बिलासपुर। राजकिशोर नगर स्थित ब्रह्माकुमारीज़ के शिव-अनुराग भवन में आयोजित नौ दिवसीय “रामायण का आध्यात्मिक महत्व एवं जीवन प्रबंधन” श्रृंखला के आठवें दिन राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी ने धर्म की वास्तविक परिभाषा और मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम के जीवन से नेतृत्व गुणों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि रामायण केवल धार्मिक कथा नहीं, बल्कि “आत्माराम” की आध्यात्मिक यात्रा और श्रेष्ठ जीवन प्रबंधन की मार्गदर्शिका है।
दीदी ने स्पष्ट किया कि धर्म का अर्थ केवल बाहरी आडंबर नहीं, बल्कि जीवन में श्रेष्ठ गुणों की धारणा है। उन्होंने 10 व्यावहारिक सूत्रों के माध्यम से बताया कि संदेह, अनादर और दिखावा व्यक्ति को पतन की ओर ले जाते हैं, जबकि श्रद्धा, एकाग्रता, विनम्रता और स्वीकारोक्ति सफलता का मार्ग प्रशस्त करते हैं। “शुभ संकल्पों में विलंब नहीं करना चाहिए, अन्यथा अवसर हाथ से निकल जाता है।


कार्यक्रम में श्री राम के जीवन से 30 नेतृत्व गुणों को भी साझा किया गया। इनमें वचनबद्धता, अहंकार-शून्यता, सबको साथ लेकर चलने की क्षमता, दूरदर्शिता, कूटनीति और दूसरों को श्रेय देने जैसे गुण प्रमुख रहे। दीदी ने बताया कि “राम राज्य” आदर्श लोकतंत्र का प्रतीक है, जहाँ प्रेम और मर्यादा का संतुलन स्थापित होता है।
उन्होंने रावण के उदाहरण से समझाया कि अनेक गुण होने के बावजूद एक अहंकार ही उसके पतन का कारण बना। साथ ही, रावण द्वारा जीवन के अंतिम समय में दी गई तीन शिक्षाओं—हितैषियों की बात मानना, किसी को कमजोर न समझना और शुभ कार्य में विलंब न करना—को जीवन प्रबंधन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताया।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में स्नेहल सगदेव द्वारा “ऐसे हैं मेरे राम” गीत तथा बालिकाओं त्रिशा और अनन्या के नृत्य ने सभी को भावविभोर कर दिया।
अंत में सभी ने निराकार परमात्मा की याद में बैठकर अपने भीतर के विकारों रूपी रावण को समाप्त कर शांति और सद्गुणों से भरपूर “अयोध्या” जैसी स्थिति बनाने का संकल्प लिया।
— मीडिया प्रभाग, ब्रह्माकुमारीज़, टिकरापारा, बिलासपुर