
श्री झूलेलाल चालिहा महोत्सव झूलेलाल मंदिर हेमू नगर बिलासपुर में श्रदां पूर्वक मनाया जा रहा है इसी कड़ी में आज झूलेलाल धूनी का आयोजन विजय मूलचंदानी परिवार के द्वारा किया गया कार्यक्रम संध्या 6:00 बजे आरंभ हुआ भगवान झूलेलाल बाबा गुरु गुरुमुख दास जी की फोटो पर पुष्प अर्पण कर दीप प्रज्वलित करके की गई भक्तों के द्वारा भक्ति भरे कई भजन और गीत गाए गए जी से सुनकर उपस्थित श्रद्धालु झूम उठे
इस अवसर पर मंदिर की सेवादारी के द्वारा एक ज्ञानवर्धक प्रसंग सुनाया गया उन्होंने बताया कि यह कथा प्रसंग, वृंदावन का है,एक भक्त था विजय जो प्रतिदिन नितनेम वृंदावन में बांके बिहारी मंदिर में जाकर आठ टाइम की आरती में शामिल होता था वह पूजा अर्चना करता था सुबह से लेकर रात तक वह आरती में जरूर जाता था आठो टाइम उसका यह नितनेम बन चुका था एक दिन मंदिर के बाहर एक साधु संत खड़े थे आरती में जाने के लिए सुबह जब विजय पहुंचा और कहा क्या बात है महाराज जी चलिए चरण पादुका रखीए और अंदर चलिए आरती में तो उस साधु महात्मा ने कहा बेटा मैं प्रतिदिन यहां आता हूं पर मेरी चरण पादुका चोरी हो जाती है इसलिए आज मैं सोच रहा हूं कि किसे यहां पर कह कर जाऊं कि मैंरी चरण पादुका का ध्यान रखें तब मैं अंदर आरती में जाऊंगा पर कोई दिख नहीं रहा है जिसे मैं यहां रोक कर जाऊं तब विजय ने कहा महाराज जी आप अंदर जाइए आपकी चरण पादुका का ध्यान में रख रहा हूं इसे कोई नहीं ले जाएगा आप जाइए आरती में शामिल हुऐ , विजय महाराज जी के चरण पादुका को हाथों में लिए बैठा था साधु महात्मा अंदर गए आरती में आरती समापन हुई
कई भक्तजन बाहर निकले पर साधु महात्मा नहीं आऐ , फिर दूसरी आरती हुई तब भी नहीं आए,ऐसे करते-करते रात्रि की आठवीं आरती समाप्त हुई तब वह साधु महात्मा बाहर निकले और विजय से चरण पादूका ली और कहा बेटा आज मेरे कारण तुम्हारी जो नितनेम है वह टूट गया क्योंकि आज तुमने किसी भी आरती में शामिल नहीं हो पाए ,विजय ने कहा मुझे किसी भी बात की चिंता नहीं है मुझे जो सेवा चाहिए थी आज मुझे वह सेवा मिल गई इस बात कि मुझे बहुत खुशी है ,
एक-एक करके सब भक्तजन बाहर निकल गए और वह साधु महात्मा भी चरण पादुका पहन कर चले गए रात्रि के 10:00 बज गए थे उन्होंने सोचा कोई बात नहीं आरती में शामिल नहीं हो पाया तो यही बाहर से ही माथा टेक लेता हूं पर मंदिर के कपाट भी बंद हो चुके थे तो उन्होंने कहा कोई बात नहीं मंदिर के कपाट के ही जमीन पर मत्था टेक लेता हूं जैसे ही वह जमीन में माथा टेका तो जमीन जो पत्थर की थी मार्बल की थी वह एकदम नॉर्मल वह कोमल लग रही थी जब उन्होंने 🙆सिर उठाकर सामने ऊपर देखा तो साथ-साथ बांके बिहारी खड़े थे वह देखकर विजय हैरान और दंग रह गया और खुशी के मारे आंसू बहने लगे भगवान ने कहा बेटा विजय मैंने तुम्हारी भक्ति देखी ओर जो तुम्हारा प्रेम है आज उसे भी मैंने देख लिया और तुम्हारी भक्ति और प्रेम के कारण आज तुम्हें दर्शन हो रहे हैं इस कहानी का सार यह है कि
हम पूजा पाठ करते हैं भक्ति करते हैं पर प्रेम भगवान से नहीं करते हैं वह भाव हमारा नहीं होता है जो होना चाहिए भगवान को पाने का अगर जिस दिन यह भाव आ जाएगा उसी दिन भगवान साक्षात – साक्षात आपके सामने खड़े हो जाएंगे, आपको दर्शन देंगे
आखिर में आरती की गई पल्लो पाया गया प्रसाद वितरण किया गया आज के इस पूरे कार्यक्रम को सफल बनाने में श्री झूलेलाल मंदिर सेवा समिति हेमू नगर के सभी सेवादारियों का विशेष सहयोग रहा
भवदीय
विजय दुसेजा