ब्रह्माकुमारीज़ शिव अनुराग भवन में स्वस्थ जीवन और आध्यात्मिक उन्नति का अनूठा संगम; माउंट आबू के शोधकर्ता अशोक भाई ने साझा किए अनुभव
पिताश्री ब्रह्मा बाबा की 57वीं पुण्यतिथि -विश्व शान्ति दिवस पर योग साधना कार्यक्रम कल
बिलासपुर। शिव अनुराग भवन, राजकिशोर नगर सेवाकेंद्र में विशेष आध्यात्मिक सत्र का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में माउंट आबू के ज्ञानामृत विभाग से आए प्राकृतिक आहार विशेषज्ञ अशोक भाई ने स्वास्थ्य एवं आध्यात्मिकता के गहरे संबंधों पर प्रकाश डाला।
जैसा अन्न वैसा मन: भोजन का मानसिक प्रभाव
अशोक भाई, जिन्होंने पिछले 13 वर्षों तक भोजन और पानी पर शोध किया है, ने बताया कि हम जो भोजन ग्रहण करते हैं, उसका दसवां भाग सीधे हमारे मन को प्रभावित करता है।

अशोक भाई ने कहा, भोजन और पानी को मात्र शारीरिक पोषण का साधन मानने के बजाय उन्हें ‘औषधि’ और ‘प्रसाद’ में बदला जा सकता है। उनके शोध और अनुभवों के आधार पर इसकी विधि बतायी कि
तीन विशेष संकल्पों का प्रयोग:
अशोक भाई बताते हैं कि जब भोजन की थाली सामने आए, तो उसे ग्रहण करने से पहले तीन संकल्प करने चाहिए, जिससे भोजन ‘दुख हरण’ और ‘रोग निवारक औषधि’ बन जाता है:
परमात्मा को धन्यवाद: सबसे पहले भोजन को बाबा (परमात्मा) को समर्पित करना और उनका शुक्रिया अदा करना।
प्रकृति के प्रति कृतज्ञता: प्रकृति मां को धन्यवाद देना कि उन्होंने हमें यह भोजन प्रदान किया, जबकि दुनिया में करोड़ों लोग भूखे सोते हैं।


सहयोगियों को दुआएं: किसान से लेकर भोजन बनाने वाले तक, जिन भी आत्माओं का सहयोग इसमें लगा है, उन्हें दिल से दुआएं देना।
2. योग-युक्त अवस्था (याद का अमृत):
भोजन को औषधि बनाने के लिए उसे परमात्मा की याद में बनाना और स्वीकार करना अनिवार्य है। अशोक भाई ने कहा कि याद ही वह ‘अमृत’ है जो भोजन को शक्तिशाली बनाता है, जिससे आत्मिक शुद्धि होती है और मनोबल बढ़ता है। यदि भोजन को ‘प्रसाद’ समझकर स्वीकार किया जाए, तो वह आत्मा को शक्तिशाली और मन को एकाग्र कर देता है।
3. वाइब्रेशन्स का शुद्धिकरण:
आजकल के नकारात्मक वातावरण का असर अनाज के माध्यम से हमारे भीतर प्रवेश कर रहे हैं। इन नकारात्मक ऊर्जाओं को औषधि रूपी सकारात्मक ऊर्जा में बदलने के लिए भोजन के प्रति आसक्ति मुक्त होना और उसे केवल शरीर रूपी गाड़ी चलाने के लिए संयम के साथ ग्रहण करना आवश्यक है।

4. प्राकृतिक और सात्विक चयन:
अशोक भाई ने कहा कि पका हुआ भोजन (विशेषकर मैदा, चीनी, नमक) पचने में बहुत समय लेता है और शरीर में बीमारियाँ पैदा करता है। यदि हम प्राकृतिक आहार (फल, अंकुरित अनाज, उबली सब्जियां) को परमात्मा की याद के साथ अपनाते हैं, तो शरीर हल्का हो जाता है और यही प्राकृतिक संयम ही वास्तविक स्वास्थ्य की औषधि है।
अशोक भाई का निष्कर्ष है कि 80% पुरुषार्थ केवल भोजन और पानी को ठीक करके अर्थात् उन्हें औषधि बनाकर सफल किया जा सकता है, जिससे शारीरिक और मानसिक दोनों स्वास्थ्य प्राप्त होते हैं।
अशोक भाई ने अंत में कहा कि “स्वास्थ्य के बिना अध्यात्म अधूरा है” और संयम ही स्वास्थ्य की पहली सीढ़ी है।
ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी ने कहा कि इस बात को हम एक सुव्यवस्थित प्रशासन की तरह देख सकते हैं; जैसे ब्रह्मा बाबा न्यूनतम साधनों से श्रेष्ठ कार्य करते थे, वैसे ही हमें अपने शरीर रूपी मोटर कार का मालिक बनकर संयमित खान-पान के जरिए इसे आध्यात्मिक उन्नति के मार्ग पर चलाना चाहिए।
दीदी ने जानकारी दी कि पिताश्री ब्रह्मा बाबा की 57वीं पुण्यतिथि -विश्व शान्ति दिवस पर योग साधना कार्यक्रम कल सुबह 6 से 11:30 बजे तक शिव अनुराग भवन में आयोजित है.
कार्यक्रम की शुरुआत में परमात्म स्मृति के पश्चात राकेश भाई ने तिलक व गुलदस्ते से अशोक भाई का स्वागत किया।