विजय की ✒कलम
बिलासपुर :- दोस्तों हर बार आपको विजय की कलम में कुछ नया पढ़ने को मिलता है और हर बार हम ऐसे मुद्दे को उठाते हैं जो समाज में देश प्रदेश में घट रही घटनाएं होती हैं और हम हमेशा समाजहीत, देशहित लोकहित के लिए ही कार्य करते हैं और हमारी कोशिश यही रहती है कि विजय की कलम में ऐसे ही ज्वालंत मुद्दों को सामने रखा जाता है. सबके सुख दुख बांटने वाला पत्रकार आज अकेला हो गया है अपना दुख किसे बताएं?
आज के दौर में सभी पत्रकारों को एक ही नजर से देखा जाता है बुराई एक में होती है आरोप सबमें लगते है
सिस्टम में समाज में हर जगह चार लोग अच्छे रहते हैं तो दो लोग बुरे जरूर मिलते हैं
यह सत्य है ?
सत्य है तो पाप भी होगा
पुण्य भी होगा ,
दिन है तो रात भी होगी
और यह कलयुग है यहां पर हर प्रकार के लोग मिलते हैं पर इसका मतलब यह नहीं की सब एक जैसे होंगे?
3 सालों से मैं विजय दुसेजा प्रधान संपादक हमर संगवारी का, समाज के चंद धन कुबेरों तानाशाहो से लड़ाई लड़ रहा हूं जिनके साथ 20 वर्ष तक मैंने काम किया निस्वार्थ भावना से सेवा की उसका फल मुझे यह मिला झूठी शिकायत एडिशनल एसपी से की गई झूठा केस मानहानि का किया गया झूठा प्रचार प्रसार किया गया सोशल मीडिया में और कई सामाजिक बैठकों में भी, संत महात्मा नेता अभिनेता से लेकर सब जगह पहुंच गए पर मैं हर जगह एक ही बात बोली कि अगर धन कुबेर तानाशाह सच्चा ईमानदार है तो पूरे प्रदेश से समाज की बैठक बुलाई जाए और वहां साबित किया जाए कि मैं गलत हूं ओर साबित हो जाए तो जो सजा मुझे मिलेगी मैं सहहर्ष स्वीकार करूंगा पर आज तक ऐसा नहीं किया गया क्यों?
क्योंकि उनको भी पता है सच क्या है इसलिए वह सिर्फ पैसों के दम पर सच को दबा रहे हैं और दुनिया को लोगों को झूठ दिखा रहे हैं पर जब उनके झूठ का पर्दाफाश होने लगा और सच सबके सामने आने लगा तो वें बेचैन होने लगे
जब हमने इनका भंडाफोड़ किया उनके काले करतूत को उजागर करना शुरू किया तो उन्हें तकलीफ होने लगी?
जगह-जगह हर रास्ते पर कांटे बिछाने लगे कोई ऐसा मंच और जगह नहीं छोड़ी जहां पर उन्होंने कांटे ना बिछाई हो और मेरे खिलाफ बात ना कि हो?
जहां भी अगर कुछ मान सम्मान मिलता है तो उन्हें मिर्ची लग जाती है?
कहते हैं क्यों विजय का मान सम्मान कर रहे हो क्यों उन्हें बुला रहे हो क्यों उन्हें काम दे रहे हो वह हमारे बारे में लिखता है हमारी ढोल की पोल खोलता है तो उसको मत बुलाओ?
रायपुर के गुरु जी एक बात हमेशा कहते हैं कि
( सच की नाव डगमगा सकती है पर डूब नहीं सकती है और अंत में वही पार लगती है और झूठ की नाव तैर सकती है पर उसपार नहीं लग सकती है बीच मझधार में डूब जाएगी)
यह बात हमेशा मैं सुनता हूं और मुझे अपने भगवान पर अपने संत जनों पर और हजारों गरीब लोगों पर विश्वास है क्योंकि उनका आशीर्वाद उनकी दुआएं मेरे साथ है मेरी मां का आशीर्वाद हमेशा मेरे साथ है,
आज वह इस दुनिया में नहीं है पर उसका आशीर्वाद मेरे साथ है
क्योंकि वह हमेशा कहती थी कि मैं रहूं ना रहूं मेरा आशीर्वाद सदा तेरे साथ रहेगा और वह सत्य है
इसलिए तानाशाह ने लाख कोशिश किया पर सच को झुका नहीं पाया कई ऑफर किया काम दाम भेद सब अपनाया पर विजय झुकेगा नहीं सच के लिए लडता है सच के लिए लड़ता रहेगा सच लिखता रहेगा सच बोलता रहेगा चाहे अंत में उसकी जान ही क्यों नहीं चली जाए,
क्या मुझे भी न्याय पाने के लिए आत्महत्या करनी पड़ेगी?
यां अपना धर्म परिवर्तन करना पड़ेगा?
जिन लोगों को समाज उत्थान के कार्य करना चाहिए समाज के दीन दुखियों को निचले निम्न वर्गों को आगे बढ़ाना चाहिए एक ईमानदार पत्रकारों का साथ देना चाहिए वहां पर यह उल्टा कार्य कर रहे हैं?
अपनी व्यक्तिगत रंजीश और दुश्मनी निकालने के लिए समाज के पद का और समाज के पद में बैठे लोगों का दुरुपयोग कर रहे हैं?
