विजय की ✒कलम
देश :- जैसा कि अभी कुछ दिनों में सोशल मीडिया में इलेक्ट्रॉनिक टीवी चैनलों में अखबारों में मीडिया में जो सबसे ज्यादा खबर ओर व्यक्ति सुर्खियां बटोर रहे है उसमें एक है अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और दूसरी है भारत की एक राज्य पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी दोनों ने बहुत साहसी कदम उठाया है इसे पूरे देश के लोग देखकर सुनकर हैरान हो गए हैं पहला कारनामा डोनाल्ड ट्रंप ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति को उसे घर में घुसकर उठा लिया और अपने देश लाकर एक जेल में बंद कर दिया पति पत्नी को और दूसरा कारनामा पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने किया इडी के छापे जब बंगाल में एक बड़े व्यक्ति के घर में पड़े तो ममता अपने सिक्योरिटी फोर्स और लोकल पुलिस के साथ अचानक पहुंच जाती है और इडी के अफसर से फाइल और कुछ डॉक्यूमेंट छीनकर झपटकर बाहर निकल जाती है ?
और सबको बताती है कि उसने यह क्यों छीना हैं यह उसके पार्टी के सीक्रेट फाइल है और डॉक्यूमेंट है इसलिए मैंने उनसे छीन लिए हैं ? ऐसा कहते हुए बड़ी खुश होती है और केंद्र सरकार और बीजेपी पर वार करती है यह सब घटनाएं देखकर सुनकर कई सारी चीजे आंखों के सामने नजर आती है कि किसी फिल्म का कोई सीन है की एक हीरोइन आती है और अपने लोगों को बचाने के लिए दुश्मन पर टूट पड़ती है इस तरह ऐसा एक सीन दिख रहा है कि ममता पहुंची और अपने लोगों को बचाने के लिए और डॉक्यूमेंट छीन लिए लेकिन यहां पर अपने लोगों से ज्यादा जो बात समझ में आ रही है वह है अपनी कुर्सी बचाने के लिए उन्होंने यह सब कारनामा किया? पर क्या किसी लोकतांत्रिक देश में और निर्वाचित मुख्यमंत्री को ऐसा करना शोभा देता है?
यह तो वही हरकतें हो गई चुट भैया नेताओं की तरह या छोटे-मोटे जो क्रिमिनल होते हैं या नशेड़ी होते हैं वह ऐसी हरकतें करते हैं ?
इसकी हरकतें भी देखकर ऐसा ही महसूस होता है?
जितना तानाशाही पाकिस्तान में और बांग्लादेश में नहीं है उससे ज्यादा तानाशाही तो पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी ने करके रखी है 10 सालों से?
और इसकी इस हरकत ने पूरे विश्व में बंगाल का नाम भारत का नाम शर्म से झुका दिया?
लोकतंत्र की दुहाई देने वाली खुद ही अलोकतांत्रिक काम कर रही है लोकतंत्र के नाम पर इस तरह तानाशाही कर रही है कि किसी केंद्रीय संस्था के सदस्यों के हाथों से इस तरह झुमा झपकी करके डॉक्यूमेंट शिन कर ले जाना यह कहां का लोकतंत्र है?
लगता है ममता बनर्जी फिल्में बहुत देखती हैं? तभी उनका असर ज्यादा उनके दिमाग में पड़ गया है या पाकिस्तान और बांग्लादेश के तानाशाह से ज्यादा सीख रही है?
एक लाइन थी जो आजादी के समय बहुत पढ़ने को मिलती थी आज भी हम स्कूल में पढ़ते हैं की
(खूब लड़ी वह मर्दानो वाली वह थी झांसी की रानी 👸 लक्ष्मी बाई)
इस लाइन का अर्थ यह था कि जब भारत देश गुलाम था अंग्रेजों ने झांसी में हमला कर दिया था और अपने किले को अपनी जनता को बचाने के लिए रानी लक्ष्मीबाई ने अपने छोटे से नवजात बच्चे को अपने सीने से लगाकर कपड़े से बांधकर और घोड़े सहित किले से नीचे छलांग लगा दी थी और अंग्रेजों से लोहा लिया था अकेले लड़ी थी उस झांसी की रानी ने महिलाओं का मान सम्मान सातवें आसमान पर पहुंचा दिया आज भी उनका नाम मान सम्मान से लिया जाता है और उन्हें इज्जत सम्मान दिया जाता है कि भारत की शेरनीयो में इसकी गिनती होती है वह एक थी रानी लक्ष्मीबाई उन्होंने साहसी काम किया था अपनी रक्षा के लिए अपने देश के लिए अपने राज्य के लोगों के लिए पर बंगाल में जस्ट उल्टा हो रहा है अपनी कुर्सी बचाने के लिए अपने लोगों को बचाने के लिए अब जिस तरह ममता ने कार्य किया है यह सब देखकर सर शर्म से झुक जाता है कि ऐसे भी कोई औरत है जिसे वहां की जनता दो बार तीन बार मुख्यमंत्री बनाया उसके बाद भी वह जनता के हक के लिए न्याय के लिए नहीं लड़ रही है बल्कि अपनी कुर्सी बचाने के लिए वह देश के गद्दार और आतंकवादी बांग्लादेशी जो छुपे बैठे हैं उनको बचाने के लिए यह सब कर रही है?
