चंद्र महोत्सव के अवसर पर प्रति माह की तरह इस महा भी श्री मैहड़ दरबार बिलासपुर स्थित दरबार साहब में चंद्र महोत्सव मनाया गया कार्यक्रम की शुरूआत गुरु नानक देव जी और बाबा थावर दास साहेब जी के फोटो पर पुष्प अर्पण कर दीप प्रज्वलित करके की गई, महिलाओं के द्वारा संध्या 7 से 8 बजे सुखमनी का पाठ किया गया रात्रि 8 से 10 बजे भजन कीर्तन सत्संग का आयोजन किया गया भाई साहब कुंदन डोडवानी के द्वारा अपनी अमृतवाणी में सत्संग की शुरुआत गुरु नानक देव जी के गुणवानी, से की उन्होंने सत्संग में फरमाया कि जिसने सेवा की है उसने सब कुछ पाया है और रोज बंदगी कर जब तक है सांस में सांस है जो भी सेवा करो भाव से करो भाव से की गई सेवा ही सच्ची सेवा होती है ,दिखावे की सेवा मत करो,

( सौं काम छोड़कर स्नान करें, हजार काम छोड़कर खाना खाएं, लाख काम छोड़कर संतों की सेवा करें, करोड़ काम छोड़कर हरि का नाम जपे ,)
पर आजकल यह सब नहीं हो रहा है बल्कि जस्ट इससे उल्टा होता है जिसके कारण दुख तकलीफ परेशानियां आपके जीवन में आती हैं उन्होंने एक प्रसंग सुनाया गुरु नानक देव महाराज जी का कि वह एक दिन एक गांव में जा रहे थे तब गांव में रहने वाली एक महिला ने गुरु नानक जी को देखा परणाम् किया और अपने घर चलने के लिए कहा तो उनके मन में भाव आया कि मैं दूध गुरु जी को दूं तो जब वह दूध लेने गई तो दूध में मलाई जमी हुई थी तो उसने जब मलाई हटाकर जैसे गिलास में दूध उतारना शुरू किया तो कुछ मलाई गिलास में आ गई तो वह अरे यह क्या हो गया कह कर, अपने मन में बोलने लगी पर बाद में वह दूध का गिलास लेकर जैसे ही गुरु नानक देव जी के पास पहुंची और कहा इसे ग्रहण

कीजिए ,तब गुरु नानक देव जी ने मना कर दिया उसने उन्होंने कहा कि जब तुमने पहले दूध पिलाने के बात की तो तुम्हारे अंदर भाव था भक्ति थी प्रेम था पर जब तुम दूध को गिलास में उतार रही थी तब उस दूध में मलाई थोड़ी सी गिर गई तो तुमने अरे यह क्या हो गया कह कर कहा इसका मतलब तुम्हारा भाव उस समय नहीं था और अगर यह दूध में पियूंगा तो वह जो तुमने अरे यह क्या हो गया जो कहा है जो तुम्हारा भाव नहीं था वह भी मेरे अंदर में समा जाया जाएगा तो इसलिए इस दूध को मैं ग्रहण नहीं कर सकता हूं ,
इस प्रसंग का अर्थ यह है कि आप जब भी किसी की सेवा करते हैं तो सच्चे मन से और भाव से करनी चाहिए आप अगर घर में खाना भी बनाते हैं तो अगर आप अच्छे मन से भाव से खाना बनाएंगे भगवान को ध्यान में रखकर बनाएंगे नाम जपकर बनाएंगे तो उसमें भी अमृत रूपी स्वाद आएगा क्योंकि, जो काम हम करते समय हमारे मन में जो विचार आते हैं वैसा ही गुण हमारे खाने में भी पहुंच जाता है इसीलिए कोई भी कार्य करें अच्छे मन से करें सच्चे मन से करें और भाव से करें इस अवसर पर यश डोडवानी के द्वारा कई भक्ति भरे भजन वह गीत गए जीसे सुनकर भक्तजन जो झुम उठे, कार्यक्रम के आखिर में प्रार्थना की गई प्रसाद वितरण किया गया आए हुए सभी भक्तजनों के लिए आम भंडारा का आयोजन किया गया बड़ी संख्या में भक्त जनो ने भंडारा ग्रहण किया आज के इस पूरे कार्यक्रम को सफल बनाने में बाबा थावर दास बाबा मैहड़ दरबार के सभी सेवादारियों का विशेष सहयोग रहा