बिलासपुर। राजकिशोर नगर स्थित ब्रह्माकुमारीज़ शिव अनुराग भवन में आध्यात्मिक उल्लास के साथ रूहानी होली मनाई गई। इस अवसर पर ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी ने सभी को परमात्मा द्वारा बताए गए होली के वास्तविक आध्यात्मिक रहस्यों से अवगत कराया गया।
उन्होंने बतलाया कि अंग्रेजी शब्द होली (Holy) का अर्थ है पवित्र बनना। ज्ञान और योग के अभ्यास से आत्मा को विकारों से मुक्त कर पावन बनाना ही सच्ची होली है। वहीं हो-ली का अर्थ है – जो हो गया, सो हो गया। बीती हुई बातों और पुरानी यादों पर बिंदी लगाकर आगे बढ़ना ही वास्तविक होली है। उन्होंने यह भी बताया कि होली का एक अर्थ यह भी है कि आत्मा परमात्मा की हो जाए। जब आत्मा स्वयं को ईश्वर को समर्पित कर देती है, तब उसके जीवन में स्वाभिमान, शक्ति और गौरव का अनुभव होता है।


दीदी ने कहा कि जब आत्मा परमात्मा के प्रेम के रंग में रंग जाती है, तब वह अतींद्रिय सुख का अनुभव करती है। सच्ची होली हम मनाएं, ज्ञान पिचकारी चलाएं और आत्म-स्मृति का तिलक लगाएं जैसे गीतों पर गौरी बहन के नृत्य के माध्यम से सभी को दिव्य गुणों के रंगों से जीवन को सजाने की प्रेरणा दी गई।
दीदी ने कहा कि हम अपने जीवन में शांति, प्रेम, पवित्रता और खुशी के आध्यात्मिक रंग भरें, स्व-परिवर्तन और निरंतर आत्म-चेकिंग करने व दूसरों की कमियों को देखने के बजाय स्वयं के संस्कारों को श्रेष्ठ बनायें।


अंत में सभी ने रूहानी उमंग और उत्साह के साथ ब्रह्मा भोग स्वीकार किया। ब्र.कु. गायत्री बहन ने सभी को तिलक लगाया व ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी ने भाई-बहनों पर केसर व गुलाब जल डालकर पवित्रता, प्रेम और आत्मिक आनंद का संदेश दिया।