- सुरेश सिंह बैस
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले के सिंहतराई स्थित वेदांता लिमिटेड (छत्तीसगढ़ थर्मल पावर प्लांट) में हाल ही में हुए भीषण स्टीम बॉयलर हादसे ने देश भर में औद्योगिक सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस दर्दनाक घटना में अब तक 24 श्रमिकों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि करीब 50 लोग गंभीर रूप से घायल हैं।
सुरक्षा मानकों की विफलता पर उठे सवाल
हिंद खदान मजदूर फेडरेशन (हिंद मजदूर सभा) के केंद्रीय उप महासचिव अख्तर जावेद उस्मानी ने इस हादसे को ‘आजाद भारत के इतिहास की दूसरी सबसे बड़ी बॉयलर दुर्घटना’ करार दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि छत्तीसगढ़ में लगातार हो रही औद्योगिक दुर्घटनाएं सुरक्षा प्रबंधन की घोर लापरवाही को दर्शाती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि बॉयलर में राख का अत्यधिक जमाव एकाएक नहीं होता, बल्कि यह लंबे समय से चल रही लापरवाही का परिणाम है। आरोप है कि संबंधित अधिकारी इस खतरे के प्रति सचेत थे और समय-समय पर चेतावनी भी दी गई थी, लेकिन प्रबंधन ने इसे नजरअंदाज किया।
इतिहास से सबक न लेने का खामियाजा
अख्तर जावेद उस्मानी ने पुरानी घटनाओं का हवाला देते हुए चेताया कि यदि सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो ऐसी त्रासदियां नहीं रुकेंगी: जैसे –
2017 (ऊंचाहार, उ.प्र.): नेशनल थर्मल पावर प्लांट हादसे में 32 मजदूरों की मौत और 98 घायल।
2020 (नेवेली लिग्नाइट, तमिलनाडु): दो अलग-अलग घटनाओं में 11 श्रमिकों की मौत और बड़ी संख्या में घायल।
2021 (बेला, बिहार): नूडल फैक्ट्री में बॉयलर हादसे में 7 मजदूरों की मौत।
2024 (ठाणे, महाराष्ट्र): केमिकल फैक्ट्री हादसे में 12 श्रमिकों की जान गई।
प्रशासनिक लापरवाही और आंकड़ों की हकीकत
यह प्लांट मूलतः 1999 में नेशनल थर्मल पावर कॉरपोरेशन और जनरल इलेक्ट्रिक की 50-50 फीसदी भागीदारी से शुरू हुआ था। बाद में इसे एथेना छत्तीसगढ़ पावर लिमिटेड ने बनाया और 2022 में वेदांता लिमिटेड ने 564.67 करोड़ रुपये में खरीद लिया। दस्तावेजों के अनुसार, राज्य में ‘इंडियन बॉयलर एक्ट 1923’ और वर्तमान नियमों के तहत चीफ बॉयलर इंस्पेक्टर का पद तो है, लेकिन पर्याप्त इंस्पेक्टर्स की कमी सुरक्षा व्यवस्था को कमजोर करती है। मार्च 2026 में छत्तीसगढ़ के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री ने विधानसभा में यह स्वीकार किया था कि राज्य में पिछले तीन वर्षों में औद्योगिक दुर्घटनाओं के कारण 296 श्रमिकों की जान गई है और 298 लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। यदि वेदांता प्लांट के 24 मृतकों को जोड़ा जाए, तो यह आंकड़ा 320 तक पहुंच जाता है।
मांग: न्याय और सुरक्षा
मजदूर संगठनों ने मांग की है कि इस पूरे मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में कराई जाए, ताकि हादसे से संबंधित हर बारीक पहलू की निष्पक्ष जांच हो सके और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
