अयोध्या

बिना बारिश
जलभराव की समस्या से लंबे समय से जूझ रहे क्षेत्र वासियों की समस्या के स्थायी समाधान में सहयोगी बने क्षेत्र के कई
निशुल्क नगरनिगम को नाला निर्माण में भूमि देने वाले दानदाता आज नगरनिगम और तहसील प्रशासन के बीच फुटबॉल बना दिये गये हैं।
उन्होंने कभी यह नहीं सोचा था कि एक व्यक्ति के आगे तहसील प्रशासन घुटने टेक कर क्षेत्र वासियों को जलभराव के बीच संक्रामक कीटाणुओं से जूझने हेतु छोड़ देगा।
और उनका जनहित में निशुल्क अपनी भूमि नगर निगम को देना उन्ही उन्ही के लिए आज मुसीबत बन जायेगा।
आज पुनः जनसुनवाई के दौरान पहुंचे क्षेत्र वासियों के सामने नगरनिगम मुखिया नगर आयुक्त ने एसडीएम को फोन कर मात्र दस प्रतिशत बचे अधूरे नाले को पूर्ण करने का अनुरोध किया।
बताया कि साठ लाख रुपए इसमें खर्च हो चुके हैं पर निकासी न जोड़े जाने से वह बेकार है।
इस संबंध में महापौर,नगर आयुक्त से गुहार लगाकर निराश क्षेत्र वासियों ने जिलाधिकारी महोदय अयोध्या को कल व्यापार अधिकार मंच के प्रतिनिधि मंडल सुशील जायसवाल, विश्व प्रकाश रूपन आदि द्वारा अपना कष्ट जिम्मेदारों को बताया है।
श्री रुपन ने क्षेत्रीय पार्षद मनीष सिंह से इस संबंध में जानकारी की तो उनका दर्द भी उभर आया,कहा कि मैं पुनः आयुक्त महोदय को इस विषय के शीघ्र निस्तारण हेतु कहता हूं।
सुविधा देने के नाम पर बने नगर निगम का काम अब सिर्फ कर वसूली तक सीमित है, जनहित से इनका कोई मतलब नहीं,,
आज जनसुनवाई के दौरान दिए प्रार्थना पत्र के साथ पूर्व नगर आयुक्त का पत्र,विधि परामर्शी नगरनिगम अधिवक्ता हिमांशु की रिपोर्ट, विभागीय अधिकारियों की रिपोर्ट जिसमें स्पष्ट उल्लिखित है कि नाला निर्माण भूमि एकदम अलग है उसपर निर्माण किया जा सकता है।
फिर भू माफिया का कितना प्रभाव नगरनिगम व तहसील के जिम्मेदारों पर है कि वे नब्बे प्रतिशत बन चुके नाले को अधूरा छोड़ जनहित की उपेक्षा कर रहे हैं।
दुखी क्षेत्र वासियों ने अब धरना प्रदर्शन की बात कही है।
इस विषय का संज्ञान प्रथम महापौर ऋषिकेश उपाध्याय,भाजपा महानगर अध्यक्ष कमलेश श्रीवास्तव, महामंत्री शैलेन्द्र कोरी, कमेटी के साथ साथ उपमहापौर व अनेक माननीय पार्षद गणों ने भी लिया है।