( जब जीवन में पाप बढ़ जाता है तब इंसान को धर्म कर्म सत्संग पसंद नहीं आता है)
बिलासपुर जिला / बिल्हा :- सद्गुरु बाबा थावर दास साहेब जी का 244 वां अवतरण “दिवस प्रथम बार बिल्हा नगरी में हर्षोउल्लास के साथ भक्तों के द्वारा मनाया गया बाबा मैहड़ शाह दरबार शांति नगर कटनी के नारायण साईं जी के सुपुत्र मोहित सांई व अंशुल सांई जी का प्रथम बार बिल्हा नगरी में आगमन हुआ सतगुरु बाबा आत्माराम साहब जी के द्वारा बिल्हा नगरी में छोटा सा पीपल का पौधा लगाया गया था लगभग 60 साल पहले की बात है और बताया जाता है कि वहां पर छोटी सी उनकी कुटिया भी थी दरबार भी थी आज वह छोटा सा पीपल का पौधा लगाया गया था जो कि आज वह विशाल वृक्ष बनकर लहरा रहा है

जिसकी छाया🌚 में कई लोग जिंदगी बसर कर रहे हैं और उस जगह को आज पीपल चौक कहा जाता है इसके नीचे में भगवान भोलेनाथ और भगवान बजरंगबली का मंदिर भी है अपने बड़े बुजुर्गों व संत महात्माओं के द्वारा लगाया गया वह पीपल के वृक्ष पर पहुंचकर दोनों भाइयों ने विधि विधान के साथ पूजा अर्चना की दीप प्रज्ज्वलित किया फूल अर्पण कर प्रार्थना की माथा टेक कर पीपल चौक से पूज्य सिंधी पंचायत बिल्हा के द्वारा दोनों भाइयों का ढोल बाजे के साथ आतिशबाजी के साथ फूलों की वर्ष के साथ भव्य स्वागत सत्कार किया गया पीपल चौक से निकल कर सिंधु भवन पहुंचे, अंदर झुलेलाल मंदिर में माथा टेका , पूजा की,
सत्संग की शुरुआत रात्रि 8:00 आरंभ हुई व 10:00 बजे समापन हुआ,

गुरु नानक देव जी और बाबा थावरदास साहब जी के छायाचित्र पर 💐पुष्प अर्पित कर दीप प्रज्ज्वलित करके सत्संग आरंभ किया अपनी अमृतवाणी में प्रभु का स्मरण करते हुए नाम का सिमरन करते हुए नाम की माला जपते हुए गुरु नानक देव जी का नाम लेते हुए उन्होंने फरमाया की धर्म-कर्म के कार्य ही इंसान को भगवान के पास ले जाने वाले रास्ते पर आगे बढ़ाते हैं उस राह पर आप आगे बढ़ते जाते हैं जहां पर आपको प्रभु मिलेंगे जहां पर आपको भगवान के दर्शन होंगे, और जब व्यक्ति के अंदर अहंकार आ जाता है उसके पाप बढ़ जाते हैं तो उसे धर्म कर्म के कार्य और सत्संग कीर्तन भजन अच्छे नहीं लगते हैं यह उस व्यक्ति की निशानी है फिर वह व्यक्ति इन चीजों से दूर भागता है और जिस पर संत महात्मा की कृपा होती है उसके सारे पाप धुल जाते हैं उन्होंने एक ज्ञानवर्धक छोटी सी कथा सुनाई की किस तरह एक व्यक्ति जो जीवन भर धर्म के कार्य करता रहा पर एक बार उसे संत महात्माओं ने उससे जबरन पड़कर मुंह से राम का शब्द का उच्चारण करवाया और जैसे ही वह व्यक्ति कुछ समय बाद अपना शरीर त्याग करके ऊपर पहुंचा यमराज के पास तो जब धर्म राज ने इसका खाता खोला और यमराज को बताया कि प्रभु जीवन भर इसने पाप किया है पर एक बार संतों की कृपा से जबरदस्ती इसके मुख से राम नाम का उच्चारण हुआ है तो आप इसे क्या सजा दें और कौन से इस नाम के कारण इस पुण्य प्राप्त होगा इसका विधान इस धर्म पुस्तक में नहीं लिखा है यमराज और धर्मराज दोनों उस व्यक्ति को लेकर पहुंचे ब्रह्मा जी के पास ब्रह्मा जी भी सोच में पड़ गए और कहा इसका जवाब तो देवों को देव महादेव ही दे सकते हैं सभी लोग कैलाश पर्वत पहुंचे महादेव के पास और सारी कथा बताई जैसे ही महादेव को पता चला कि उनके आराध्य भगवान राम जी का इसने नाम उच्चारण किया है वैसे ही वह उठ खड़े हुए अपने आसन से और उस व्यक्ति को बैठाया पार्वती को कहा की आरती लेकर आओ और उसकी आरती उतारी उसे 56 भोग खिलाएं यह सब देखकर ब्रह्मा जी धर्मराज और यमराज संकट में पड़ गए कि भोलेनाथ यह कर क्या रहे हैं उस पापी को सजा देने की जगह उसकी पूजा पाठ कर रहे हैं छप्पन भोग खिला रहे हैं यह तो न्याय नहीं हुआ भगवान भोलेनाथ ने कहा इस व्यक्ति ने किसी भी तरह आखिर उसने मेरे आराध्य भगवान श्री रामचंद्र जी का नाम का उच्चारण किया है इसलिए यह मेरे लिए भी आराध्य है और पूजनीय है तो भोलेनाथ ने कहा इसको मैं सजा नहीं दे सकता इसके लिए तो सृष्टि के पालनहार प्रभु विष्णु जी के पास चलते हैं वहीं इसका निर्धारण करेंगे उस व्यक्ति ने कहा मैंने राम का नाम लेकर क्या कोई गलत काम कर दिया है क्या जो मुझे परेशान किया जा रहा है कभी ब्राह्म लोग चलो कभी भोलेनाथ के पास कैलाश चलो अब बोलते हो कि विष्णु के पास चलो मैं थक गया हूं मैं 🙋 पेदल नहीं जाऊगा मेरे लिए पालकी मंगाई जाए ब्रह्मा जी को क्रोध तो आ रहा था यमराज के ऊपर कहा कि ऐसे लोगों को तुम ले आए हो देखो परेशानी झेलो, पालकी मंगाई गई वह व्यक्ति बैठा पालकी में और एक तरफ यमराज एक तरफ धर्मराज पालकी उठाकर उसकी विष्णु लोक की ओर आगे बढ़े सबसे आगे ब्रह्मा जी फिर भोलेनाथ जी और पीछे-पीछे यमराज धर्मराज पालकी लेकर चल रहे थे भगवान विष्णु जी सब कुछ देखकर मंद मंद ही मुस्कुरा रहे थे माता लक्ष्मी ने पूछा प्रभु क्या बात है आप मन ही मन मुस्कुरा रहे हैं तो उन्होंने कहा देवी मेरा भक्त आ रहा है जाकर आरती लाओ जैसे ही सब वहां पहुंचे बहुत सारी बातें बताई,

