
सुरेश सिंह बैसबिलासपुर। शहर की जीवनरेखा कही जाने वाली अरपा नदी को वर्षभर जलयुक्त बनाए रखने की दिशा में जल संसाधन विभाग की महत्वपूर्ण योजना अब अंतिम चरण में पहुंच गई है। अरपा नदी पर निर्मित शिवघाट और पचरीघाट बैराज पूरी तरह तैयार हो चुके हैं। नवंबर में बंद होंगे शिवघाट और पचरीघाट बैराज के गेटविभागीय अधिकारियों के अनुसार बारिश का मौसम समाप्त होने और नदी में जल प्रवाह की स्थिति सामान्य होने के बाद अक्टूबर-नवंबर में दोनों बैराजों के गेट स्थायी रूप से बंद कर दिए जाएंगे, जिससे नदी में पर्याप्त जल संचयन संभव हो सकेगा। वर्षों से गर्मी के मौसम में सूखने वाली अरपा नदी को पुनर्जीवित करने के उद्देश्य से बनाए गए इन बैराजों का निर्माण कार्य लगभग पूर्ण हो चुका है। फिलहाल बरसात के दौरान नदी में आने वाले तेज प्रवाह और गाद की समस्या को देखते हुए गेट बंद नहीं किए जाएंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून समाप्त होने के बाद जलस्तर और प्रवाह की स्थिति का आकलन कर गेट बंद करने का निर्णय लिया जाएगा।31 से अधिक नालों का पानी बनेगा चुनौतीअरपा नदी में शहर के विभिन्न हिस्सों से करीब 31 नालों का पानी गिरता है। बैराज बनने के बाद नदी में जल ठहराव बढ़ेगा, ऐसे में नालों से आने वाले गंदे पानी और प्रदूषण की समस्या भी प्रमुख चुनौती बन सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि नालों के पानी का समुचित उपचार और डायवर्जन नहीं किया गया तो जल संचयन का उद्देश्य प्रभावित हो सकता है। इसलिए बैराज संचालन के साथ-साथ सीवेज प्रबंधन और नदी संरक्षण की योजनाओं पर भी समान रूप से ध्यान देना होगा।नदी संरक्षण और भूजल संवर्धन को मिलेगा बलजल विशेषज्ञों के अनुसार बैराजों में पानी रुकने से न केवल अरपा नदी का सौंदर्य बढ़ेगा, बल्कि आसपास के क्षेत्रों में भूजल स्तर सुधारने में भी मदद मिलेगी। इससे किसानों, स्थानीय निवासियों और पर्यावरण को दीर्घकालिक लाभ मिलने की उम्मीद है। नदी के दोनों तटों पर विकसित किए जा रहे घाट और सौंदर्यीकरण कार्य भी शहर को नई पहचान देंगे।विभाग ने सुधारी पूर्व की तकनीकी खामियांजल संसाधन विभाग ने बैराजों तक पहुंचने वाले एप्रोच मार्गों और संरचनात्मक कार्यों में सामने आई तकनीकी कमियों को भी दूर कर लिया है। पहले सड़क और एप्रोच मार्गों की ऊंचाई को लेकर शिकायतें सामने आई थीं, जिसके बाद विभाग ने संशोधन कर आवागमन को अधिक सुविधाजनक बनाया है। अधिकारियों का दावा है कि अब दोनों बैराज आम नागरिकों के उपयोग के लिए सुरक्षित और सुगम होंगे।शहरवासियों को लंबे समय से था इंतजारअरपा नदी में सालभर पानी बनाए रखने की मांग लंबे समय से उठती रही है। शिवघाट और पचरीघाट बैराज के शुरू होने से शहरवासियों की यह बहुप्रतीक्षित उम्मीद पूरी होने जा रही है। यदि प्रदूषण नियंत्रण और जल प्रबंधन की व्यवस्थाएं प्रभावी रहीं तो आने वाले वर्षों में अरपा नदी एक बार फिर बिलासपुर की पहचान और गौरव का केंद्र बन सकती है। बैराज निर्माण केवल जल रोकने की परियोजना नहीं है, बल्कि यह अरपा नदी के पुनर्जीवन, भूजल संरक्षण और शहरी पर्यावरण सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अब सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि नदी में गिरने वाले प्रदूषित नालों के पानी को रोकने और शुद्ध करने के लिए कितनी प्रभावी कार्रवाई की जाती है।
