बिलासपुर : कृषि विज्ञान केन्द्र में 15 फरवरी को छत्तीसगढ़ राज्य अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण (क्रेडा) द्वारा एक दिवसीय कृषक कार्यशाला एवं ऊर्जा एवं जल संरक्षण विषय पर आयोजित किया गया। कार्यक्रम में जिले के 80 किसानों ने भाग लिया तथा वैज्ञानिकों से परिचर्चा की। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में कृषि महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. आर.के. एस. तिवारी ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि पानी और ऊर्जा का संरक्षण बहुत जरूरी है ताकि बाद में पछतावा ना करना पड़े क्योंकि लगातार धान की फसल लेने से जल की बर्बादी होती है इसलिए हमें फसल चक्र को अपनाना चाहिए ताकि आने वाली पीढ़ी के लिए जल एवं ऊर्जा संरक्षण किया जा सके। जैविक एवं रासायनिक खाद एवं कीटनाशकों का प्रयोग समन्वित रूप से करें जिससे मृदा की उर्वरता बनी रहे। क्रेडा के कार्यपालन अभियंता श्री संतोष धु्रव ने क्रेडा द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं की जानकारी प्रदान की तथा किसानों को इसे अपनाने हेतु प्रेरित किया।
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इस अवसर पर कृषि विज्ञान केन्द्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. अरूण कुमार त्रिपाठी ने किसानों को संबोधित करते हुए जल संरक्षण क्यों और कैसे करना चाहिए विषय पर जानकारी प्रदान की एवं के. व्ही. के द्वारा किसान हित में संचालित योजनाओं की जानकारी प्रदान की। कृषि विज्ञान केन्द्र की सस्य वैज्ञानिक डॉ. शिल्पा कौशिक ने टपक सिंचाई द्वारा जल संरक्षण कैसे करें विषय पर अपना व्याख्यान दिया। कार्यशाला के.व्ही. के. के उद्यानिकी वैज्ञानिक डॉ. अमित शुक्ला ने किसानों को सघन बागवानी कर कैसे ऊर्जा एवं जल का संरक्षण करते हुए कैसे अधिक लाभ कमाया जा सकता है इस पर विस्तृत जानकारी किसानों का प्रदान की परिचर्चा में क्रेडा के असिस्टेंट इंजीनियर श्री एन.के. राय ने भी किसानों को ऊर्जा संरक्षण के बारे में बताया।
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इस अवसर पर केन्द्र के वैज्ञानिक इंजी. पंकज मिंज ने यंत्रीकरण द्वारा कैसे ऊर्जा का संरक्षण कर कृषि को लाभप्रद बताया जा सकता है इस पर विस्तारपूर्वक कृषकों को समझाया। कृषक परिचर्चा के दौरान कृषि विज्ञान केन्द्र बिलासपुर के वैज्ञानिकों ने कृषकों द्वारा उठाए गए कृषि संबंधित समस्याओं का निराकरण निराकरण किया। कार्यक्रम का मंच संचालन वैज्ञानिक डॉ. शिल्पा कौशिक ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन वैज्ञानिक डॉ. अमित शुक्ला ने प्रदान किया। इस अवसर पर कृषि विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिक श्री जयंत साहू, हेमकांती बंजारे, डॉ. स्वाति शर्मा, डॉ. चंचला रानी पटेल तथा श्रीमती सुशीला ओहदार उपस्थित थीं।
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