*कविता**

मौन की भाषा में जीवन का सारा ज्ञान समाया हैहर रिश्ते का अपना मर्यादित सम्मान निभाया हैजिसको जितना देना हो,पहले उसका मन पहचानोविवेक से किया निर्णय ही जीवन का सच्चा गहना हैस्वार्थी को प्रेम दोगे,वह उसका मोल न जानेगा,कपटी को भाव दोगे,वह विश्वास ही तोड़ेगासच्चे मन की पूँजी केवल योग्य हाथों में सजती हैअन्यथा निर्मल हृदय भी पीड़ा में ही डूबेगामित्र को धोखा देना,विश्वास का दीप बुझाना हैप्रिय से नफ़रत रखना,अपने ही घर को जलाना हैअतिथि का आदर करना,संस्कृति की सच्ची पहचानसम्मान बाँटने वाला ही जग में सम्मान पाना हैअहंकारी को महत्व दोगे,अहंकार और बढ़ जाएगादुष्ट को सहयोग दोगे,अन्याय का वन लहराएगाअधर्मी का साथ कभी भी मंज़िल तक नहीं पहुँचाता,सत्य का पथ चुनने वाला हर संकट से उबर जाएगाजीवन का सार यही,विवेक से हर संबंध निभानाप्रेम, दया, विश्वास का दीप सदा मन में जलानायोग्य को सम्मान,ज़रूरतमंद को सच्चा सहारा देना,यही मानव धर्म है,यही जीवन को सफल बनाना*क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए (एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र 9226229318*
