🔔श्री हनुमान जन्मोत्सव विशेष🔔
भगवान हनुमान जी का जन्म चैत्र माह की पूर्णिमा तिथि पर हुआ था। भगवान शिव ने माता अंजना को दिए गए वरदान की पूर्ति के लिए उसी दैवीय खीर से उनके गर्भ से जन्म लिया जिस खीर से प्रभु श्री राम का जन्म हुआ था। माता अंजना तक उस दैवीय खीर पहुंचाने वाले पवन देव के कारण वे पवनपुत्र कहलाए।
उनके पिता का नाम केसरी था जिससे वह केसरी नंदन एवं माता के कारण अंजनेय कहलाए।
भगवान श्री राम के अनन्य भक्त होने के बाद भी उन्हें श्रीराम ने भाई एवं माता सीता ने पुत्र तुल्य स्नेह दिया।
महाबली बजरंगी हनुमान मृत्युलोक में अमर हैं इसीलिए उनकी जयंती नहीं, जन्मोत्सव मनाई जाती है।
महावीर विक्रम बजरंगी,

कुमति निवार सुमति के संगी ॥
जो दूसरों को जीते वो वीर और जो स्वयं को भी जीत जाए उसे महावीर कहते हैं, कुमति अर्थात् कुबुद्धि का नाश कर सुबुद्धि प्रदान करने वाले श्री हनुमानजी के जीवन की प्रमुख सीख है, हमें दूसरों के संकट निवारक व परमार्थी बने….
II ॐ नमो हनुमते रुद्रावताराय सर्वशत्रुसंहारणाय।
सर्वरोग हराय सर्ववशीकरणाय रामदूताय स्वाहा II
चैत्र मास की पूर्णिमा को हनुमान जी का जन्म, पिता केसरी एवं माता अंजनी के घर दिन मंगलवार को हुआ। हनुमान जी भगवान शिव के 11वें रुद्र अवतार हैं और बाल ब्रह्मचारी है। हनुमान जी ही एकमात्र ऐसे देव हैं जो भक्त शिरोमणि भी है और वीर शिरोमणि भी। कलयुग में केवल श्री राम भक्त हनुमान जी ही चिरंजीवी है और आज भी विद्यमान है।
पवन तनय बल पवन समाना।
बुधि बिबेक बिग्यान निधाना।।
कवन सो काज़ कठिन जग माहीं।
जो नहिं होई तात तुम्ह पाहीं।।
आप तो पवन पुत्र हैं। बुद्धि, विवेक, विज्ञान की निधि हैं। इस जग में ऐसा कठिन कार्य क्या है, जो आप से न हो सके।
दुनिया चले न श्री राम के बिना।
राम जी चले न हनुमान के बिना।।
अंजनी पुत्र हनुमान जी को इंद्र से इच्छा मृत्यु का वरदान मिला था। भगवान राम के वरदान अनुसार युग का अंत होने पर उन्हें मुक्ति प्राप्त होगी। सीता माता के वरदान के अनुसार वे चिरंजीवी रहेंगे। द्वापरयुग में वे भीम और अर्जुन की परीक्षा लेते हैं। इसके बाद कलियुग में वे तुलसीदास जी को दर्शन देते हैं।।
सब सुख लहैं तुम्हारी सरना
तुम रक्षक काहू से डर ना।
🔸प्रभु श्री हनुमान आध्यात्मिक भावना, भक्ति, ईश्वरीय उर्जा और बुध्दिमत्ता जैसे कई गुणों का संयोजन के एक आदर्श तथा अनुपम उदाहरण है। पवनसुत हनुमान जी ऐसे देव हैं जो थोड़ी सी प्रार्थना और पूजा से ही शीघ्र प्रसन्न हो जाते हैं। वो अष्ट सिद्धि और नौ निधियों के दाता हैं, अर्थात हनुमान जी को प्रसन्न कर आप धन, संपत्ति, विद्या, स्वास्थ्य, वैभव, संतान सभी कुछ प्राप्त कर सकते हैं। हम बालाजी महाराज से प्रार्थना करते हैं कि आपके परिवार के अंदर नवचेतना का संचार करें, जिससे आपके परिवार में हर्षोल्लास एवं उमंग भरा वातावरण हमेशा बना रहे। प्रभु श्री राम नाम सरकार और बालाजी महाराज की कृपा आप व आपके परिवार पर हमेशा बनीं रहे, आप सभी के सारे कष्ट दूर हो एवँ आप सभी हमेशा स्वस्थ रहे।
हनुमान जन्मोत्सवचैत्र मास के शुक्ल पक्ष पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। पूर्णिमा तिथि 1 अप्रैल 2026 को शाम 03:00 बजे से शुरु होकर 2 अप्रैल को शाम 05:20 बजे तक रहेगी। इसलिए उदयातिथि के अनुसार 2 अप्रैल गुरुवार को ही पूजा व उत्सव मनाया जायेगा। इस वर्ष सर्वार्थ सिद्धि योग और ध्रुव योग बन रहे है, जो अत्यंत ही फलदायक है।
आप सभी स्नेही भक्त एवँ स्वजनों को शक्ति और भक्ति के दाता, हमारे आराध्य, सर्वजन की सभी विपत्तियों को हरने वाले, वीरों में सबसे बड़े वीर, भक्तों में सबसे बड़े भक्त़, सेवकों में सबसे महान सेवक, परम रामभक्त, रुद्र अवतार, संकटमोचन, केसरीनंदन, अंजनी पुत्र प्रभु श्री हनुमान जन्मोत्सव पर इन्हीं मंगल शुभकामनाओं सहित भगवान बजरंगबली हमे बुद्धि, बल, भक्ति, विवेक एवं ज्ञान के भंडार से उपकृत करें संकटमोचन के प्राकट्य उत्सव की सभी बंधुओं, बांधवों एवं माता-बहनों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं.!
” संकट कटे मिटे सब पीरा ,
जो सुमिरे हनुमत बलबीरा “
बजरंगबली की कृपा सब पर सदैव बनी रहे, इसी कामना के साथ हनुमान जन्मोत्सव पर पुनः बहुत बहुत बधाई.!
एक ही नारा – एक ही नाम,
जय श्री राम – जय श्री राम।
संकलन एवँ प्रस्तुति:-
इन्दू गोधवानी..रायपुर..✍ 9425514255
