बिलासपुर :- बात है लगभग 25 से 26 वर्ष पूर्व की जब बिलासपुर महानगर की ओर बढ़ रहा था तब शहर में बड़े व्यापार के लिए जगह की तलाश की जा रही थी तब रेलवे क्षेत्र के पास जिसका नाम व्यापार विहार रखा गया है वहां पर बिलासपुर विकास प्राधिकरण बी डी ए के द्वारा व्यापारियों को कम दाम पर जमीन उपलब्ध कराकर व्यापारी वर्ग में दिया गया आज व्यापार विहार प्रदेश का दुसरा व बिलासपुर संभाग का सबसे बड़ा मार्केट है यहां पर किराना व्यापार सबसे ज्यादा है प्रारंभ में लगभग 100 दुकानों से आबाद हुआ मार्केट आज लगभग 300 से अधिक संख्या में विभिन्न प्रकार के व्यवसायिक संस्थानों से सजा हुआ व्यवसायिक परिसर है. समय निकलता गया शहर भी विकास की दौड़ में बढ़ता गया, व्यापार भी बढ़ता गया, दुकानों की संख्या भी बढ़ती गई पर जो मूलभूत समस्याएं हैं उनका पूरी तरह निराकरण नहीं हो पा रहा था बीच-बीच में कई अध्यक्ष आए जिन्होंने अपना अच्छा कार्य किया और व्यापारियों के लिए बहुत सारी योजनाएं लागू की और अच्छा काम भी किया समय निकलता गया सन 2021 से लगातार 4 वर्ष अध्यक्ष पद में पूज्य सिंधी सेंट्रल पंचायत के वर्तमान अध्यक्ष विनोद मेघानी जी रहे जैसा कि सूत्रों का कहना है कि उनके कार्यकाल में कोई विशेष विकास कार्य नहीं हुआ है ,

व्यापार विहार क्षेत्र में अभी भी कई सारी समस्याएं वही की वही पड़ी है जैसे कुछ समय पहले कई जगह व्यापार विहार में आग जनी की घटना हुई तो जल्दी से 🔥आग को काबू करने के लिए पानी की गाड़ियां समय पर नहीं पहुंच पाई ,?
और जिसके कारण व्यापारियों को बहुत नुकसान हुआ कई बार आए दिन खुलेआम चोरियां हुई किन्तु यहां पर सीसी कैमरे नहीं थे जिसके कारण चोर पकड़ में नहीं आते. थे?
बताया जाता है कि यहां पर रात के अंधेरे में नशेड़ीयो का कब्जा रहता है ?
आने वाले बाहर से व्यापारियों के लिए पार्किंग की सुविधा भी उपलब्ध नहीं है जो आज तक भी नहीं हो पा रही है पानी की टंकियां हैं किन्तु साफ पानी और मिनरल वाटर पानी मिलना चाहिए वह अभी भी पहुंच से दूर है?
जो दुकानों में मजदूर काम करते हैं हमाल काम करते हैं उनके लिए व्यवस्था होनी चाहिए वह भी नहीं है नालियों में गंदगी भरी पड़ी है ? पर्याप्त साफ सफाई भी ठीक से नहीं हो पा रही है ?
और बहुत सारी व्यापारियों की अपनी भी समस्याएं हैं इन सब का निदान करने के लिए जरूरी था कि एक ऐसा व्यक्ति अध्यक्ष बने जो व्यापारियों की बात को समझे दर्द को समझें और शासन प्रशासन से सहयोग ले कर मिलकर यह सारी सुविधाएं उपलब्ध कराये पर क्या ऐसा 4 सालों में हो पाया ?
जबकि जनहित कार्य के लिए 4 साल की अवधि कम नहीं होती हैं और एक ही अध्यक्ष एक ही टीम कार्य करती रही फिर भी ऐसा नहीं हुआ क्यों ?
अब जब 31 दिसंबर को अध्यक्ष का कार्यकाल समाप्त हुआ उन्होंने 8 जनवरी को आम बैठक बुलाई
जिसमें आय- व्यय का ब्योरा दिया गया और अपना चार साल का कार्यक्रम पूरा किया अपना त्यागपत्र भी दिया अब यहीं पर खेला हो गया?
वहां पर जो संरक्षक थे उनको अधिकार दिया गया कि चुनाव नहीं कराया जाएगा बल्कि जो अध्यक्ष बनना चाहते हैं चुनाव लड़ना चाहते हैं वह अपना आवेदन भरकर संरक्षक के पास
जमा करवाए और संरक्षक आपस में विचार विमर्श करके जितने नाम आएंगे उनमें से किसी एक व्यक्ति को अध्यक्ष घोषित करेंगे?

