सुरेश सिंह बैस बिलासपुर। हाथों में मेहंदी, मांग में सिंदूर सजने का सपना और सात फेरों की तैयारी के बीच एक युवती ने ऐसा साहसिक निर्णय लिया, जिसने पूरे समाज के सामने आत्मसम्मान की नई मिसाल कायम कर दी। शादी के मंडप में जब दूल्हा नशे की हालत में पहुंचा तो जांजगीर चांपा जिले की एक साहसी युवती ने बिना किसी दबाव के विवाह से स्पष्ट इनकार कर दिया और बारात लौटा दी। इस साहसिक निर्णय की पूरे प्रदेश में सराहना हुई। अब उसी युवती के साहस और सामाजिक चेतना को सम्मान देते हुए जांजगीर-चांपा पुलिस ने उसे पुलिस परिवार परामर्श केंद्र में महिला काउंसलर के रूप में नियुक्त किया है। यहां वह घरेलू विवादों, पारिवारिक समस्याओं और महिला उत्पीड़न से जुड़े मामलों में पीड़ित महिलाओं को सही निर्णय लेने के लिए मार्गदर्शन करेगी। जांजगीर-चांपा जिला के पुलिस अधीक्षक विजय पांडेय ने सम्मान समारोह में युवती को पुष्पगुच्छ भेंट कर सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि नशे के खिलाफ युवती का साहसिक कदम केवल एक शादी रोकने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि समाज को यह संदेश भी दिया कि आत्मसम्मान से बड़ा कोई समझौता नहीं होता। उनका कहना था कि युवाओं को नशे जैसी सामाजिक बुराई से दूर रहना चाहिए, क्योंकि यह केवल व्यक्ति ही नहीं, पूरे परिवार को प्रभावित करती है। पुलिस अधिकारियों ने विश्वास जताया कि जिस युवती ने अपने जीवन का सबसे कठिन निर्णय आत्मसम्मान के पक्ष में लिया, वही अब परिवार परामर्श केंद्र में आने वाली महिलाओं को भी सही दिशा और आत्मविश्वास प्रदान करेगी। यह घटना अब केवल एक साहसी दुल्हन की कहानी नहीं, बल्कि महिला सशक्तिकरण, आत्मसम्मान और नशामुक्त समाज की प्रेरक मिसाल बन चुकी है। युवती का यह नया दायित्व उन महिलाओं के लिए आशा की किरण साबित होगा, जो सामाजिक या पारिवारिक दबाव के कारण अपने अधिकारों के लिए आवाज़ नहीं उठा पातीं।