सच का 🪞आईना
बिलासपुर :- शहर का प्रमुख व्यापारिक केंद्र माने जाने वाला व्यापार विहार इन दिनों नकली और डुप्लीकेट माल के मामलों को लेकर लगातार सुर्खियों में है। प्रशासन की ताबड़तोड़ छापेमार कार्रवाई के बाद अब यह सवाल उठने लगा है कि क्या व्यापार विहार नकली सामान रखने और बेचने का अड्डा बनता जा रहा है, या फिर कुछ लालची लोगों की वजह से पूरे बाजार की छवि खराब हो रही है?
कभी माल धक्का रेलवे परिसर से शुरू हुई यह मंडी आज बिलासपुर संभाग की सबसे बड़ी व्यापारिक मंडियों में गिनी जाती है। लगभग 26 वर्षों से व्यापार विहार हजारों व्यापारियों और लाखों ग्राहकों की आर्थिक धुरी बना हुआ है। यहां करीब 400 दुकानें संचालित हैं और प्रतिदिन करोड़ों का कारोबार होता है। लेकिन हाल के दिनों में नकली और डुप्लीकेट ब्रांडेड प्रोडक्ट्स की लगातार हो रही बरामदगी ने पूरे बाजार को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
प्रशासन द्वारा लगातार छापेमारी कर नकली माल जब्त किया जा रहा है। कार्रवाई जरूरी भी है, क्योंकि नकली सामान केवल व्यापारिक अपराध नहीं बल्कि आम लोगों की सेहत, सुरक्षा और विश्वास के साथ सीधा खिलवाड़ है। सस्ते लालच में बिक रहे डुप्लीकेट सामान का शिकार गरीब ही नहीं बल्कि मध्यम वर्ग भी हो रहा है। लोग यह समझ ही नहीं पाते कि जो सामान वे अपने घर और बच्चों के लिए खरीद रहे हैं, वह असली है या नकली।

इसी मुद्दे पर व्यापार विहार एसोसिएशन के अध्यक्ष नानकराम खटुजा ने भी चिंता जताई। उन्होंने साफ कहा कि जो व्यापारी नकली या डुप्लीकेट माल बेच रहे हैं, उनका एसोसिएशन किसी भी हालत में समर्थन नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि प्रशासन को जो भी कानूनी कार्रवाई करनी है, वह पूरी सख्ती से करे, एसोसिएशन प्रशासन के साथ खड़ा है।
हालांकि उन्होंने एक महत्वपूर्ण सवाल भी उठाया — आखिर केवल छोटे दुकानदारों पर ही कार्रवाई क्यों? नकली माल बनाने वाले बड़े सप्लायर और नेटवर्क कब पकड़ में आएंगे?
उनका कहना है कि बाजार में बिकने वाले माल का बड़ा हिस्सा सही और असली होता है, लेकिन कुछ लोग चंद पैसों के लालच में गलत रास्ता अपनाकर पूरे व्यापार जगत को बदनाम कर रहे हैं। अगर प्रशासन उन फैक्ट्रियों, गोदामों और सप्लाई चैन तक पहुंचे जहां से नकली माल तैयार होकर बाजारों में पहुंचता है, तो इस गोरखधंधे पर स्थायी रोक लगाई जा सकती है।
व्यापारियों का भी कहना है कि “हम वर्षों से ईमानदारी से व्यापार कर रहे हैं, लेकिन कुछ गलत लोगों की वजह से पूरे व्यापार विहार की छवि धूमिल हो रही है। इसका असर हमारे कारोबार पर भी पड़ रहा है।”
दरअसल, नकली सामान का नेटवर्क केवल एक बाजार तक सीमित नहीं होता। यह शहर, गांव, गोदामों और राज्यों तक फैला होता है। कहीं किराए के कमरों में स्टॉक रखा जाता है, तो कहीं घरों से सप्लाई होती है। ऐसे में केवल छोटे दुकानदारों पर कार्रवाई काफी नहीं मानी जा सकती। जरूरत उस पूरे नेटवर्क को तोड़ने की है, जहां से नकली सामान तैयार होकर बाजार तक पहुंच रहा है।
यह भी सच है कि हर व्यापारी गलत नहीं होता। जिस तरह हाथ की पांचों उंगलियां बराबर नहीं होतीं, उसी तरह हर दुकानदार को शक की नजर से देखना भी उचित नहीं। ग्राहकों को खरीदारी करते समय सतर्क रहने, सामान की जांच-पड़ताल करने और बिल लेने की आदत अपनानी होगी।
साथ ही व्यापारिक संगठनों को भी अब कठोर रुख अपनाना होगा। ऐसे व्यापारियों को एसोसिएशन से बाहर किया जाना चाहिए जो नकली माल बेचकर पूरे बाजार और ईमानदार व्यापारियों की साख पर दाग लगा रहे हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है —
क्या प्रशासन केवल छोटी छोटी 🐟🦈🐋मछलियों तक सीमित रहेगा, या फिर नकली कारोबार के बड़े 🐊मगरमच्छों तक भी शिकंजा पहुंचेगा?
