
मुकेश कुमार – सरगुजा सरगुजा। लखनपुर जनपद पंचायत क्षेत्र की 74 ग्राम पंचायतों में ग्रामीणों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि आज भी बड़ी संख्या में पात्र परिवार निजी शौचालय और नहानी घर जैसी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। बरसात का मौसम शुरू होते ही स्वच्छता की समस्या और अधिक गंभीर हो गई है, जिससे महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।ग्रामीणों के अनुसार कई गांवों में हैंडपंपों के आसपास गंदगी फैली हुई है तथा नियमित साफ-सफाई नहीं होने से संक्रमण और बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। उनका कहना है कि स्वच्छता और पेयजल व्यवस्था को लेकर जिम्मेदार विभागों द्वारा अपेक्षित ध्यान नहीं दिया जा रहा है।ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि 15वें वित्त आयोग तथा अन्य विकास मदों से मिलने वाली राशि का समुचित उपयोग नहीं हो रहा। उनका कहना है कि कई विकास कार्य केवल कागजों तक सीमित दिखाई देते हैं, जबकि जमीनी स्तर पर लोगों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल रहा। ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि संबंधित अधिकारी नियमित रूप से गांवों का निरीक्षण नहीं करते और अधिकांश मामलों में सरपंच एवं सचिव की रिपोर्ट के आधार पर ही कार्यों का मूल्यांकन कर लिया जाता है।इन आरोपों को लेकर एक स्थानीय पत्रकार द्वारा मुख्यमंत्री जन शिकायत हेल्पलाइन 1076 में शिकायत दर्ज कराई गई है। शिकायत में मांग की गई है कि लखनपुर जनपद पंचायत की सभी 74 ग्राम पंचायतों की निष्पक्ष जांच कराई जाए, पात्र हितग्राहियों को शौचालय एवं नहानी घर की सुविधा उपलब्ध कराई जाए तथा विकास कार्यों में यदि किसी प्रकार की अनियमितता या वित्तीय गड़बड़ी पाई जाती है तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए।अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 में शिकायत दर्ज होने के बाद क्या संबंधित विभाग, जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) अथवा जिला प्रशासन निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाएगा? क्या गांव-गांव पहुंचकर पात्र हितग्राहियों का सत्यापन किया जाएगा? क्या जिन परिवारों को योजनाओं का लाभ नहीं मिला है, उन्हें शीघ्र लाभ दिलाया जाएगा? और यदि विकास कार्यों में अनियमितता पाई जाती है तो क्या दोषियों पर कार्रवाई होगी?प्रशासनिक प्रक्रिया के अनुसार मुख्यमंत्री जन शिकायत हेल्पलाइन में दर्ज शिकायत संबंधित विभाग को जांच के लिए भेजी जाती है। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाती है। यदि शिकायत सही पाई जाती है, तो पात्र हितग्राहियों को योजनाओं का लाभ दिलाने तथा अनियमितता के लिए जिम्मेदार अधिकारियों या कर्मचारियों के विरुद्ध कार्रवाई की जा सकती है।फिलहाल पूरे मामले पर ग्रामीणों की नजर जिला प्रशासन और संबंधित विभाग की कार्रवाई पर टिकी हुई है। लोगों का कहना है कि यदि समय पर निष्पक्ष जांच कर प्रभावी कदम उठाए जाते हैं, तो हजारों ग्रामीणों को मूलभूत सुविधाओं का लाभ मिल सकेगा और सरकारी योजनाओं का उद्देश्य भी पूरा होगा।
