विजय की ✒कलम
देश / विदेश:- विगत एक महा से जो लड़ाई चल रही थी अमेरिका इजरायल कि ईरान से कुछ दिनों के लिए उसमें विराम लग गया है समझौते के लिए मीटिंग चल रही है पाकिस्तान में दोनों देश अपनी -अपनी जीत🏆 बता रहे हैं पर हकीकत में न अमेरिका जीता है न ईरान हारा है नुकसान दोनों का हुआ है अमेरिका का ज्यादा हुआ है अपने पायलटो को बचाने के चक्कर में, बहुत नुकसान हुआ
जो 10 सूत्रीय समझौता का मसौदा तैयार किया गया है क्या उस पर दोनों देश सहमत होंगे ईरान कहता है कि हम अपनी शर्तों पर युद्ध विराम करेंगे और 🗽अमेरिका कहता है कि जो हम चाहते हैं उस पर आप युद्ध विराम करें हकीकत में ईरान के पास खोने के लिए अब कुछ नहीं बचा उसके बड़े-बड़े लीडर और सैनिक अधिकारियों को मार डाला गया वह सब कुछ खो के बैठा है अब ओर खोने के लिए कुछ नहीं है बचा है पाने के लिए बहुत कुछ है और 🇺🇸अमेरिका कि साख दाव पर लगी है अफगानिस्तान में अपनी वाट लगाकर 20 साल बाद खाली लोटे, क्या ईरान में भी वैसा होगा ?
अगर समझौता नहीं होगा तो भयंकर युद्ध होगा जिसका नतीजा पूरे विश्व के अन्य देशों को भुगतना पड़ेगा इन दोनों देशों की जिद्द के कारण विश्व के अन्य देश और जनता परेशान है महंगाई बेरोजगारी आसमान छू रही है क्या पाकिस्तान में समझौता हो जाएगा ?
कौन झुकेगा अमेरिका या ईरान?पाकिस्तान सोच रहा है कि इन दोनो की लड़ाई मैं फायदा उठा लूं और मिडिल के देशों से उधार की भीख मिल जाएगी पर ऐसा होगा लगता नहीं है ?
समझौता होगा भी तो इजराइल क्या मान जाएगा?
अमेरिका अपनी गर्दन बाहर निकलना चाहता है इस युद्ध से पर हकिकत मैं हार गया या डर गया वह अपने आप को विजेता🏆🎉🏆 घोषित कर के बाहर निकलना चाहता है पर क्या उसकी यह चाल कामयाब हो पाएगी क्या उसकी दाल ईरान में गलेगी क्योंकि ईरान के पीछे रुस और चीन खड़े है जो उनका साथ दे रहे हैं वह कभी नहीं चाहेंगे कि अमेरिका विजेता घोषित हो और ईरान अपने सुप्रीम लीडर अन्य नेताओं और सैनिक अधिकारियों की मौत का हिसाब किताब भी लेना नहीं भूलेंगा अगर वह समझोता करेगा भी तो जिसमें उसका फायदा होगा वही शर्तों पर करेगा मिडीलेस के देश चाहते हैं किसी भी तरह समझौता हो जाए ताकि उनके ऊपर जो फोकट का बम गिर रहा है वह बंद हो जाए और जो उनका धंधा मंदा है वह वापस चालू हो जाए इसलिए , दबाव भी अमेरिका पर है और पाकिस्तान की हालत ऐसी है कि
(बेगानी की शादी में अब्दुल्ला दीवाना)
जैसी है वह अपना स्वार्थ साध रहा है इस बीच में पूरे विश्व की नजर इस समझौते पर टिकी हुई है की आगे क्या होगा इरान इतनी जल्दी तो मानेगा नहीं और अमेरिका इतनी जल्दी झुकेगा नहीं और जैसा अभी मौजूदा हालात है उस हिसाब से तो नहीं लग रहा है कि समझौता होना मुश्किल है अगर समझौता हो भी जाता है तो क्या भविष्य में अमेरिका का समझौते पर कायम रहेगा यह जरूरी है?
क्योंकि ट्रंप की आदत है अपने ही बातों पर अपनी फेसलों को पलट देता है वह कुछ समय के लिए तो शांत रह सकता है और ज्यादा समय के लिए मुश्किल है और सबसे बड़ी इस राह में जो रोडा़ है वह इजराइल इतनी आसानी से चुप🙊 चाप बैठने वाला नहीं है इरान को तो छोड़ देगा , पर लेबनान को नहीं छोड़ेगा जहां पर आतंकवादी बैठे है ओर इजराइल पर हमला कर रहे हैं तेल का खेल इरान में जो युद्ध शुरू हुआ था अब कहां पहुंच गया है
( न राम मिला न माया मिली)
अमेरिका की लालच ने विश्व को कहाँ पहुंचा दिया अब अमेरिका को पता चल रहा है, और न ही वहां पर सत्ता परिवर्तन हुआ ओर न इरान झुका?
ईरान अपने पूरे नुकसान की भरपाई के साथ ही समझौता करेगा वरना लड़ने के लिए तैयार बैठा है विश्व के अन्य देश क्या इस लड़ाई को खत्म करने के लिए आगे आएंगे क्या अब भारत मध्यसता करेगा ईरान और अमेरिका और इजराइल के बीच शांति स्थापित कर पाएगा क्योंकि अब विश्व की नजर भारत पर है सब समझते हैं कि भारत हि ऐसा देश है जो इनको शांत करवा सकता है और समझौता करवा सकता है क्योंकि भारत की तीनों देशों से अच्छी पटरी खाती है और अच्छा संबंध है अब देखना है यह ऊट किस करवट बैठता है,
संपादकीय
