“ रायपुर :- जगन्नाथः स्वामी नयन पथ गामी भवतु मे।”
भगवान जगन्नाथ स्वस्थ होने पर नेत्रोत्सव के दिन श्रद्धालुओं को दर्शन देते है तत्पश्चात् मौसी के घर “गुंडीचा बाड़ी” जाने की यात्रा प्रारंभ होती है, बिना धातु या कील कांटे निर्मित रथ को ‘‘तुपकी’’ सोने की झाड़ू चलाकर सम्मान किया जाता है, जिसमें क्रमशः बलराम, देवी सुभद्रा और श्रीकृष्ण के तीन अलग-अलग रथ होते है, जिन्हें तालध्वज, पद्म रथ व गरुड़ध्वज कहा जाता है।

इस धार्मिक आयोजन को रथयात्रा महोत्सव, नवदीना यात्रा, गुंडिचा यात्रा या दशावतार के नाम से भी जाना जाता है।
रथ की रस्सी को तो थामेंगे हमारे ये दोनों हाथ,
हमारे जीवन की रस्सी थामे भगवान जगन्नाथ

