विजय की कलम
25 सालों में पहली जब से छत्तीसगढ़ राज्य बना है कांग्रेस का बुरा हाल इससे पहले कभी नहीं हुआ इस बार कांग्रेस का हाल बेहाल हो गया,
ना दिवाली जैसे पटाखे फूट ना होली जैसे गुलाल और रंग लगा बस गर्मी जैसे सूखा और फटीचर जैसी हालत हो गई इस बार? कांग्रेस हो गई पूरी साफ, पर कांग्रेस पार्टी ने भी नहीं सोचा था कि विधानसभा चुनाव हारने के बाद, लोकसभा चुनाव हारने के बाद ,नगरीय निकाय चुनाव हारने के बाद ,रही सही कसर पंचायत चुनाव ने पूरी कर दी, कई शहरों में तो कांग्रेस कांग्रेसियों ने हरा दिया?
अब आपस में ही लड़ रहे हैं कांग्रेस की 🚤नाव ऐसे डूबी की बचाने वाला भी कोई नहीं रहा और पार्टी के जो कार्यक्रता थे वह बेचारे आखरी में खड़े होकर आंसू बहा रहे हैं ,
यह पार्टी का हाल देखकर,
नेता नेता ही रह गया और कार्यकर्ता बैचारा कार्यकर्ता ही रहा गया?
भाजपा को इस बार बंपर जीत मिली है गांव से लेकर शहर तक शहर से लेकर प्रदेश तक कांग्रेस हो गए पूरी साफ ,
किसने भी नहीं सोचा था कांग्रेस का हाल इतना बुरा होगा कि उसकी इस हालात पर रोने वाले भी कोई नहीं मिलेंगा, और जो रोएंगे भी वह अपने नहीं पराए होंगे?
इसे अब मोदी का जादू कहे या योगी की तपस्या कहे,
यां कुंभ मेले का फल कहे जो भाजपा की हो गई बल्ले बल्ले नगरीय निकाय के चुनाव में
(दिल्ली की हवा ऐसे चली कि कांग्रेस कि खटिया हो गई खड़ी )
सारे राजनीतिक पंडितों का हो गया गणित फेल ,और कांग्रेस हो गई ढेर, बीजेपी हो गई पास ,
अब गांव से लेकर दिल्ली तक भाजपा का ही दबदबा है वह झंडा लहरा रहा है अब देखना है कि इतना बहुमत मिलने के बाद भी अगर भाजपा जनता से किया किये गये वादे पूरे नहीं कर पाती है तो 4 साल के बाद जो हाल कांग्रेस का हुआ है वह भाजपा का भी हो सकता है?
पर भाजपा समझदार पार्टी है वह ऐसा कभी नहीं करेगी कि दोबारा कांग्रेस को मौका मिले जमीन पाने का या मजबूत करने का इस स्थिति के बाद भी अगर कांग्रेस अभी भी नहीं बदली वह अपने जमीन से जुड़े कार्यकर्ताओं को महत्व नहीं दिया तो फिर से उसे 15 साल का वनवास जाना पड़ेगा अब इस दुर्गति के बाद क्या कांग्रेस जागेगी? समझेगी वह अपने अहंकार को खत्म करेगी? कार्यकर्ता को मान सम्मान देगी?
और जनता से फिर से जुड़ेगी जनता के दुख तकलीफ दर्द में शामिल होगी? जनता के मुद्दों को उठाएगी, यह सब देखना अब लाजमी होगा? जनता का कितना भला कर सकती है भाजपा प्रदेश का कितना विकास कर सकती है अब देखना होगा,
क्या बिलासपुर को भी रायपुर जितना मान सम्मान मिलेगा? उसका विकास होगा यह भी देखना लाजमी होगा?
या बिलासपुर का हाल पहले जैसा ही रहेगा,?
अभी भी दो मंत्री पद खाली हैं अब देखना है की कौन मंत्री बनता है और कौन विधायक ही रह जाता है
(संपादकीय)
