बिलासपुर :- आज दुनिया में लोग सच्ची सुख और शांति की तलाश में भटक रहे हैं चाहे धन से कोई कितना भी अमीर हो परंतु उनके जीवन में भी आज वह सच्ची सुख और शांति नहीं है वास्तव में सच्ची सुख और शांति केवल जब देवताओं का राज्य हुआ करता था तब ही थी अभी तो हर एक मनुष्य के अंदर आसुरी संस्कार आ गए हैं इसीलिए मनुष्य अपने ही संस्कारों से दुखी है यदि उनके भीतर यह देवताई संस्कार आ जाए तब जीवन में सच्ची सुख और शांति की अनुभूति होगी। देवताओं के चित्रों के आगे जाने से भी शांति की अनुभूति होती है शारीरिक रूप से वे भी एक मनुष्य ही है परंतु उनमें दैवीय गुण होने के कारण उनसे शीतलता और शांति की अनुभूति होती है यदि हम भी अपने जीवन में यह देवताई गुण अपना ले तो हमारा भी जीवन शांति और सुख से भरपूर हो जाएगा