बिलासपुर :- होली का त्योहार रंग ओर प्यार का त्यौहार है और इसमे सिंधी घिहर की बात ना हो तो आनंद ही नहीं आता, वैसे तो होली में खाने के कई सारे व्यंजन लोग बनाते हैं, पर सिंधी समाज में खास तौर पर सिंधी घिहर की मांग ज्यादा होती है, यह परंपरा सिंध से चली आ रही है, तिज त्यौहार आता है तो अपने बेटी,व बहन को ससुराल में खाने पीने के सामान, मिष्ठान लेकर जाते हैं होली के त्यौहार में भी सिंधी समाज के लोग घिहर, गुजींया ,खोवा का मीठा समोसा, सलोनी, रंग गुलाल मिठाइयां लेकर अपनी बहन के यहां बेटी के ससुराल में जाते हैं जैसे जैसे समय बीत रहा है वैसे-वैसे अब यह परंपरा भी विलुप्त होने के कगार पर पहुंच गई है जब हमारे बड़े बुजुर्ग थे तो हर तिज त्यौहार को एवं परंपरा को नियम के साथ पालन करते थे पर अब नई पीढ़ी को उनकी चिंता प्रवहा नहीं है फिर भी जो अभी हमारे बड़े हैं जो इस बात को आज भी समझते हैं इन चीजों को महत्व देते हैं उनके लिए यह बहुत ही पूणय का कार्य है और इस बार भी होली में सिंधी कॉलोनी में घनश्याम हिंदुजा के द्वारा सिंधी घिहर की दुकान लगाई गई है जैसा कि उन्होंने बताया कि विगत 40 सालों से ईस कार्य में जुड़े हुवे हैं और प्रत्येक वर्ष होली के 10 दिन पूर्व ही दुकान लगाने शुरू कर देते हैं क्योंकि जो आसपास के लोग हैं वह तो खरीद लेंगे जो दूर दराज के लोग हैं वह पहले ही आकर ले जाते हैं वह आर्डर भी देते हैं

उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष 160 रुपए किलो था घिहर अभी ₹200 किलो हो गए ,चीनी तेल शक्कर मैदा , वह सभी खाद्य सामग्री का रेट बढ़ने के कारण इसमें भी थोड़ा रेट बड़ा है इस बार घिहर का रेट ₹200 किलो है गुजिया ₹320 किलो मीठा समोसा ₹280 किलो सलोनी ₹200 किलो बिक रही है उन्होंने कहा कि अभी रिस्पांस ठीक है बाहर के लोग ज्यादा आ रहे हैं वह आर्डर बहुत मिल रहा है बाकी लोकल लोग आखिरी में एक-दो दिन पहले ही खरीदारी ज्यादा करते हैं और सिंधी कॉलोनी में मात्र एक दुकान है तो इस कारण हमें इसका फायदा मिलता है वह हमारा माल सब बिक जाता है अभी बाहर के भी आसपास के जिलों के भी लोग आ रहे हैं वह आर्डर में भी हम सामान बना रहे हैं इस बार की होली अच्छी मनेगी क्योंकि हमारा धंधा अच्छा चल रहा है
