सिंधी अभाणी बोली – मीठड़ी असांजी बोली – अमर बजाज
*
बिलासपुर । सिंधी भाषा के 59 वीं साल गिरह दिवस पर सिन्धी युवक समिति के सदस्यों ने आपस में सिंधी भाषा बोलने का संकल्प लिया। सिंधी युवक समिति के संयोजक, संरक्षक एवं छत्तीसगढ़ सिंधी अकादमी बोर्ड के पूर्व डायरेक्टर अमर बजाज ने बतलाया कि सिंधी समाज अपनी जीवंत संस्कृति और समृद्ध विरासत के लिए प्रसिद्ध है। सिंधी समाज ही मोहन जोदड़ो संस्कृति, सभ्यता के वंशज हैं। सिंधी भाषा दिवस के अवसर पर भारत के उपराष्ट्रपति ने 10 अप्रैल को नई दिल्ली में भारतीय संविधान का सिंधी देवनागरी लिपि में नवीनतम सिंधी संस्करण जारी किया। यह सिंधी समाज के लोगों के लिए यह गर्व का बात है। सिंधी भाषा को 10 अप्रैल 1967 को भारतीय संविधान में आठवीं अनुसूची की भाषा में शामिल किया गया था। तब से संपूर्ण भारत सहित विश्व में सिंधी समाज में 10 अप्रैल को सिंधी भाषा दिवस के रूप में मनाते आ रहे हैं सिंधी भाषा भारत के पश्चिमी मध्य हिस्सों मुख्य रूप से महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़ और पाकिस्तान के सिंध प्रांत में बोली जाने वाली प्रमुख भाषाएं है जिसमें संस्कृति समेत हिंदी पंजाबी और गुजराती भाषा शामिल है सिंधी भाषा संपूर्ण भारत में बोली जाती है पाकिस्तान में सिन्धी भाषा नस्तालिक (यानि अरबी लिपि) में लिखी जाती है जबकि भारत में इसके लिये देवनागरी और नस्तालिक दोनो प्रयोग किये जाते हैं। सो समस्त सदस्य जनों ने आपस में हमेशा सिंधी भाषा बोलने का और समाज के लिए सभी को सिंधी भाषा बोले हेतु प्रेरित करने का संकल्प लिया। आज समस्त समाज ने घर में सिंधी कढ़ी चावल बनाकर सिंधी भाषा बोलकर सिंधी समाज में एकता का परिचय दिया। इस मौके पर छत्तीसगढ़ सिंधी अकादमी के पूर्व डायरेक्टर अमर बजाज, मनीष लाहोरानी, अशोक बजाज, मनोहरलाल खट्वानी, कैलाश मलघानी, राजकुमार बजाज, ओमप्रकाश मनचंदा, अमित संतवानी, मुकेश मूलचंदानी, भगवानदास भोजवानी, संजय मतलानी, रमेश भोजवानी, कैलाश श्यामनानी, मनोज सरवानी, राजेश माधवानी, गोविंद बतरा, विक्की बजाज, हीरानंद छुगानी, सुरेश बजाज, रवि बजाज, किशन जेठानी, केशव आडवानी, विजय पोपटानी, हरिश गेहानी, खूबचंद लाहोरानी, मुकेश मनचंदा, राज भाटिय़ा, विजय वासवानी और संतोष भारवानी इत्यादि सहित समिति के सदस्य शामिल थे।