विष्णु जी को विष्णु जी मुस्कुराते हुए कहा जिस व्यक्ति पर संत महात्माओं की कृपा होती है उसके सारे पाप नष्ट हो जाते हैं और इस व्यक्ति पर भी संत महात्माओं की कृपा हुई तभी इसके मुख से राम नाम का उच्चारण हुआ और जैसे ही उच्चारण हुआ उसके सारे पाप नष्ट हो गए और इसे कोई सजा नहीं दे सकते बल्कि इसे स्वर्ग भेजा जाए इस कहानी का तात्पर्य यह है कि जो व्यक्ति जीवन भर पाप किया लेकिन एक बार प्रभु का राम का नाम का जाप लिया और तीनों देवताओं के दर्शन हुए और स्वर्ग लोक में पहुंच गया तो सोचो अगर आप लोग प्रभु का नाम लेते रहोगे जब भी कोई कार्य करते हैं सुबह उठते हो प्रभु का नाम लो 🌙रात्रि सोते समय भी प्रभु का नाम लो हर कार्य करते समय चलते समय प्रभु का नाम जपते रहोगे तो आपकी 🚣नाव तो ऐसे ही पार हो जाएगी और आपके पापा भी धूल जाएंगे, अपनीअमृतवाणी में कई भजन व गीत गाए जिसे सुनकर भक्तजन झूम उठे, कटनी से मैहड़ दरबार से फोन के द्वारा दादी साहिब नारायण सई जी के द्वारा भक्तों को बाबा जी के अवतार दिवस की वह आज के सत्संग में कार्यक्रम की बहुत-बहुत बधाइयां व शुभकामनाएं दी
इस अवसर पर पूज्य सिंधी पंचायत बिल्हा के द्वारा मोहित सांई और अंशुल सांई का छाल पहनाकर सम्मान किया गया भाई साहब प्रताप भाई साहब जगदीश जग्यासी मोहन जैसवानी दादा गंगवानी हमर संगवारी के संपादक विजय दुसेजा का भी पाखर पहनाकर सम्मान किया गया कार्यक्रम के आखिर में बाबा थावरदास साहेब जी का चालीसा का पाठ किया गया केक काटा गया प्रसाद वितरण किया गया आए हुए सभी भक्तजनों के लिए आम भंडारा का आयोजन किया गया बड़ी संख्या में भक्तों ने भंडारा ग्रहण किया आज के इस पूरे आयोजन को सफल बनाने में पूज्य सिंधी पंचायत बिल्हा,व बाबा थावरदास सेवा समिति के सभी सदस्यों का विशेष सहयोग रहा
