
*कविता* *
सिंहासन नहीं, संस्कार इंसान को महान बनाते हैंसच्चे कर्म ही सम्मान के दीप जलाते हैं।जो सबका हित सोचकर आगे बढ़ता जाता हैवही हर युग में प्रेरणा का प्रकाश कहलाता है।ऊँचाई भवनों की नहीं,चरित्र की पहचानी जाती हैविनम्रता से ही हर मंज़िल आसान हो जाती है।जिसके मन में प्रेम,करुणा और सत्य का वास होउसका हर कदम समाज के लिए विश्वास हो।अहंकार का ताज पल भर में बिखर जाता हैविनय का फूल हर मौसम में महक जाता है।जो स्वयं से पहले जग का कल्याण सोचता हैईश्वर भी उसी के जीवन में उजियारा बोता है।किशन ऐसा जीवन जिएँ जहाँ सोच सबसे ऊँची होहर वाणी में मधुरता,हर राह सच्चाई की हो।आसन नहीं,आदर्श हमारी पहचान बन जाएँऊँची सोच से ही हम सच्ची श्रेष्ठता को अपनाएँ।*क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए (एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र 9226229318*
