विजय की ✒कलम
बिलासपुर ;- आप लोग सो रहे होंगे कि मैं ऐसा क्यों बोल रहा हूं क्या बात है पर जो बात है वह सच बात है
हाल ही में हमारे शहर में दो ऐसे आयोजन हुए पहला
श्री झुलेलाल प्रीमियम लिग क्रिकेट टूर्नामेंट/ दूसरा डाडो सुथो, सिंधी कल्चर डे के नाम से जबकि ऐसे ही आयोजन सेंट्रल पंचायत के जुड़े हुए समितियां करती है जैसे सिंधी क्रिकेट प्रीमियर लिग टूर्नामेंट, का आयोजन सिंधी सेंट्रल युवा विंग करती है और सिंध के मेले का आयोजन भारतीय सिंधु सभा करती है इसमें सहयोग सेंट्रल
युवा विंग और पूज्य सिंधी सेंट्रल पंचायत का रहता है ? और महिला विंग जुड़ी रहती है? अब वैसे ही मिलते जुलते दो आयोजन इस बार अन्य समितियों के द्वारा शहर में कीया गया हैं, और मजे की बात यह है कि दोनों प्रोग्राम में सेंट्रल पंचायत के अध्यक्ष ओर इनसे जुड़े हुए पदाधिकारी गण कार्यक्रमों में शामिल हुए इंजॉय किया किसी ने भी रोक-टोक नहीं की उंगली नहीं की 2 साल पहले 2023 में जब हमने डांडिया प्रोग्राम का आयोजन कर रहे थे तब यही लोग उंगली कर रहे थे विज्ञापन तोड़ रहे थे पास बिकने नहीं दे रहे थे कलाकारों को भड़का रहे थे हर तरह परेशान कर रहे थे और इनका कहना था कि शहर में एक ही डांडिया होगा दो नहीं होगा
वैसे ही शहर में दो चेटीचंड शोभा यात्रा निकल रही है हम परेशान है और आप ऊपर से दूसरा डांडिया कर रहे हो जबकि हमने कहा हमारा डांडिया कमजोर वर्ग और मध्यम वर्ग के लिए है ताकि वह लोग एंजॉय कर सके पर उसके बाद भी इन्होंने नहीं माना क्योंकि इनका इगो इनका अहंकार था कि कोई हमसे आगे न बढ़ जाए और उसकी जय जयकार न हो जाए इसलिए माई पीला पीछे पड़ गए थे? और अड़गां लगा रहे थे महिला विंग, युवा विंग भी थी और सेट्रल पंचायत के लोग भी थे ? पर आज जब ऐसे ही प्रोग्राम अन्य समितियों के द्वारा किया जा रहा है तो इनको तकलीफ नहीं हो रही है बल्कि खुशी😀 हो रही है और शामिल हो रहे हैं क्यों,
क्या उनके सिर पर दो-दो सिंग लगे हैं?
नहीं क्योंकि यह लोग भी पैसे वाले हैं तो इसीलिए पैसे वाला पैसे वाला अगर कोई कार्यक्रम करता है तो उनको तकलीफ नहीं होती है अगर कोई गरीब कार्यक्रम करें अपने समतल लोगों के लिए तो उनको तकलीफ हो जाती है कि गरीब आदमी छोटा आदमी इतना बड़ा प्रोग्राम क्यों कर रहा है?
यह हमारी बराबरी जैसा होगा इसलिए इनको पेट में दर्द दे रहा था? और आज उनके पेट में खुशियां मचल रही हैं 32 दांत दिखाकर हंस रहे हैं दौहरा चरित्र दौहरा चेहरा दौहरा रंग आज सबके सामने आ गया तुम पियो तो अमृत है और हम पिए तो शराब है तुम्हारा खून खून है और हमारा पानी है?
शर्म आनी चाहिए ऐसे लोगों को जो सत्ता में बैठकर कुर्सी में बैठकर ऐसे गलत कार्य करते हैं? और खुद को राजा हरिश्चंद्र की औलाद समझते हैं ?
चुल्लू भर पानी में डूब मरना चाहिए ऐसे लोगों को जो समाज में रहकर समाज का ही बंटवारा करते हैं?
और जात-पात को छोड़कर उच्च नीच करते हैं, अमीर गरीब के खाई को खोदते हैं और मंच में आकर बड़े-बड़े बोल वच्चन बोलते हैं ?
धिकार है ऐसे लोगों पर
ऐसे लोगों को तो तुरंत तड़ीपार घोषित कर देना चाहिए जो अपने समाज का न हुआ वह अपने देश का क्या होगा?
पहले भी कहा था दूसरा कोई अगर कुछ कहता है तो तुम पहुंच जाते हो उसे लड़ने के लिए और जब अपना ही घर का भैदी लंका ढाए तो उसे कौन बोले🗣?
कहने का तात्पर्य यह है कि, अगर कोई दूसरा व्यक्ति कुछ अंनर्गल शब्द कहता है गलत कहता है तो सड़कों पर उतर आते हैं और जब अपने ही लोग अपने ही लोगों पर अत्याचार करते हैं तब क्यों तुम चुप रहते हो?
तब उसका विरोध क्यों नहीं होता है क्योंकि व धन्ना सेठ है इसलिए?
आज झूठ पाप अत्याचार धोखा फरेब विश्वास घात इसलिए बढ़ रहा है क्योंकि लोग सच बोलना नहीं चाहते सच सुनना नहीं चाहते सच देखना नहीं चाहते हैं उन्हें तकलीफ सच्च से नहीं है सच बोलने वालो से है
हम सच का आईना दिखाते रहेंगे ताकि अपना चेहरा इस आईने में देखो की जो आपने क्रीम पाउडर लगाकर सजा कर घूमते हो असल में आपका चेहरा कितना घिनौना है कितना डरावना है और कितना पापी है वह इस सच के आईने में दिखाई देगा और देखने के बाद भी अगर आप उसे बदलते नहीं हो तो आपका अंत तो जरूर होगा पर आने वाली आपकी पीढ़ी भी आपको कभी माफ नहीं करेगी
जागो समाज के लोगों जागो
ऐसे अधर्मी पापियों को यहां से भगाओ, झूठे मक्कारो को सत्ता से हटाओ,
तभी आपका और आपके समाज का भला होगा और आने वाली आपकी संताने भी आपको दुआ देंगे नहीं तो जैसे रावण का अंत हुआ था पूरे खानदान का हुआ था त्रेता युग में यादवों का हुआ था वैसा ही आपका भी होगा फैसला आपके हाथ है हम सदा सच के साथ हैं धर्म के साथ है न्याय के साथ हैं और समाज के साथ हैं
संपादकीय