प्रारब्ध मतलब हर विचारों से सही, गलत,दर्द, मृत्यु,जन्म, खुशी गम अनेक भावनाओं का संगम प्रसाद
मंदिर में प्रसाद
प्रभु साथ दावत (मर्यादित)
मंदिर की चौखट से बाहर प्रसाद
प्रारब्ध के साथ आई दावत
सेवक को ही ज्यादा कष्ट
प्रसाद (लालच,मैं दोगला व्यवहार)
जैसी दृष्टि वैसी सृष्टि
तैसी ईश्वर की कृपा दृष्टा
कर्ण कर्ण में ईश्वर
तो व्यर्थ थाली में क्यूं
जमीन में गिरा पैरों क्यूं

रायपुर :- विचार मंदिरों, जरूरतमंदो में ही कु मंदिरों में लोग बेझिझक प्रसाद खाते प्रसाद की परिभाषा जरूरत मंद पेट भरे ओर भूखी आत्म दुआएं दे तो प्रारब्ध कटे (भाव से उत्पन भावनाएं)अगर यही सामान्य ओर दूसरा खाता तो यही प्रसाद घर लिए कर आता तो भावनाओं को खेल दर्द,बीमारी,गरीबी,कलह, प्रसाद भी भावनाओं से दिया गया ओर किस भावना से खाया गया उस पर निर्भर आपके ऊपर होती प्रक्रियाएं, प्रसाद उतना ही हो कि शिष्टाचार्ता होकर लगे ओर विष्ठा होकर निकल जाए, *जो व्यक्ति थालियों झूठन, में डब्बों में भर कर, पैरों में गिरकर दूसरों के उतरे प्रारब्ध को घर ले कर आता हैं शेर बनता फिर कहता कि में तो सेवा करता हूं कभी तन की कभी धन की मुफ्त का भोजन *पहला प्रारब्ध* दूसरा अपनी वाहवाही भीड़ का दिखा कर लोगों को भ्रमित भंडारा देना ओर स्वभिन को कुचल कर निकम्मा देना ओर इंसानों की सोच की किसी बात के अर्थ को ना समझना ओर भावनों की लालच में डूब कर स्वयं की बरबादी करना