विजय की कलम
श्री झूलेलाल मंगलम धाम बिलासपुर क्या चंद लोगों की पर्सनल प्रॉपर्टी बन गई है? यह बात हम नहीं कह रहे हैं बल्कि आज समाज के लगभग हर व्यक्ति यह बात बोल रहा है बल्कि दबी 👅जुबान से बोल रहा है लेकिन सत्य बोल रहा है इसके पीछे भी कई सारी बातें हैं चलिए विस्तार से आपको बताते हैं बात 2010 की है लगभग, उस समय पूज्य सिंधी सेंट्रल पंचायत बिलासपुर के अध्यक्ष, स्वर्गीय भीमनदास दयलानी व अन्य लोगों ने छत्तीसगढ़ शासन से सिंधी समाज के लिए जमीन की मांग की बहुत मेहनत करने के बाद दो एकड़ जमीन तिफरा में सिंधी समाज की सबसे बड़ी पूज्य सिंधी सेंट्रल पंचायत बिलासपुर को मिली

यह जमीन पंचायत को इसलिए मिली क्योंकि वह पूरे बिलासपुर सिंधी समाज का प्रतिनिधित्व करती है यानी कि शासन ने यह जमीन समाज को आवर्तित की ताकि वहां पर भव्य सुंदर भवन बना सके क्योंकि शहर बढ़ता जा रहा था आबादी भी बढ़ते जा रही थी तो लोग अब होटल में जाकर शादियां करना शुरू कर दिए थे क्योंकि जो धर्मशाला हैं वह छोटी हो गई थी और अब वैसी व्यवस्था नहीं थी जैसा लोग चाहते थे

इसलिए इस जमीन की मांग की गई थी जमीन मिल गई भगवान झूलेलाल कि कृपा से भव्य सुंदर भवन भी बन गया
इनके संविधान में जो लिखा है कि यह जमीन जिस उद्देश्य के लिए गई थी और भवन बनाया गया था उनका पहला जो ग्राफ है उसमें लिखा है, सिंधी समाज के लिए कार्य करना दूसरा मांगलिक संस्कृतक कार्यक्रमों के लिए व्यवस्था व रखरखाव करना तीसरा समाज के विकास के लिए धार्मिक सांस्कृतिक गतिविधियों का आयोजन करना यह इनका मुख्य उद्देश्य था पर क्या यह पूरा हो रहा है ?

नहीं हो रहा है जबकि आज इस समिति के पास लगभग एक करोड रुपए फंड है?
तो फिर समाज हित के लिए जो उन्होंने कहा है वह कार्य क्यों नहीं हो रहे हैं समिति के द्वारा?
और अगर अन्य समिति या कोई पंचायत सामाजिक के कार्य करती है तो उनसे शुल्क क्यों लिया जाता है?
जबकि समाज के लिए जमीन मिली है समाज के लिए भवन बना है समाज के लोगों से चंदा लेकर इस भवन का निर्माण करवाया गया है तो फिर समाज के हित के लिए जो कार्यक्रम व आयोजन होते हैं तो उसके लिए शुल्क क्यों लिया जा रहा है? क्यों पैसा लिया जा रहा है? और जो समिति ने अपने संविधान में लिखा है वह कार्य क्यों नहीं किया जा रहा है?

पर उसके बाद शुरू होती है नई राजनीति इस भवन के बनने से पहले बिलासपुर के एक बिल्डर को अध्यक्ष बनाया गया था पंचायत का उसने इस भवन को बनाना शुरू किया और जैसे ही पूर्व अध्यक्ष भीमनदास दास दयलानी का देहांत हो गया उसके बाद धीरे-धीरे एक व्यक्ति ने पूरे बिलासपुर को अपने अधीन करना शुरू कर दिया?
और देखते ही देखते पूरे मंगल धाम भवन पर अपना एक अठीपत्तितव बना दिया?
जो सबसे बड़ा सवाल उठता है कि यह जमीन सिंधी समाज के लिए मिली थी भवन के लिए मिली थी और सेंट्रल पंचायत को मिली थी लेकिन उस चालक बिल्डर ने अपनी चालाकी से होशियारी से वहां पर उस भवन के नाम से समिति बना दी ?
श्री झूलेलाल सेवा समिति बिलासपुर जिसका पंजीयन भी करवा दिया और संविधान भी बना दिया?
खेल यही से शुरू होता है शुरुआत में श्री झूलेलाल सेवा समिति बिलासपुर के द्वारा भवन का जो संविधान बना था उस संविधान के हिसाब से काम किया जा रहा था पर कुछ समय के बाद अपना असली रंग दिखाना शुरू कर दिया? अपने लोगों को वहां पर अध्यक्ष बनना शुरू कर दिया?

ओर कुछ अपने लोगों को सेंट्रल पंचायत में एडजस्ट कर रहा था अध्यक्ष बनाकर और कुछ लोगों को श्री झूलेलाल सेवा समिति में अध्यक्ष बनाकर एडजस्ट कर रहा था?
गाड़ी बढ़िया चल रही थी कोई सवाल जवाब नहीं कर रहा था कोई हिसाब किताब भी नहीं दिया जा रहा था?
पर 2024 में घटना ने नया मोड़ लिया कुछ समाजसेवीयो ने जब हिसाब किताब मांगना शुरू किया तो इनको दिन में तारे नजर आने लगे इन्होंने , संविधान की कॉपी समाज के लोगों को नहीं दि ?और न ही हिसाब किताब दिया ? ओर , उल्टा उन्हें परेशान किया? आखिर में कुछ लोगों ने पंजीयन ऑफिस में आरटीआई लगाई , लगभग 6 महीने के बाद इन्होंने हिसाब वहां पर जमा किया लेकिन यहां पर भी इन्होंने गोटी खेल दी? पूरा हिसाब वहां पर जमा नहीं किया? जो की 2013 से लेकर 2025 तक हिसाब जमा करना चाहिए? लेकिन इन्होंने ऐसा नहीं किया?

