बिलासपुर :- कार्यशाला का संचालन बीके चिरंजीवी द्वारा किया गया। उन्होंने बताया कि बच्चों के मस्तिष्क में विभिन्न प्रकार की ब्रेन वेव्स—जैसे बीटा, अल्फा, थीटा और डेल्टा—कार्य करती हैं, जो उनके सोचने, समझने और व्यवहार को प्रभावित करती हैं। उन्होंने समझाया कि यदि शिक्षक बच्चों की मानसिक स्थिति को समझकर पढ़ाते हैं, तो सीखने की प्रक्रिया अधिक प्रभावी और सहज बन जाती है।

इस अवसर पर बीके लता बहन ने आत्मा और परमात्मा का परिचय देने के पश्चात राजयोग मेडिटेशन करवाया। उनके मार्गदर्शन में उपस्थित शिक्षकों ने गहन शांति और आध्यात्मिक शक्ति की अनुभूति की। मेडिटेशन के माध्यम से मानसिक तनाव कम करने और एकाग्रता बढ़ाने के सरल उपाय भी साझा किए गए।
कार्यक्रम के अंत में प्राचार्य ने भूरी-भूरी प्रशंसा करते हुए इस कार्यशाला को अत्यंत उपयोगी और समयानुकूल बताया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के आयोजन शिक्षकों के व्यक्तित्व एवं शिक्षण शैली को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
वहीं उपस्थित शिक्षकों ने भी कार्यशाला को अत्यंत लाभकारी बताते हुए कहा कि इस प्रकार के ज्ञान और अभ्यास से वे बच्चों को बेहतर ढंग से समझ पाएंगे तथा उनकी कार्यक्षमता बढ़ाने में अधिक सक्षम बनेंगे।
