रायपुर :- शदाणी दरबार तीर्थ में 11 मई (चतुर्दशी तिथि) से आरंभ हुआ ग्रीष्मकालीन बाल संस्कार शिविर 25 मई 2025 तक चलेगा। यह शिविर बच्चों में नैतिक मूल्यों, आत्मविश्वास और आध्यात्मिक चेतना के विकास के लिए एक समर्पित प्रयास है। लगातार 16वें वर्ष आयोजित हो रहे इस शिविर में देश-विदेश से बच्चे भारी संख्या में सहभागी बन रहे हैं। इस बार शिविर को हाइब्रिड फॉर्मेट (ऑफ़लाइन और ऑनलाइन) में संचालित किया जा रहा है, जिससे भारत सहित विदेशों में रहने वाले बच्चे और संत-महात्मा भी डिजिटल माध्यम से सक्रिय रूप से जुड़े हैं।

पूज्य संत डॉ. युधिष्ठिर लाल जी महाराज की प्रेरणा से संचालित यह शिविर आधुनिक जीवन की भाग-दौड़ में खोते जा रहे मूल्यों की पुनर्स्थापना का माध्यम बन चुका है। उन्होंने इस बात पर विशेष बल दिया है कि शिक्षा के साथ-साथ संस्कार, चरित्र और आत्मिक जागरूकता भी आवश्यक है। इस उद्देश्य को साकार करने हेतु शिविर में प्रत्येक दिन विविध क्षेत्रों के विशेषज्ञों द्वारा संवाद व मार्गदर्शन की श्रृंखला चलाई जा रही है।
अब तक शिविर में जिन अतिथियों ने बच्चों का मार्गदर्शन किया है, उनमें प्रमुख रूप से लेखवानी सर, डॉ. अनामिका सिंह, सोनम बत्रा, ज्योति साहू मेम, मुकेश निहाल सर, प्रतिभा शेरवानी मेम तथा अमित चिमनानी जी शामिल हैं, जिन्होंने अपने अनुभवों व विचारों के माध्यम से बच्चों में आत्मबल, नैतिकता और जागरूकता के बीज बोए।

आगामी दिनों में शिविर में आकांक्षा मेम, लल्लू महाराज जी, अखिलेंद्र मोगरे सर, लक्ष्य चोरे सर, पावनी शदानी जी, डॉ. अजय शेष सर एवं डॉ. ऋषि आचार्य सर जैसे प्रतिष्ठित वक्ता अपनी विषय विशेषज्ञता के माध्यम से बच्चों को प्रेरित करेंगे।
श्री उदय शदाणी, सचिव शदाणी दरबार तीर्थ ने बताया कि शिविर की रूपरेखा बच्चों की आयु, बौद्धिक क्षमता, रुचियों और मानसिक स्तर को ध्यान में रखते हुए व्यवस्थित व संतुलित रूप से तैयार की गई है, जिससे उनके संपूर्ण व्यक्तित्व का समवेत विकास सुनिश्चित हो सके। यह शिविर न केवल ज्ञान प्रदान करता है, बल्कि बच्चों में आत्म-विश्वास, अनुशासन, संवेदनशीलता, नेतृत्व क्षमता और व्यवहारिक कुशलता जैसे जीवनोपयोगी गुणों का भी विकास करता है।
यह शिविर केवल एक ग्रीष्मकालीन कार्यक्रम नहीं, बल्कि भावी पीढ़ी के निर्माण की दिशा में एक जीवंत मिशन है, जो उन्हें जीवन के हर क्षेत्र में आदर्श नागरिक बनाने की दिशा में अग्रसर कर रहा है।