधानिक प्रावधान उलझनों में फंस गए।
युवाओं में असंतोष
सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर युवाओं का कहना है कि केंद्र सरकार द्वारा विधिवत कानून बनाए जाने के बावजूद राज्य में इसे लागू न करना अन्यायपूर्ण है। अधिवक्ता अद्वित सिंह का कहना है कि जब अन्य राज्यों में यह प्रावधान प्रभावी है, तो छत्तीसगढ़ में सात वर्ष की देरी समझ से परे है।
आगे क्या?
अब निगाहें राज्य सरकार की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। क्या सरकार केंद्र के 10 प्रतिशत ईडब्ल्यूएस प्रावधान को अलग से लागू कर संवैधानिक अधिकार सुनिश्चित करेगी, या यह मामला राजनीतिक और कानूनी जटिलताओं में उलझा रहेगा,यह तो आने वाला समय बताएगा।फिलहाल, छत्तीसगढ़ के हजारों आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य वर्ग के युवा अवसर की प्रतीक्षा में हैं।