
रायपुर:छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य सेवाएं आने वाले दिनों में चरमरा सकती हैं। अपनी लंबे समय से लंबित मांगों को लेकर प्रदेशभर की नर्सेस अब आर-पार की लड़ाई के मूड में आ चुकी हैं। छत्तीसगढ़ प्रदेश नर्सेस एसोसिएशन के आह्वान पर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों, जिला अस्पतालों, आयुर्वेदिक अस्पतालों और मानसिक रोग चिकित्सालयों में कार्यरत समस्त नर्सिंग संवर्ग के कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। 30 अक्टूबर को राजधानी रायपुर में हुए विशाल सांकेतिक धरना-प्रदर्शन के बाद अब आंदोलन ने तूल पकड़ लिया है।30 अक्टूबर को रायपुर में उमड़ी भीड़, तहसीलदार को सौंपा ज्ञापनछत्तीसगढ़ के सभी जिलों से आए हजारों नर्सिंग कर्मचारियों ने 30 अक्टूबर को सामूहिक अवकाश लिया और राजधानी रायपुर में एकत्र होकर दिनभर अपनी मांगों को लेकर बुलंद आवाज उठाई।इस दौरान राजधानी में जमकर नारेबाजी की गई और शासन-प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया गया। प्रदर्शन के अंत में नर्सों ने मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव के नाम एक बार फिर ज्ञापन तहसीलदार महोदय को सौंपा, जिसमें उनकी मांगों पर जल्द से जल्द सकारात्मक पहल करने की पुरजोर अपील की गई।क्या हैं मुख्य मांगें और पुराना इतिहास?नर्सिंग स्टाफ लंबे समय से अपने ग्रेड पे (वेतनमान) को बढ़ाए जाने की मुख्य मांग पर अड़ा हुआ है। संघ की प्रदेश अध्यक्ष सुमन शर्मा ने जानकारी दी कि: साल 2018 का आंदोलन: इस मांग को लेकर साल 2018 में बड़ा आंदोलन किया गया था, जिसके बाद प्रशासनिक कार्रवाई का सामना करना पड़ा था। उस दौरान सरकार ने एक कमेटी का गठन किया था जिसने ग्रेड पे बढ़ाने की अनुशंसा की थी, लेकिन 8 साल बीत जाने के बाद भी वे अनुशंसाएं आज तक फाइलों में ही दबी हुई हैं। साल 2023 का संघर्ष: छत्तीसगढ़ हेल्थ फेडरेशन के बैनर तले हुए पिछले आंदोलनों में लगभग 2500 से अधिक कर्मचारियों को निलंबन और बर्खास्तगी जैसी सख्त सजाएं भुगतनी पड़ी थीं। निराशा और आक्रोश: लगातार पत्राचार और मौखिक निवेदन के बाद भी शासन-प्रशासन द्वारा कोई ठोस निर्णय न लिए जाने के कारण कर्मचारियों में भारी निराशा और आक्रोश व्याप्त है।आंदोलन के चरण और दीपावली का अल्टीमेटमसरकार का ध्यान आकर्षित करने के लिए नर्सेस ने पहले ही अपने उच्च अधिकारियों और विभागीय मंत्रियों को सूचना पत्र सौंप दिया था। तय चरणों के अनुसार:1. 7 अक्टूबर: प्रदेशभर में भोजन अवकाश के दौरान संस्थाओं के बाहर प्रदर्शन कर मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव के नाम ज्ञापन सौंपा गया।2. 30 अक्टूबर: सामूहिक अवकाश लेकर राजधानी रायपुर में एक दिवसीय विशाल सांकेतिक धरना-प्रदर्शन किया गया और ज्ञापन सौंपा गया।3. दीपावली तक की चेतावनी: संघ ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि दीपावली तक उनकी मांगें नहीं मानी जाती हैं, तो इसके बाद अनिश्चितकालीन आंदोलन (हड़ताल) का आगाज किया जाएगा।चरमरा सकती हैं स्वास्थ्य सेवाएं, शासन पर होगी जिम्मेदारीनर्सिंग एसोसिएशन ने साफ कर दिया है कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं और अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू हुआ, तो प्रदेशभर की नर्सेस के काम पर न लौटने से अस्पतालों में मरीजों की देखभाल और चिकित्सा व्यवस्था पूरी तरह चरमरा सकती है, जिससे आम जनता को भारी असुविधा का सामना करना पड़ेगा।संघ ने शासन-प्रशासन को आगाह किया है कि इस स्थिति से उत्पन्न होने वाली किसी भी विषम परिस्थिति की समस्त जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी। कर्मचारियों ने सरकार से संवेदनशीलता दिखाते हुए वर्षों पुरानी जायज मांगों को जल्द से जल्द पूरा करने की अपील की है। 30 अक्टूबर के इस ऐतिहासिक धरना प्रदर्शन में प्रदेशभर के सभी जिलों के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में सदस्य शामिल हुए।