सिर्फ पैसे के बल पर धन के बल पर अत्याचार कर रहे हैं?
हाल ही में रामा वैली के कुछ निवासियों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी उस खबर को हमर संगवारी ने ईमानदारी से अपने पोर्टल व अखबार में प्रमुखता से स्थान दिया था पर तानाशाह को यह पसंद नहीं आया क्योंकि उसे डर लग रहा था कि यह खबर ज्यादा वायरल हो रही है और कहीं इसकी सच्चाई सबके सामने आ जाएगी तो उसका पूरा बना बनाया साम्राज्य तबाह हो जाएगा?
समाज के भवन श्री झुलेलाल मंगल धाम पर भी हमने खबर लगाई थी और ऐसे कई खबरें हमने हमर संगवारी में लगातार जनता को जागरूक करने के लिए सच बताने के लिए छाप रहे हैं?
इससे उनको बहुत तकलीफ हो रही है? इसलिए वह अब हर पैत्ररा आजमा रहे हैं हाल ही में तीन दिन पूर्व, बिलासपुर सिंधी सेंट्रल पंचायत 17 वार्ड पंचायत की बैठक आयोजित की गई थी जिसमें आगमी चुनाव के बारे में चर्चा होनी थी विषय चुनाव का चर्चा होने का था पर बात निकली एक ईमानदार पत्रकार विजय की जैसा कि सूत्रों से हमें जानकारी मिली है चंद धन कुबेर और तानाशाह ने उसकी पंचायत के अध्यक्ष से कहा कि आपने विजय को एफजी के रूप में सेंट्रल क्यों भेजा एफजी का एक पद होता है जो वार्ड पंचायत का प्रतिनिधित्व करता है और सेंट्रल की मीटिंग में वह शामिल हो सकता है अध्यक्ष के साथ,
सेंट्रल पंचायत के चुनाव में अगर उनका उम्मीदवार जीत जाता है और जब उसकी बैठक होगी तो विजय अपने आप ही बैठक में आएगा और नियम के अनुसार उन्हें फोन करके बुलाना ही पड़ेगा मीटिंग में और अगर मीटिंग में बैठक में विजय आता है तो वह कई सारे सवाल करेगा कई सारे समाज हित की बातें करेगा और सच बोलेगा तो उन्हें डर लग रहा है उनकी कुर्सी छीन न जाए ?
इसलिए वह अध्यक्ष पर दबाव डाल रहे थे कि आप उन्हें पद से हटाए? और क्यों उन्हें यह पद दिया है?
एक लोकतांत्रिक तरीके से अपने वार्ड पंचायत का अध्यक्ष कोई बनता है और अध्यक्ष अगर अपने मन से कार्यकारिणी घोषणा करता है तो उन्हें तकलीफ होती है?
तो इसका मतलब साफ है कि इनसे पूछ कर ही कार्यकारिणी का गठन किया जाए?
इनके लोगों को ही शामिल किया जाए ताकि कोई सवाल करने वाला न हो ?
पूरे बिलासपुर में सिर्फ विजय से, ही तकलीफ क्यों इतना डर क्यों?
अब आप सभी लोग समझ सकते हैं अब जैसा कि हमें जानकारी मिल रही है इन्होंने अब नयी चाल चली है कि अगली बार जब उनका अध्यक्ष बनेगा तो एफजी को मीटिंग में आने का नियम है बदल दिया जाएगा ताकि किसी भी तरह विजय ना पहुंच सके?
2 साल बाद मैं अगर अध्यक्ष बन जाता हूं अपनी वार्ड पंचायत का तो क्या तब भी वें नया नियम बनाएंगे,
ताकि विजय ना आ सके?
ऐसे दक्यानी सोच वाले व्यक्ति ऐसे समाज विरोधी व्यक्ति इन्हें समाज विरोधी नहीं बल्कि देश विरोधी कहा जाए तो गलत नहीं होगा?
क्या ऐसे लोगों से समाज का भला होगा , शहर का प्रदेश का देश का भला हो सकता है?
यह सोचने वाली बात है पर एक बात में साफ कहूंगा इस बार विजय खुलकर सामने आएगा सबके सामने, दमके की चोट पर बोलता है समाज में जागरूकता लाऊगा और तानाशाही व इनका शासन अत्याचार खत्म करके ही रहेंगे लोकतांत्रिक तरीके से ईमानदार व्यक्ति को आने वाले चुनाव में हम सहयोग करेगे और इनका अत्याचार खत्म करेंगे?
अभी तो चुनाव की तारीख भी घोषित नहीं हुई है और ये अभी से ही काम दाम भेद सब अपनाना शुरू कर दिया है? ताकि किसी भी तरह इनका उम्मीदवार चुनाव जीत जाए जैसे पिछले बार कि थी बैमानी ?
एक बात याद रखें अहंकार रावण का भी नहीं टिका था कंस का भी नहीं टिका था
तो तू कोन से खेत की मूली है तेरा भी अहंकार टूटेगा तेरा भी साम्राज्य जो पाप करके बनाया गया है वह भी टूटेगा?
(सत्य की विजय होगी धर्म की पताका लहराएगी)
मुझे विश्वास है जनता जागेगी समाज जागेगा और मुझे इंसाफ मिलेगा
संपादकीय