बिलासपुर गुरु नानक जयंती पर्व के उपलक्ष में तोरवा में प्रभात फेरी निकाली गई जिसमें कटनी मेहर दरबार से पधारे आदरणीय संत नारायण भाई जी का प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय शिव गुलजार भवन तोरवा की बहनों द्वारा पुष्प गुच्चो साल तथा श्रीफल से सम्मानित किया गया तथा प्रभात फेरी में उपस्थित सभी लोगों को शरबत एवं प्रसाद बांटा गया इसी क्रम में आदरणीय बीके राखी दीदी जी ने गुरु नानक जी के संदेश को जन-जन तक पहुंचाते हुए कहां की की है गुरु ग्रंथ में यह वर्णन है जप साहिब सुखमणि अर्थात जब हम परमात्मा का सच्चे दिल से सुमिरन करते हैं तभी हमें सच्ची सुख और शांति मिलती है गुरु नानक जी हमेशा यह कहा करते थे एक ओंकार निराकार अर्थात् परमात्मा का स्वरूप निराकार है हर एक जीव प्राणी में आत्मा विराजमान होती है जिसका स्वरूप निराकार होता है और निराकार आत्मा जब तक इस शरीर के भीतर है तब इस शरीर में प्राण है यदि आत्मा शरीर से बाहर निकल गई तब शरीर निर्जीव है और आत्मिक दृष्टि के नाते निराकार परमात्मा की संतान होने के नाते हम सब आपस में भाई-भाई है जब हम सभी को भाई-भाई की दृष्टि से देखते हैं तब हर आत्मा के प्रति स्नेह प्रेम तथा अपनापन का एहसास होता है यही संदेश गुरु नानक जी ने हम सबको दिया, यदि हम गुरु नानक जी के इस संदेश को अपने जीवन में अपना लेंगे और हर आत्मा के प्रति आत्मिक दृष्टि रखेंगे तब हमारे अंदर सर्व आत्माओं के प्रति स्नेह प्रेम और सहयोग की भावना उत्पन्न होगी इस प्रकार यह पूरा संसार आपस में भाईचारे के साथ रहेगा और हमारा जो स्लोगन है हिंदू मुस्लिम सिख इसाई सब आपस में भाई-भाई यह सार्थक हो जाएगा जिस प्रकार एक बीज मे सारा वृक्ष समाया है उसी प्रकार इस मनुष्य सृष्टि रूपी वृक्ष का बीज एक मात्र परमात्मा शिव ही है जिनकी हम सभी आत्माएं संतान हैं

