अंबिकापुर/सरगुजा।
राष्ट्रपति के प्रस्तावित सरगुजा प्रवास को देखते हुए पंडों समाज तथा कांग्रेस नेताओं ने संयुक्त रूप से आग्रह किया है कि महामहिम राष्ट्रपति अपने दौरे के दौरान पंडोंनगर स्थित ऐतिहासिक राष्ट्रपति भवन का अवश्य निरीक्षण करें। यह भवन भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद की ऐतिहासिक यात्रा से जुड़ी धरोहर है, जिसने सरगुजा की सांस्कृतिक और सामाजिक पहचान को राष्ट्रीय पटल पर स्थापित किया।
1952 में डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने की थी ऐतिहासिक यात्रा
पंडोंनगर का यह राष्ट्रपति भवन इतिहास के उन अनमोल पलों का साक्षी है जब वर्ष 1952 में भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद सरगुजा आए थे।
इस दौरान उन्होंने पंडव जनजाति के बीच रात्रि विश्राम किया था और स्थानीय आदिवासी समुदाय के साथ विशेष संवाद भी किया था।
इसी यात्रा के दौरान एक भावुक प्रसंग सभी को आज भी याद है—


बसंत नामक पांडव जनजाति के व्यक्ति, जो आज 78 वर्ष के हैं, को डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने अपने गोद में उठाया था। स्थानीय जनों के मुताबिक, राष्ट्रपति द्वारा उन्हें दत्तक पुत्र के रूप में सम्मानित करने का उल्लेखनीय निर्णय लिया गया था, जिसे जनजाति समाज आज भी गौरव की दृष्टि से याद करता है।
कांग्रेस नेताओं ने सौंपा ज्ञापन
पंडों समाज और कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के प्रतिनिधि मंडल ने राष्ट्रपति के संभावित प्रवास को ऐतिहासिक अवसर बताते हुए प्रशासन और राज्य सरकार के माध्यम से आग्रह किया है कि—
“महामहिम राष्ट्रपति पंडोंनगर स्थित इस धरोहर का अवलोकन करें, ताकि जनजातीय इतिहास और सरगुजा की सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर फिर से पहचान मिले।”
प्रतिनिधि मंडल ने यह भी कहा कि यह भवन न सिर्फ गौरव की निशानी है, बल्कि सरगुजा के आदिवासी समाज की संवेदनाओं और ऐतिहासिक योगदान का प्रतीक भी है।
स्थानीय निवासियों ने राष्ट्रपति भवन के संरक्षण एवं विकसित करने की भी मांग उठाई है ताकि यह स्थल भविष्य में भी अध्ययन एवं पर्यटन का केंद्र बन सके।
स्थानीय जनजाति में उत्साह
राष्ट्रपति के आगमन की चर्चाओं ने पंडोंनगर सहित पूरे सरगुजा क्षेत्र में उत्साह का माहौल पैदा कर दिया है।
पंडों समाज के लोगों का मानना है कि यदि महामहिम यहां पधारते हैं, तो यह पांडव जनजाति के इतिहास को नई पहचान और सम्मान दिलाएगा।
प्राप्त जानकारी के अनुसार से 20 नवंबर को भारत के राष्ट्रपति अंबिकापुर सरगुजा में आगमन होने वाला है।।