जिस तरह बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार हो रहा है इस तरह इस बंगाल में भी हिंदुओं पर बहुत अत्याचार हुआ है और आज भी हो रहा है और आज इसे अपनी कुर्सी जब डगमगाने नजर आई तो उसे हिंदू और हिंदू भगवान हिंदू मंदिर याद आ रहे हैं?
शर्म करो कम से कम अपने नाम का तो खयाल रखो जो तुम्हारा नाम है ममता, ममता का मतलब क्या होता है अर्थ क्या होता है कभी समझा है जाना है?
जिस औरत ने अपने धर्म को ही छोड़ दिया उससे और क्या भरोसा कर सकते हैं? किया विश्वास कर सकते हैं कि यह उनके लिए कुछ करेगी समाज के लिए करेगी देश के लिए करेगी या राज्य के लिए करेगी?
सरकारी अधिकारियों से फाइल छिनकर यह कोई बड़ा काम नहीं है या कोई तीस मार खां जैसा कोई काम नहीं की है?
बल्कि अपनी वह अपने राज्य की जग हसाई कराई है?
(मां मानुष और माटी का नाम लेकर सत्ता में आई)
ममता बनर्जी आज माँ👩 को न पूछ रही है न मानुष को जान रही हे ओर ना माटी का ख्याल रख रही है?
सिर्फ अपनी कुर्सी का ध्यान है किसी भी तरह इस बार फिर से कुर्सी मेरे हाथ में आ जाए और 5 साल के लिए मैं फुर्सत हो जाऊं और फिर से अपना तानाशाही वाला रूप दिखाऊ और सरकार चलाउ?
पर इस बार बंगाल की जनता ने ठाना है ममता बनर्जी की सरकार को उखाड़ना है?
बहुत त्रस्त हो गई है वहां की जनता जिन बांग्लादेशियों और एक धर्म के खास लोगों के बल पर चुनाव जीतते आ रही थी अब वह सब नहीं चलेगा ,
बांग्लादेशी अवैध कुछ पेटीयो को बाहर निकलने का काम भारत सरकार पहले से कर रही है और इलेक्शन कमीशन भी अपना काम इमानदारी से कर रहा है साफ सुथरी ईमानदारी से वोटर लिस्ट तैयार हो रही है फर्जीयो के नाम काटे जा रहे हैं तो इस बार उसे समझ में आ गया है कि इस बार चुनाव जीतना आसान नहीं है इसीलिए इसे भगवान याद आ रहे हैं अभी तक इसे हिन्दू याद न थे ना हिंदू भगवान याद थे पर इससे कुछ होने वाला नहीं है जिसको याद करना है कर ले अंत समय तो आ गया है वैसे भी सत्ता तो जानी है और जानने के बाद तुम्हारे जो कारनामे है उन सब को देखते हुए लग रहा है की लंबा समय जेल की कालकोठरी में गुजारने को मिलेगा वहीं बैठकर किताब लिखे अपनी आप बीती लिखें अपने आपको मंथन करें यही तुम्हारे लिए सही होगा?
जो बंगाल देश की आजादी में एक से एक वीर जवानों को योद्धाओं को कवियों को जन्म दिया था जिस बंगाल से मां काली की पूजा होती है
दुर्गा माता की पूजा होती है
उस बंगाल में स्वामी विवेकानंद जैसे महान तपस्वी और विद्ववान देशभक्त पैदा हुए हैं फिर से उस बंगाल में ऐसे लोग जन्म लेंगे और बंगाल एक ने उदय के साथ नई क्रांति के साथ विकास की राह पर चलेगा और सुख शांति समधि के साथ चलेगा भारत के अर्थव्यवस्था में और मजबूती देगा अब ममता को दीदी कहने का कोई मुझे शौक नहीं है क्योंकि यह दीदी कहलाने की लायक नहीं है अभी ममता की जो ममता है कुर्सी की वह अब खत्म होने वाली है चंद दिनों की मेहमान है अब वक्त आ चुका है सच को कबूल करो और ऐसी हरकतें करना बंद करो इसमें ही तुम्हारा भला होगा इसमें तुम्हारे पार्टी का भला होगा उसमें ही बंगाल का भी भला है वहां की जनता का भी भला है और देश का भी भला है यह सिर्फ मेरी कलम नहीं बल्कि बंगाल की जनता की आवाज है जो मैं अपनी कलम के माध्यम से व्यक्त कर रहा हूं
जय दुर्गा मां जय काली मां
जय भारत मां
संपादकीय