विजय की कलम
(संपादकीय)
जैसे-जैसे ठंडी दिल्ली में बढ़ रही
है वैसे-वैसे चुनावी गर्मी भी बढ़ रही है इस बार का चुनाव अलग ही चुनाव हो गया है लोकसभा में एक साथ इंडिया गठबंधन के सदस्य कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने संयुक्त रूप से चुनाव लड़ा था पर दोनों को एक भी सीट नहीं मिली थी,इसलिए इसबार दोनों अलग हो गए और विधानसभा में अब आमने-सामने लड़ रहे हैं यह चुनाव त्रिकोणीय हो गया है भाजपा आम आदमी पार्टी और कांग्रेस कौन बाजी मारेगी यह तो समय ही बताएगा पर कांग्रेस अपना अस्तित्व बचाने के लिए व किंग मेकर के लिए चुनाव लड़ रही है उसे भी पता है कि सरकार उसकी बन नहीं पाएगी पर कम से कम वह यह जरूर चाहेगी कि केजरीवाल हार जाए? यां वह किंग मेकर की भूमिका में आ जाए ताकि केजरीवाल को भी मजा चखया जा सके और जो हवा में उड़ रहा है उसकी हवा निकल सके? केजरीवाल को समझ में आ गया है कि यह चुनाव आसान नहीं है क्योंकि खुद वह उसकी पार्टी के कई नेता तिहाड़ जेल की हवा खा चुके हैं और जो विपक्ष आरोप लगा रहे हैं बड़े-बड़े घोटाले के अब जनता भी समझ रही है जो दिल्ली मॉडल था उसकी हवा निकल चुकी है अब सिर्फ एक धर्म के एक मजहब के लोगों को खुश करके चुनाव जीता नहीं जा सकता है यह वह समझ गए हैं जब बीजेपी हरियाणा और महाराष्ट्र में चुनाव जीता तो उसे भी समझ में आ गया है कि हिंदू वोट जरूरी है तो उन्हें खुश करने के लिए सुबह-शाम मंदिर जाना वह उनके लिए नई-नई घोषणाएं करना आम हो गया है पर कांग्रेस भी पीछा नहीं छोड़ रही है वह तीर के ऊपर तीर अपने लफ्जों से चला रही है कांग्रेस के किस नेता ने कहा यह केजरीवाल नहीं फर्जीवाल है?
जितने घोटाले इसने कीये है 11 साल में और किसने नहीं किए होंगे ?

अब कांग्रेस भी चुन चुन कर अपने शब्दों के माध्यम से तीर चला रही है वह पूरा हिसाब 11 साल का लेना चाहती है और अपना वनवास जो काट रही है उसका हिसाब भी लेना चाहती है और राहुल ने उनको खुली छूट दे दी है की कैसे भी करके इस बार कांग्रेस का खाता खोलना चाहिए और किंग मेकर की भूमिका में आ जाए तो सोने पर सुहागा होगा? इसलिए कांग्रेस के सभी नेता दिन रात लगे हुए हैं केजरीवाल की ढोल की पोल खोलने में आम आदमी पार्टी भी भाजपा के साथ-साथ अब कांग्रेस को भी अपने निशाने पर ले रही है कांग्रेस अकेली खड़ी है इंडिया पाटर्नर के बाकी साथी आम आदमी पार्टी केजरीवाल का साथ दे रहे हैं कितना रोचक चुनाव है सत्ता के लिए कुछ समय पहले लोकसभा में एक साथ थे और अब विधानसभा में अलग हो गए कुर्सी जो खेल कराए बहुत ही निराला है जिसे हमने पाला है हमें निगल रहा है अजब खेल भाई अजब खेल,
यह कुर्सी का किस्सा बहुत ही खतरनाक है सत्ता की भूख और लालच उससे भी ज्यादा खतरनाक है जिसे एक बार लग जाए तो फिर आसानी से जाती नहीं है और वही आदत आप को चुकी है आम आदमी पार्टी को भी सत्ता की लत अब वह आसानी से छोड़ना नहीं चाहती है किसी भी तरह वापस सत्ता पाना चाहती हैं भले ही फुल बहुमत मत मिले कम से कम सत्ता में काबीज हो जाए इतना मिल जाए और भाजपा भी अपना वनवास खत्म करना चाहती है वापस दिल्ली में सत्ता पाना चाहती है अब सारा दामोदर मोदी और योगी पर है क्या इनका जादू चल पाएगा क्या बीजेपी दिल्ली में वापसी करेगी यह तो आने वाला समय ही बताएगा कि दिल्ली की जनता क्या लोकसभा का रिजल्ट दौहरायेगी या जैसे दो विधानसभा चुनाव में उन्होंने खेल खेला है वैसे खेल खेलेगी वक्त का इंतजार करें दिल्ली की जनता क्या फैसला करती है
क्या फ्री वाली रेवड़ियों में इस बार भी दिल्ली की जनता फंसेगी या नहीं देखना होगा दिल्ली की जनता क्या फैसला करती है पर इतना तय है हार जीत किसी की भी हो कुछ ना कुछ नया तो जरूर होगा और इतिहास भी बनेगा