जब इस समिति के ट्रस्टी लोगों ने हिसाब मांगा तो उन्हें भी हिसाब नहीं दिया गया? और इस समिति में मात्र 73 ट्रस्टी हैं जो कि संविधान के हिसाब से सही नहीं है ?
इस संविधान के हिसाब से जिस व्यक्ति ने भी 11000 रुपए की सहयोग राशि से अधिक दी है वह व्यक्ति झूलेलाल सेवा समिति का सदस्य बन सकता है
? और उसे बनाना पड़ेगा उनके संविधान के हिसाब से ? पर इन्होंने ऐसा नहीं किया 2 लाख से ऊपर जिन्होंने चंदा और दान दिया था उन लोगों को ही सिर्फ ट्रस्टी बनाया? और नए लोगों को शामिल नहीं किया ?ताकि यह जो पूरा खेल जो चल रहा ? उसका पता किसी और को ना चले? और जो व्यक्ति अध्यक्ष बने
उनके अधीन रहे और जी हजूरी करें?
कोई नया आदमी आज इस कुर्सी पर बैठना चाहिए?
पर यह लोग ऐसा नहीं कर रहे हैं
सोची समझी साजिश और रणनीति के तहत यह कार्य किया जा रहा है?
और जिस उद्देश्य के लिए यह जमीन शासन से ली गई थी ताकि यहां पर सुंदर भवन बनेगा और निम्न वर्ग और मध्यम वर्ग को फायदा होगा वह उद्देश्य खत्म हो गया?
सिर्फ पैसे वाले लोगों को ही यहां पर कार्य हो रहा है ?और बुकिंग करवा रहे हैं ? गरीब आदमी सिर्फ दूर से ही देखकर खुश हो जाता है ?
यह लोगों के साथ सरासर सबसे बड़ा धोखा है?
संविधान के अनुसार हर साल इनको ऑडिट करवाना जरूरी है ?
पर वह कार्य भी नहीं कर रहे हैं? और ना ही हिसाब किताब समाज के जो अन्य पंचायतों के अध्यक्ष है उनको देना चाहिए या एक आम बैठक बुलाकर सबके सामने रखना चाहिए ?
पर उन्होंने ऐसा नहीं किया?
सूत्रों से जानकारी मिल रही है कि इन्होंने पुराना हिसाब और जो कागज है उनको जला दिया?
इससे यह पता चलता है कि बहुत बड़ा घपला हुआ होगा?
या बहुत बड़ा गोलमाल हो रहा है?
यह शक की सुई इनके ऊपर जा रही है?
अगर कोई ट्रस्टी या समाज का व्यक्ति इनसे हिसाब मांगता है या बात करता है तो यह उसे अपने धन बल बाहुबल के माध्यम से 🙊चुप करवा देते हैं ?
या समाज विरोधी करार दे देते हैं?
लोकतंत्र में क्या यह उचित है?
कुछ लोगों का यहां तक कहना है कि इस भवन को एक होटल बना दिया गया है?
और होटल की तरह इसे संचालित किया जा रहा है ?
और सबसे बड़ी आचार्य की बात है इसका संविधान है जिसमें इन्होंने अपना कब्जा तो रखा ही है?
साथ में आने वाली सात पीढियों का बंदोबस्त करके रखा है
? जैसे कि जब तक यह जीवित रहेंगे इस झूलेलाल सेवा समिति के ट्रस्टी बने रहेंगे ,?
और मरने के बाद इनके परिवार का जो सदस्य रहेगा वह ट्रस्टी बन जाएगा? फिर वह मर जाएगा तो दुसरा सदस्य रहेगा वह ट्रस्टी बन जाएगा ? ऐसा करते-करते मतलब कि इन्होंने सात पीढियों का बंदोबस्त कर दिया है?
इन्होंने दान के रूप में जो तीन चार लाख रुपए दिए हैं वह दान नहीं दिया है ? बल्कि एक सिट खरीद ली है ? ट्रस्टी की जो आजीवन उनकी पीढ़ी दर चलती रहेगी ?
ऐसा संविधान आज तक पूरे भारत में क्या पूरे विश्व में नहीं बना होगा किसी भी समिति का इन्होंने बनाकर रखा है?
सिर्फ अपने परिवार व अपने लोगों को इस कुर्सी में बैठने के लिए?
आखिर कब तक लोकतंत्र में इस तरह तानाशाही चलती रहेगी?
समाज के नाम पर कब तक अपनी जेबें भरते रहेंगे?
कब तक समाज को धोखा देते रहेंगे?
अब वक्त की पुकार यही है कि ईमानदारी से पूरे 2013 से लेकर 2025 तक श्री झूलेलाल सेवा समिति का
बिलासपुर के सिंधी समाज को पूरा हिसाब किताब दें ? और लोकतांत्रिक तरीके से विधिवत श्री झूलेलाल मंगल धाम का चुनाव काराये? और जैसा कि इन्होंने संविधान में लिखा है
कि 11000 रुपए सहयोग राशि देने वाला इस भवन का सदस्य होगा उन्हें सदस्य बनाया जाए?
ताकि वह अपने वोट का अधिकार का प्रयोग कर सके सिर्फ अपने फायदे के लिए कठपुतली वाला अध्यक्ष न बनाएं?
जो समाज हित के लिए कार्य करें लोकतांत्रिक तरीके से कार्य करें संविधान के हिसाब से कार्य करें, पिछले 12 सालों का पूरा हिसाब किताब दें। वही अध्यक्ष बने


(संपादकीय)