ऑस्ट्रेलिया की 10 दिवसीय यात्रा के तहत पर्थ में बागेश्वर धाम पीठाधीश पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री दो दिनों तक श्री हनुमंत कथा श्रवण कराने पहुंच गए हैं। कथा के पहले दिन उन्होंने अपने प्रेरणादायक प्रवचनों के माध्यम से एक बार फिर समाज को संस्कारों का महत्व समझाया। पर्थ में आयोजित दो दिवसीय हनुमंत कथा के दौरान उन्होंने कहा कि भले ही माता-पिता अपने बच्चों को बड़ा व्यापार या संपत्ति न दे पाएं, लेकिन अच्छे संस्कार जरूर दें, क्योंकि यही जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है।

उन्होंने वर्तमान समाज की स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि संस्कारों के अभाव में आज कई बुजुर्ग एकाकी जीवन जीने को मजबूर हैं। यदि परिवारों में नैतिक शिक्षा और सम्मान की भावना बनी रहे तो ऐसी स्थिति उत्पन्न ही न हो।महाराज श्री ने हनुमान जी का उदाहरण देते हुए कहा कि संस्कारों और भक्तिवचन में उन्होंने आत्म-सुधार पर विशेष जोर देते हुए कहा कि दूसरों को बदलने से पहले अपने मन को सुधारना जरूरी है। उन्होंने श्रद्धालुओं से कहा कि वे कथा में पहुंचने को भगवान की कृपा मानें और विनम्रता के साथ भक्ति करें।
महाराज श्री ने कहा कि सच्चा भक्त वही है जो सज्जन हो, जिसके आचरण में सरलता, दया और मर्यादा झलकती हो। कथा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और भक्ति एवं संस्कारों के इस संदेश को आत्मसात किया।
अपनों के बीच गूंजे अपनी मिट्टी के गीत
बागेश्वर धाम सरकार ने अपनी कथा शुरू करने के दौरान देशभक्ति से ओतप्रोत गीत सुनाए। अपनी मिट्टी के गीत गाते हुए न केवल महाराज श्री की आंखें सजल हुई बल्कि प्रवासी भारतीय और भारत की संस्कृति से प्रेम करने वाले लोगों की आंखें भी डबडबा गई। महाराज श्री ने कहा कि जिस मिट्टी ने हमें इस दुनिया को देखने का अवसर दिया है उस मिट्टी की हमेशा याद आती रहनी चाहिए।
