अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस पर सांकरा -दुर्ग में जागरूकता कार्यशाला सम्पन्न
MGUVV में जैव विविधता संरक्षण हेतु विद्यार्थियों को किया प्रेरित, क्विज एवं फोटोग्राफी प्रतियोगिता आकर्षण का केंद्र
वानिकी महाविद्यालय में पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास पर विशेषज्ञों ने रखे महत्वपूर्ण विचार
दुर्ग, 22 मई 2026।
महात्मा गांधी उद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, सांकरा -पाटन, दुर्ग के अंतर्गत संचालित वानिकी महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र सांकरा – दुर्ग द्वारा अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस के उपलक्ष्य में एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया, कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में राज्य नीति आयोग छत्तीसगढ़ के संयुक्त निदेशक डॉ. भावना दीक्षित, विशिष्ट अतिथि डॉ अनुज शुक्ला राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान रायपुर, विशिष्ट अतिथि डॉ अनुज नारद पर्यावरण संरक्षण गतिविधि, एवं वानिकी महाविद्यालय दुर्ग के अधिष्ठाता डॉ अमित दीक्षित जी, व कार्यक्रम प्रमुख डॉ आयुषी त्रिवेदी उपस्थित रहे।
कार्यशाला मुख्य रूप से जैव विविधता संरक्षण, जलवायु परिवर्तन, वन्यजीव संरक्षण, वानिकी जैसे विषयों पर आधारित था जिसमें अलग अलग सत्रों के माध्यम से विद्यार्थियों ने जैव विविधता के महत्व को समझा।


कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में राज्य नीति आयोग, छत्तीसगढ़ की संयुक्त निदेशक डॉ. भावना दीक्षित जी उपस्थित रहीं, उन्होंने जैव विविधता के महत्व को बताते हुए स्थानीय स्तर पर संरक्षण गतिविधियों को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई, उन्होंने बताया इस वर्ष के जैव विविधता दिवस के थीम “स्थानीय स्तर पर कार्य करें, वैश्विक प्रभाव डालें” को विस्तार से बताया कि किस प्रकार हम अपने छोटे छोटे निरंतर प्रयासों के माध्यम से हम बड़े कार्य किए जा सकते है जिससे स्थानीय स्तर पर कार्य करते हुए वैश्विक स्तर पर सकारात्मक प्रभाव किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की समृद्ध वन संपदा एवं जनजातीय परंपराएँ जैव विविधता संरक्षण का उत्कृष्ट उदाहरण हैं। उन्होंने सामुदायिक वन प्रबंधन, जल स्रोत संरक्षण, पारंपरिक बीज संरक्षण एवं स्थानीय स्तर पर किए जा रहे वृक्षारोपण अभियानों को पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया। उन्होंने युवाओं से स्थानीय जैव विविधता, औषधीय पौधों एवं पारंपरिक ज्ञान के संरक्षण हेतु आगे आने का आह्वान किया तथा कहा कि स्थानीय स्तर के छोटे प्रयास ही वैश्विक पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।
विशिष्ट अतिथि डॉ. अनुज शुक्ला, राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (NIT), रायपुर ने आधुनिक तकनीकी नवाचारों एवं युवाओं की भूमिका को बड़ा बताते हुए उन्होंने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि आज की युवा पीढ़ी पर्यावरण संरक्षण की सबसे बड़ी शक्ति है, वर्तमान समय में पर्यावरण संरक्षण एवं जैव विविधता संरक्षण के लिए तकनीक का प्रभावी उपयोग अत्यंत आवश्यक है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रिमोट सेंसिंग, GIS एवं डिजिटल मॉनिटरिंग जैसी आधुनिक तकनीकों के माध्यम से प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण एवं वन प्रबंधन को अत्याधुनिक बनाया जा सकता है।
डॉ. अनुज नारद पर्यावरण संरक्षण गतिविधि ने जल संरक्षण एवं भूजल संवर्धन के महत्व को बताते हुए कहा कि वर्तमान समय में भूजल स्तर लगातार घटता जा रहा है, जो आने वाले समय के लिए गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने वर्षा जल संचयन, पारंपरिक जल स्रोतों के संरक्षण तथा जल के विवेकपूर्ण उपयोग को आवश्यक बताया। उन्होंने कहा कि यदि आज जल संरक्षण के प्रति जागरूकता नहीं दिखाई गई, तो भविष्य में जल संकट और अधिक गंभीर रूप ले सकता है।
वानिकी महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र, दुर्ग के अधिष्ठाता डॉ. अमित दीक्षित ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में महाविद्यालय द्वारा पर्यावरण संरक्षण, वन संवर्धन एवं विद्यार्थियों के शैक्षणिक विकास हेतु निरंतर आयोजित किए जा रहे विभिन्न कार्यक्रमों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि महाविद्यालय में समय-समय पर कार्यशालाएँ, प्रशिक्षण कार्यक्रम, वृक्षारोपण अभियान, शोध गतिविधियाँ एवं जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जिनसे विद्यार्थियों को व्यावहारिक एवं वैज्ञानिक ज्ञान प्राप्त होता है।
उन्होंने कहा कि महाविद्यालय केवल शैक्षणिक गतिविधियों तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज एवं पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी निभाते हुए सतत विकास एवं प्रकृति संरक्षण के क्षेत्र में भी सक्रिय रूप से कार्य कर रहा है। साथ ही उन्होंने विद्यार्थियों को शोध, नवाचार एवं पर्यावरण संरक्षण गतिविधियों में सक्रिय रूप से कार्य करने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम की समन्वयक डॉ. आयुषी त्रिवेदी रहीं। उनके मार्गदर्शन में कार्यक्रम के अंतर्गत क्विज प्रतियोगिता एवं फोटोग्राफी प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। क्विज प्रतियोगिता जैव विविधता, वन, पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी जागरूकता पर आधारित रही, जबकि फोटोग्राफी प्रतियोगिता का विषय प्रकृति, वन्यजीव एवं जैव विविधता संरक्षण रहा। विद्यार्थियों ने दोनों प्रतियोगिताओं में उत्साहपूर्वक सहभागिता की। कार्यशाला में महाविद्यालय के प्राध्यापक, शोधार्थी एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे।