जो कि यह सरासर लोकतंत्र की हत्या के बराबर है?
जब किसी भी संस्था का, पंचायत का ,संगठन का, सरकार का कार्यकाल समाप्त होता है और जब वह अपना त्यागपत्र देता है तो उसकी पूरी कमेटी, पूरी टीम स्वत: ही भंग हो जाती है नियम यही कहता है और यहां पर नियम की धज्जियां उड़ाई गई ?
जब कुछ व्यापारियों ने इसका विरोध किया तो उनके खिलाफ व्हाट्सएप ग्रुप में सोशल मीडिया में ❌गलत एवं भ्रामक बातें प्रचारित की गई ,उन्हें बदनाम करें कोशिश की गई?
जबकि वह अपना विचार व्यक्त कर रहे थे और चुनाव कराने की बात कर रहे थे , और विगत 4 सालों से
कोई चुनाव नहीं हुआ आम सहमिति करके अध्यक्ष बन गए और काम चला लिया,?
जबकि अब चुनाव लड़ने के लिए कई लोग आतुर है और तैयार हैं उसके बाद भी चुनाव नहीं कराया जा रहा है और अपनी बात को मनवाने के लिए दिखाने के लिए संरक्षकों ,के ऊपर बंदूक रखकर गोली चलाई जा रही है ?
कहने का तात्पर्य यह है कि जो संरक्षक हैं उनमें भी आम सहमती नहीं बन पाई है ? जैसा कि विश्वसनीय सूत्रों से जानकारी के अनुसार उनकी भी बैठक हुई थी उनमें भी आम समहती नहीं बनी कि चुनाव होना चाहिए अथवा नहीं होना चाहिए,?
चार संरक्षक कहते हैं चुनाव नहीं होना चाहिए, और चार संरक्षक कहते हैं चुनाव होना चाहिए, ?
नियम कायदा यही कहता है कि अगर एक व्यक्ति भी चाहता है कि चुनाव होना चाहिए यदि एक से अधिक कोई भी अतिरिक्त प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं तो चुनाव होना चाहिए और यहां पर तो 300 प्लस दुकानदार हैं और व्यापारियों का हित जुड़ा हुआ है लाखों लोगों का रोज आना-जाना लगा हुआ है करोड़ों का बिजनेस है ऐसे में इस तरह लोकतंत्र की हत्या करके अपने ही लोगों को सिर्फ कुर्सी में बैठना यह कहां का न्याय हैं?
पूज्य सिंधी सेंट्रल पंचायत का अध्यक्ष विगत 4 सालों से व्यापार विहार का अध्यक्ष बना हुआ था, क्या उन्हें नहीं पता लोकतंत्र की परिभाषा क्या है ? क्या उन्हें जानकारी नहीं है कि लोकतांत्रिक तरीके से चुनाव कराये जाए ?
अगर कोई व्यापारी चुनाव लड़ना चाहता है तो इन परिस्थितियों में संवैधानिक प्रक्रिया से चुनाव सम्पन्न करवाया जाना चाहिए
क्यों अपने लोगों को अध्यक्ष बनना चाहते हैं?
जैसा की सूत्रों से जानकारी मिली रही है 2 महीना पहले ही तानाशाह ने आदेश दे दिया था कि व्यापार विहार एशोसिएशन, के अध्यक्ष में अपना आदमी होना चाहिए और जिसका नाम अभी चल रहा है वह , वहीं के व्यापारी हैं और हंसमुख व्यक्तित्व के धनी हैं, मिलनसार हैं नानकराम खाटूजा,जी, अच्छे व्यक्ति हैं इसमें कोई दो मत नहीं है पर उन्हें अध्यक्ष बनना है तो चुनाव लड़कर अध्यक्ष बने किसने मना किया है ?
सीधे उपर से पैराशूट की तरह कुर्सी पर बैठना क्या यह व्यापारी जगत के लिए उचित है ? व्यापारियों के लिए?
और उन्हें अध्यक्ष क्यों बनाया जा रहा है इसके पीछे भी एक कहानी है जैसा कि सूत्रों से जानकारी मिल रही है विगत दो बार से पूज्य सिंधी सेंट्रल पंचायत के चुनाव में वह कोशिश कर रहे हैं कि उन्हें अध्यक्ष पद का उम्मीदवार बनाया जाए, लेकिन कहीं ना कहीं तानाशाह और उनकी टीम ने उन्हें समझा बुझाकर, बहला फुसलाकर बैठा दिया गया?
