
*꧁‼️जय राम जी की ‼️꧂*
सनातनी समाज की दुर्गति का एक प्रमुख कारण आलस्य ही है। इन्होंने धर्मशास्त्रों वेदों, उपनिषदों का स्वाध्याय, चिंतन, मनन, अध्ययन बन्द कर दिया।
जहाँ से हमें ऊर्जा मिलती, जानकारी मिलती, स्वाभिमान मिलता, मार्गदर्शन मिलता वे सभी मार्ग हमने स्वयं बंद दिये। इसीलिए अधिकांश सनातनी अपनी संस्कृति, सभ्यता से विमुख होते चले जा रहे हैं और कुछ लोभ में आकर अन्य धर्मों को अपना रहे हैं।
जो वेद-पुराण गीता आदि ग्रन्थों को नहीं पढ़ते, उन्हें पता ही नहीं कि धर्म का परित्याग नहीं करना चाहिए।
इस सनातनी समाज का उद्धार केवल वेदादि ग्रन्थ और सत्संग ही कर सकते हैं। यदि सभी वेद-उपनिषद, पुराण आदि ग्रन्थ पढने लग जाएँ तो हम सभी का उद्धार हो सकता है।
हम परिश्रमी, उद्योगी, आर्थिक सम्पन्न, स्वावलंबी बन सकते हैं। आवश्यकता इस बात की है कि हम ऊर्जा प्राच्य वेदादि ग्रन्थों से ग्रहण करें, देव भाषा संस्कृत का आश्रय ग्रहण करें, सनातन संस्कृति के महान प्रतीकों का अनुसरण करें।
*आज का दिन शुभ मङ्गलमय हो।*