विजय की ✒कलम
देशभर में 6 अप्रैल को रामनवमी का पर्व भक्तिभाव हर्षोऊल्लास के साथ मनाया जा रहा है इसके ठीक पहले हिंदू नव वर्ष मनाया गया नवरात्रि मनाई गई चेटीचंड्र मनाया गया हर वर्ष हजारों संत महात्मा हमारे देवी देवताओं का अवतरण”दिवस मनाया जाता है सनातन धर्म में 33 कोटी प्रकार के देवी देवता होते हैं वैसे तो हर इंसान में जीव आत्मा है और हर जीव में भगवान होता हैं ऐसी मान्यता है इसीलिए हिन्दू धर्म में जल वायु मिट्टी पत्थर पर्वत अग्नि पेड़ पौधों की पूजा अर्चना की जाती हैं क्योंकि न जाने किस रूप में नारायण मिल जाए इसलिए सबको प्रभु का रूप समझना चाहिए ऐसा सनातन धर्म वालों का भाव है किंतु एक बात विचारणीय है हम हर पर्व तिज त्यौहार बड़े ही हर्षोउल्लास के साथ मनाते हैं भगवान का अवतरण दिवस मनाते हैं पर उनके द्वारा दी गई शिक्षा दिखाए हुए धर्म मार्ग पर चलते नहीं है उनके बताए हुए मूल्यों पर हम अमल करते नहीं हैं तो फिर हम कैसे कल्पना करें कि राम राज्य आएगा?
राम राज्य लाने के लिए पहले आपको भगवान रामचंद्र के बताए हुए मार्ग पर चलना होगा धर्म और अधर्म क्या है समझना होगा भक्ति का दिखावा तो सब करते है पर मूल्यों पर चलना कोई नहीँ चाहता है. प्रभु श्री राम ने रावण जैस पराक्रमी राजा को, एक वनवासी बनकर न्याय के पक्ष में जीत दर्ज की और रावण के पराक्रम को समाप्त किया,
ठीक ऐसा ही हमारे बिच कुछ पराक्रमि लोग है जो दिखावे की प्रभु भक्ति करते है और आम जन मानस को तुच्छ प्राणी समझते है ,किंतु जो प्रभु श्री राम के उपासक है उनका ऐसे पराक्रमी लोग कुछ अनिष्ट नही कर सकते है, लेकिन यहाँ राम राज्य लाने की बाते हो रही जो की तभी संभव है ज़ब प्रभु श्री राम की दो बातों पर भी अमल करना शुरू कर दे तो राम राज्य जल्द आने की संभावना बन सकती है., हमारे अंदर श्रद्धा भाव कम है दिखावा ज्यादा हो गया है,
खासकर सोशल मीडिया के आने के बाद लोग ऐसा प्रतीत करते हैं की सबसे बड़े भगवान के भक्त वही हैं मंदिर में लाखों रुपए चढ़ावा चडाएगे, पर मंदिर के बाहर बैठा भिखारी को ₹5 देने के लिए 10 बार सोचेंगे?
होटल में खाने-पीने में हजारों में खर्च करेंगे पर किसी गरीब को खाना खिलाने में 10 बार सोचेंगे ?
अपने लिए महल बनाएंगे पर किसी गरीब की झोपड़ी को बनाने के लिए 10 बार सोचेंगे?
तो हम कैसे कल्पना करें कि राम राज्य आएगा?
शिव भजन गाने से गीत गाने से मंदिर में जाने से रामराज्य नहीं आएगा?
बल्कि भगवान के बताए हुए सद मार्ग पर चलकर धर्म के मार्ग पर चलकर सत्य की राह पर चलकर ही राम राज्य आएगा, हम अलग-अलग तीर्थ स्थलों में जाते हैं माथा टेकते हैं भगवान के दर्शन करते हैं और अपने आप को धन्य महसूस करते हैं भगवान ने हमें वहां तक बुलाया है इसलिए नहीं कि आप मेरा दर्शन करो और धन्य महसूस करो,
बल्कि इसलिए बुलाया है कि आप यहां आए हो तो अब सद मार्ग पर चलो धर्म के राह पर चलो और अच्छे कर्म करो तो आपके यहां आने की जरूरत नहीं पड़ेगी मैं स्वयं आपके घर आऊंगा जब मेरे बताएं हुए मार्ग पर चलना शुरू कर दोगे तो राम राज्य खुद बन जाएगा,
पर क्या हम लोग ऐसा करते हैं?
मंदिर तो बहुत बनाएं देश से लेकर विदेश तक बनाएं सनातन धर्म का ध्वज लहराया पर उस राह पर हम चले नहीं अपने बच्चों को उस राह पर भेजा नहीं तो यह सब किस काम का ? अगर आप सच्चे मन से भाव से प्रभु की भक्ति करोगे सत्य मार्ग पर चलोगे तो भगवान वैसे ही प्रसंन्न हो जाएंगे,
ढोल बाजे से आतिशबाजी से और दिखावे के अढंबर से भगवान खुश नहीं होते हैं ,?
बल्कि भक्ति से और भाव से खुश होते हैं आप भाव लिए दर्शन कीजिए भगवान वैसे खुश हो जाएंगे आप भाव से भक्ति से अपने घर में ही
भगवान का नाम जपेंगे तो आपको भगवान मिल जाएंगे पहले के वक्त में जंगलों में जाते थे ऋषि मुनियों के आश्रम में रहते थे हजारों वर्ष तपस्या करते थे तब जाकर किसी वीरले को भगवान के दर्शन होते थे अब तो इस कलयुग में भगवान ने आपको जंगल आने के लिए आश्रम रहने के लिए नहीं कहता बस घर में ही रहकर आप सच्चे मन से भक्ति करें सिमरन करें और धर्म के राह पर चलें सत्य कर्म करें भगवान जरूर मिलेंगे ,
मीरा ने कृष्ण को पाया तुलसी दास जी ने राम को पाया कैसे पाया भक्ति से भाव से सूरदास की आंखों नहीं होने के बाद भी, भगवान के दर्शन करते हैं कैसे भक्ति की आंखों से तो हम भी वही भक्ति की ही राह पर चलकर भगवान को पा सकते हैं इसलिए अगर चाहते हो की राम राज्य आए तो पहले उसके बताए हुए राह पर चलना होगा तभी रामराज्य आएगा और पहले अपने अंदर बैठे रावण को खत्म करना होगा तभी राम राज्य आएगा
(संपादकीय)