छत्तीसगढ़ पूज्य सिंधी पंचायत के अध्यक्ष महेश दरयानी से खास बातचीत हमर संगवारी के प्रधान संपादक के विजय दुसेजा के द्वारा उनके प्रदेश कार्यालय में रायपुर में की गई जीसमें सामाजिक कई सारे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई उन्ही बातों का सारांश कुछ खबर के माध्यम से आप सभी तक पहुंचा रहे हैं,
बहुत दुख होता है यह सब देखकर जब श्रैय की लड़ाई चलती है, ओर इसका परिणाम समाज का नुकसान होता है
अगर श्रैय का लोभ,
यह दिल और दिमाग से हट जाए तो हमारा समाज शिखर की बुलंदियों पर पहुंच जाएगा हर कोई,
वा, वाही लूटना चाहता है कि यह काम मैंने किया है वह मैंने बनाया है यह मैंने मीटिंग कराई थी यह कार्यक्रम मैंने आयोजन किया है अपने आप को हाईलाइट करना चाहता है इसके चक्कर में समाज पीछे रह जाता है और व्यक्ति आगे निकल जाता है जबकि समाज को आगे होना चाहिए और व्यक्ति को पीछे होना चाहिए अगर समाज आगे रहेगा तो तुम्हारा नाम तो वैसे ही होगा तुम्हारी जय जयकार तो वैसे ही होगी बस थोड़ी सी जरूरत है समझदारी की और दिल को बढा़ करेंगे तो सब समा जाएंगे और दिल को छोटा करेंगे तो कोई नहीं आ पाएगा इंसान की पहली पाठशाला घर से होती है क्योंकि जब बच्चा जन्म लेता है और बड़ा होता है स्कूल जाता है उसके बीच में माता-पिता ही उसे संस्कार देते हैं और स्कूल जाने के बाद फिर दूसरी क्लास चालू होती है जब बच्चा पहले क्लास में पास होगा तभी दूसरी में पहुंचता है लेकिन वह पहली क्लास को कभी नहीं भूलता है जब हमारे संस्कार अच्छे होंगे और कूट-कूट कर ईमानदारी से बच्चों में भरे होंगे तो कोई भी व्यक्ति या संस्था समाज या कोई धर्म उसे अपनी और ना हीं खींच सकता ना हीं उसे गलत रहा पर ले जा सकता है ना हीं है
लव जिहाद होगा और ना ही धर्मातारण
होगा
बस जरूरत है अपने संस्कारों को बच्चों को कूट-कूट कर भरा जाए आज लव जिहाद हो रहा है धर्मातारण हो रहा है तो इसका कारण यही है कि कहीं ना कहीं हमारे संस्कारों में कमी रह गई है इसलिए बच्चे गलत रहा पर चल पड़े हैं और बच्चों को जब भी हम 💰पैसे देते हैं खर्चे के लिए तो उसका विशेष ध्यान रखें ज्यादा पैसा ना दें और जब बच्चा घर शाम को आए तो पूरा हिसाब किताब ले बच्चा आज तुमने क्या खर्च किया कहां किया वह जानकारी भी जरूर रखें सिर्फ बिजनेस में ही ध्यान ना दें बाहर की बातों में ही ध्यान ना दे📺टीवी में ही ध्यान ना दें 📱मोबाइल में ध्यान ना दे बल्कि अपने संतानों पर भी ध्यान दें जब संतान सही होगी तभी तो आपके कुल का नाम आगे बढ़ेगा आपकी शान बढ़ेगी नहीं तो जो कमाया है वह भी गवा देंगे इसलिए बच्चों पर भी ध्यान दें सभी पंचायत को अपना जब कार्यकाल पूरा हो जाए तो समय पर ही वर्तमान मुखी अध्यक्ष आम बैठक बुलाकर अपना इस्तीफा देकर और चुनाव कराकर यह
कार्यभार नए अध्यक्ष को सोप दे तो यह उस पंचायत का भी मान, सम्मान बढेगा और अध्यक्ष की भी जय जय कार होगी यह कुर्सी हमें सेवा के लिए मिली है ना की मेवा खाने के लिए और नहीं हमें आजीवन के लिए मिली है और नहीं हमें बैठना भी नहीं है हम समाज के सेवक हैं तो हमें सेवा करके आगे बढ़ना है ताकि कोई दूसरा आए ओर उसे भी सेवा करने का मौका मिले ,
अगर हर इंसान यह सोचेगा और पंचायत ऐसा करेगी तो उस पंचायत का भला होगा नाम होगा और उस व्यक्ति का भी,
और कोई भी कार्य करें ईमानदारी से निष्पक्ष से धर्म से करें अन्याय और जोर जबरदस्ती से किया हुआ कार्य कभी सफल नहीं होता है
उसका परिणाम बाद में सामने आता है
पैसे की घमंड में पद की घमंड में इतना अंधे मत बन जाओ कि अपने समाज को और अपने लोगों को ही भूल जाओ क्योंकि सिकंदर जैसा धनवान व्यक्ति भी जब गया तो खाली हाथ दिखाते हुए गया तो फिर हम उसके सामने कुछ भी नहीं है धन का सदुपयोग होना चाहिए ना कि दुरुपयोग और
आज के दौर में समाज में कुछ कुरीतियों आ गई है उन कृर्तियो को दूर करने के लिए ईमानदारी से सबको मिलकर प्रयास करना होगा तभी हम कृर्तियो को दूर कर सकते हैं और समाज को आगे बढ़ा सकते हैं किसी एक व्यक्ति से समाज नहीं बनता है जैसे खाली घर बनाने से घर नहीं बनता है जब तक उस घर में लोग नहीं रहेंगे ओर आपस में प्यार प्रेम नहीं रहेगा वह घर नहीं रहता है उसी तरह समाज में भी जब हम सब मिलकर रहेगे,आपस में प्रेम बना कर रखेंगे तभी समाज कहलायेगा और आगे बढ़ेगा जैसे हमारे पूर्वजों ने किस तरह समाज को संगठित करके रखा और किस तरह आपस में प्यार बना कर रखा वह काबिले तारीफ है हमें उन बातों की और ध्यान देना होगा याद करना होगा और उनके बताए हुए राह पर चलना होगा, हमारे बुजुर्ग हमारी धरोहर हैं उसे संजोकर हमे रखना होगा आने वाली पीढ़ी को भी बताना होगा समझाना होगा छोटे बड़े का सम्मान करना होगा निम्न वर्ग मध्य वर्ग को भी साथ में रखकर आगे बढ़ना होगा किसी का अपमान कर हम सोचेंगे कि में बढ़ा हो गयाऔर अंदर अंदर खुश होंगे तो वह गलत है उसका परिणाम बहुत ही दुखदाई होता है मंदिर छोटा हो या बड़ा हो उससे फर्क नहीं पड़ता है आपके दिल में भगवान के प्रति श्रद्धा भक्ति प्रेम भगवान के लिए कितना है उससे फर्क पड़ता है उस मंदिर में तो मूर्ति बैठी है लेकिन आपके दिल में तो शाष- शाष ,
भगवान बैठे हैं इस बात का ध्यान हम सबको रखना चाहिए,
सोच अच्छी हो कार्य नेक हो सबको साथ लेने की शक्ति हो तो कोई भी मंजिल दूर नहीं आओ सब मिलकर एक दूसरे का हाथ थामे और एक नया इतिहास बनाएं अपने समाज को मजबूत बनाएं संगठित बनाएं दो कदम सनातन धर्म की ओर आगे बढ़ाएं