प्रमोद कुमार मिश्रा गुड्डू भैया
रीवा :- श्री गुरू तेग बहादुर जी के 350 वें शहीदी दिवस के उपलक्ष में आयोजन होने वाले “सजीव प्रदर्शन” कार्यक्रम को उत्साह पूर्वक मनाने और जन मानस तक गुरु जी की मानवता एवं धर्म को बचाने के लिए दिए गए बलिदान को साँझा करने के लिए विचार गोष्टी हुई.


गुरु तेग बहादुर ” हिन्द दी चादर ” प्रारंभिक जीवन : 1 अप्रैल 1621 में अमृतसर में जन्मे गुरु तेग बहादुर जी अपने तपस्वी स्वाभाव के कारण शुरू में त्याग मल के नाम से जाने जाते थे.धार्मिक दर्शन और युद्ध कौशल में प्रशिक्षित, उन्होंने युद्ध में अपनी वीरता के लिए ” तेग बहादुर ” की उपाधि अर्जित की.गुरु के रूप में योगदान : 30 मार्च 1664 में 8 वें गुरु हरकृष्ण जी के ज्योति जोत के बाद 9 वें सिख गुरु बने. 1665 में आनंदपुर साहिब की स्थापना की और समानता, न्याय, और भक्ति पर केंद्रित श्री गुरु ग्रन्थ साहिब में 15 राग में 116 शबद – शलोक / भजनो का योगदान दिया.धर्मप्रचार यात्रा : आनंदपुर साहिब में कुछ समय व्यतीत करने के पश्चात पंजाब, प्रयागराज, वाराणसी, गया, पटना, बंगाल, असम में धर्म प्रचार करते समय गुरु जी ने सभी जगह उपदेश दिया की ईश्वर, प्रभु, खुदा एक है और हर प्राणी में विधमान है. ईश्वर निराकार और सर्व शक्तिमान है. गुरु जी ने मानवता और भाई चारे का सन्देश दे कर धर्म निश्चिंपेक्ष समाज का पक्ष समर्थन किया.धार्मिक स्वतंत्रता के समर्थक : औरंगजेब के शासनकाल के दौरान जबरन धर्मान्तरण और अत्याचार से परेशान हो कर 500 कश्मीरी पंडितो का दल पंडित किरपा राम जी की अगुवाई में गुरु तेग बहादुर जी की शरण में आये और गुरु जी से अपना हाल बता कर हिन्दू धर्म की रक्षा की बेनती की. गुरु जी ने कश्मीरी पंडितो को आश्वासन दिया और कहा की हर व्यक्ति को अपने धर्म अनुसार पूजा – बंदगी करने का मौलिक अधिकार है.गुरु तेग बहादुर जी ने औरंगजेब की जबरन धर्म परिवर्तन करने का विरोध किया और आनंदपुर साहिब से दिल्ली पहुंचने तक जन मानस के बीच निर्भयता और निरवैर हो कर अत्याचार और अधर्म के विरुद्ध संघर्ष करने के लिए प्रोत्साहित किया.
शहादत : 11 नवंबर 1675 को दिल्ली के चांदनी चौक में गुरु जी को अपने तीन गुर सिख भाई सती दास, भाई दयाला जी, भाई मति दास जी के साथ शहीद कर दिया गया जहाँ पर आज गुरुद्वारा सीसगंज साहिब सुशोभित है.गुरु तेग बहादुर साहिब जी ने मानवाधिकार, धर्म निरपेक्ष और समानता के अधिकारों को बचाने के लिए अपनी शहादत दी जो सर्व समाज के लिए प्रेरणादायक है.
श्री गुरू ग्रन्थ साहिब में 6 गुरू साहिब, 15 भगत – संत, 11 भट्ट कवि, 3 गुरू सिखों की बाणी का समावेश है जो विभिन्न धर्मो ओर जातियों से आते है, ओर इसलिए श्री गुरू ग्रन्थ साहिब सभी धर्मो का सम्मान करने की शिक्षा देते हुए सम्पूर्ण धर्म निसपेक्ष जगत गुरू है जिसमे सिर्फ नाम सिमरन, सेवा, सत्संग करके अपने जीवन को सफल करने का मार्ग बताया गया है.
गुरुद्वारा सिंघ सभा कमिटी के सेवादार परमजीत सिंह दुग्गल,निर्मल सिंघ, हरभगवान् सिंघ, मंजीत सिंघ, कुलजीत सिंघ, सतनाम सिंघ, बंसी साहू, मनीष चाँदवानी, अविराज ने सर्व समाज के उपस्थित जन मान्य गण का आभार प्रकट किया ओर श्री गुरू तेग बहादुर जी की निर्मल गुरबाणी संदेश को जीवन में आत्मसर करने की बिनती की