
इस संबंध में पीड़िता के परिवार जनों के द्वारा भी विरोध जताया गया है। अतः राजनंदगांव पुलिस निवेदन करती ही की कृपया भविष्य में सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय को ध्यान में रखते हुए समाचार प्रेषित किए जायें। साथ ही निवेदन करती है कि इस प्रकार के वीडियोज जहाँ पीड़िता की पहचान उजागर हो रही हो वे डिलीट किए जाएँ, ताकि माननीय न्यायालय के आदेश की अवहेलना ना हो। धन्यवाद सहित- राजनंदगाँव पुलिस।जजमेंट- Nipun Saxena v. Union of IndiaCitation: (2019) 2 SCC 703.इस निर्णय में सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि बलात्कार (धारा 376 IPC, वर्तमान में BNS के समतुल्य प्रावधान) की पीड़िता की पहचान किसी भी परिस्थिति में सार्वजनिक नहीं की जा सकती|न्यायालय ने कहा कि “पहचान (Identity)” का अर्थ केवल पीड़िता का नाम नहीं है, बल्कि ऐसी कोई भी जानकारी जिससे उसकी पहचान हो सके, जैसे—* नाम* पिता या पति का नाम* पता* फोटो* विद्यालय/कॉलेज का नाम* कार्यस्थल* गाँव या मोहल्ले का नाम* अथवा कोई भी ऐसी जानकारी जिससे सामान्य व्यक्ति पीड़िता की पहचान कर सके।