इस बार उन्होंने कोशिश की कि उन्हें अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ना है उन्हें उम्मीदवार बनाया जाए सेंट्रल की ओर से उन्हें उम्मीदवार घोषित किया जाए पर उन्हें घोषित न करके व्यापार विहार एसोसिएशन के उस समय के जो अध्यक्ष थे विनोद मैघानी जी को अध्यक्ष पद का उम्मीदवार बनाया गया और वह अध्यक्ष बन गए , पूज्य सिंधी सेंट्रल पंचायत बिलासपुर के
और इनका व्यापार विहार एसोसियेशन अध्यक्ष का कार्यकाल अब खत्म हो गया 31 दिसंबर को तो नानकराम खटुजा जी को उन्हें खुश करने के लिए अब व्यापार व्यवहार एसोसिएशन का अध्यक्ष बनाया जा रहा है?
यह कोई नई बात नहीं है बहुत पुरानी बात है क्योंकि यह पुराना खेल बहुत सालों से खेला जा रहा है देख रहे हैं की कुर्सी कम है और उम्मीदवार ज्यादा है
तो हर किसी को फिट करना है तो किसी को झूलेलाल मंगल धाम का अध्ययश बनाया जाता है किसी को सेंट्रल पंचायत का अध्यक्ष बना दिया जाता है
किसी को किसी व्यापारी संगठन का अध्यक्ष बना दिया जाता है किसी को वार्ड पंचायत का अध्यक्ष बना दिया जाता है किसी को किसी दूसरी समिति का अध्यक्ष बना दिया जाता है किसी को पद दिए जाते हैं मतलब हर व्यक्ति को कहीं ना कहीं खुश कर दिया जाता है ताकि यह सब हमारे साथ जुड़े रहे चुंबक की तरह और इसका इस्तेमाल यह हर चुनाव में करते हैं सामाजिक चुनाव में भी और राजनीतिक चुनाव में भी अपने फायदे के लिए?
तो यहां पर भी वही हुआ है हमारा विरोध व्यक्ति से नहीं संस्था से नहीं उनकी गलत नीतियों से है अगर वह व्यक्ति अच्छा है और व्यापारी चाहते हैं तो वह चुनाव लड़कर अध्यक्ष बन सकता है तो उसमें उसकी भी ताकत बढ़ेगी उसका भी भला होगा और व्यापारियों का हित भी है पर चुनाव न कराके ,
इस तरह गलत तरीके से पीछे के, रास्ते से एडजस्ट कर के अध्यक्ष बनाने की नीति की जा रही है वह कहीं ना कहीं व्यापारियों का इसमें अहित है और लोकतंत्र की हत्या भी है? जिसमें कई व्यापारी खुश नहीं है कुछ व्यापारी खुलकर विरोध कर रहे हैं और बाकी व्यापारी अंदर ही अंदर विरोध में है?
एक व्यक्ति पहले पूरे समाज में कब्जा करता है अब धीरे-धीरे व्यापारी संगठनों पर भी अपने व्यक्ति बैठना चाहता है उसमें भी कब्जा करने की और बढ़ रहा है ?
जैसे शनिचरी बजार व्यापारी संघ, मनाहरी व्यापारी संघ,
भक्त कंवर राम व्यापारी संघ ,
गोल बाजार व्यापारी संघ ,
बस स्टैंड व्यापारी संघ ,
व्यापार विहार एशोसिएशन, राजीव प्लाजा व्यापारी संघ, श्रीराम कपड़ा मार्केट, ऐसे कई सारे व्यापारियों के संगठन हैं अलग-अलग जगहों पर शहर में वह उन पर भी अपने आदमी बैठा रहा है और कंट्रोल करते जा रहा है क्या यह शहर के लिए समाज के लिए उचित है?
समाज में तो रायता फैला कर गर्त में डाल दिया है?
अब व्यापारियों का भी हाल व वैसई करना चाहता है आखिर क्यों?
क्या व्यापार विहार संगठन की लड़ाई कोर्ट में जाएगी
क्या आज का फैसला अदालत में होगा या आपसी समझौता कर के लोकतांत्रिक तरीके से चुनाव प्रतिक्रिया अपनाई जाएगी यह देखना अब लाजमी होगा,? किया अब संरक्षक गण सत्य धर्म न्याय नीति पर चलते हैं यां किसी के इशारे पर काम करते हैं?
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