
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र अयोध्या से आया आधिकारिक जवाब, कई प्रश्नों पर स्थिति स्पष्ट)अयोध्या स्थित श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र द्वारा 1 जुलाई 2026 को विश्व सिंधी सेवा संगम के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. राजू मनवानी को भेजे गए आधिकारिक पत्र ने वर्ष 2021 में समर्पित 200 किलोग्राम चांदी से जुड़े विषय पर ट्रस्ट का आधिकारिक पक्ष स्पष्ट किया है।पत्र के अनुसार, वर्ष 2021 में विश्व सिंधी सेवा संगम के माध्यम से प्राप्त लगभग 200 किलोग्राम चांदी का पूरा रिकॉर्ड ट्रस्ट के मूल्यवान धातु रजिस्टर में सुरक्षित दर्ज है। ट्रस्ट ने बताया है कि यह प्रविष्टि पृष्ठ संख्या 7, क्रमांक 96 पर उपलब्ध है।चांदी को शुद्ध कर बनाई गईं नई ईंटेंपत्र में कहा गया है कि ट्रस्ट के निर्णय के अनुसार प्राप्त चांदी को भारत सरकार के उपक्रम सिक्योरिटी प्रिंटिंग एंड मिंटिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (हैदराबाद) भेजा गया, जहां उसे गलाकर 99.99 प्रतिशत शुद्धता वाली लगभग 20-20 किलोग्राम की चांदी की ईंटों में ढाला गया।ट्रस्ट के अनुसार ये चांदी की ईंटें वर्तमान में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, अयोध्या शाखा के सुरक्षित लॉकर में संरक्षित हैं तथा भविष्य में ट्रस्ट की आवश्यकताओं के अनुसार उनका उपयोग किया जाएगा।ट्रस्ट ने मांगी 200 दानदाताओं की पूरी जानकारीपत्र में विश्व सिंधी सेवा संगम से अनुरोध किया गया है कि सभी 200 दानदाताओं का पूरा विवरण उपलब्ध कराया जाए, जिसमें—पूरा नामपूरा पतामोबाइल नंबरपैन कार्ड नंबरईमेल आईडीशामिल हों।ट्रस्ट ने स्पष्ट किया है कि यह जानकारी प्रत्येक दानदाता को उनके दान का आधिकारिक रिकॉर्ड उपलब्ध कराने तथा आवश्यक पत्राचार के उद्देश्य से मांगी गई है।विवाद के बीच आया आधिकारिक पक्षपिछले कुछ समय से विश्व सिंधी सेवा संगम के डॉ. राजू मनवानी ने विभिन्न मीडिया मंचों एवं सोशल मीडिया के माध्यम से वर्ष 2021 में समर्पित 200 चांदी की ईंटों की स्थिति को लेकर प्रश्न उठा रहे थे।अब श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के इस आधिकारिक पत्र में चांदी की प्राप्ति, उसका रिकॉर्ड, प्रक्रिया तथा वर्तमान स्थिति का विस्तृत विवरण दिया गया है, जिससे इस विषय पर ट्रस्ट का आधिकारिक पक्ष सार्वजनिक रूप से सामने आया है।सिंधी समाज और संस्था—दोनों में अंतर समझना आवश्यकइस पूरे प्रकरण में यह स्पष्ट करना भी आवश्यक है कि उपलब्ध जानकारी के अनुसार यह दान विश्व सिंधी सेवा संगम के माध्यम से एकत्रित किया गया था। इसलिए किसी भी दावे या विवाद को पूरे सिंधी समाज से जोड़ने से पहले तथ्यों का स्पष्ट होना आवश्यक है।देश-विदेश में बसे करोड़ों सिंधियों की प्रतिष्ठा किसी एक संस्था के कार्यों से स्वतः नहीं जुड़ती। अतः सार्वजनिक वक्तव्यों में तथ्यात्मक स्पष्टता और संयम बनाए रखना सभी संबंधित पक्षों की जिम्मेदारी है।पारदर्शिता ही आस्था और विश्वास की सबसे बड़ी आधारशिलाधार्मिक संस्थाओं में दिया गया प्रत्येक दान केवल आर्थिक योगदान नहीं बल्कि श्रद्धा, विश्वास और समर्पण का प्रतीक होता है। इसलिए दान संग्रह करने वाली प्रत्येक संस्था का नैतिक दायित्व है कि वह समय-समय पर दानदाताओं के समक्ष पूर्ण पारदर्शिता बनाए रखे।दानदाताओं को यह जानने का अधिकार है कि—कुल कितना दान प्राप्त हुआ।चांदी की खरीद किस प्रकार की गई।खरीद के बिल एवं कर संबंधी अभिलेख क्या हैं।शुद्धता एवं वजन के प्रमाणपत्र उपलब्ध हैं या नहीं।दानदाताओं का रिकॉर्ड सुरक्षित रखा गया है या नहीं।इन प्रश्नों के स्पष्ट उत्तर संस्था की विश्वसनीयता को मजबूत करते हैं तथा समाज का विश्वास और अधिक सुदृढ़ बनाते हैं।मैं पूरे सिंधी समाज से आग्रह करता हूँ कि इस विषय को भावनाओं के बजाय दस्तावेज़ों और तथ्यों के आधार पर देखा जाए। अब जबकि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र का आधिकारिक पत्र सार्वजनिक हो चुका है, सभी संबंधित पक्षों को पारदर्शिता, उत्तरदायित्व और मर्यादा के साथ आगे बढ़ना चाहिए।यदि किसी प्रकार की शंका शेष है तो उसका समाधान भी दस्तावेज़ों और तथ्यों के आधार पर ही होना चाहिए। इससे दानदाताओं का सम्मान सुरक्षित रहेगा तथा सिंधी समाज की प्रतिष्ठा भी अक्षुण्ण बनी रहेगी।🙏जय श्रीराम. Jai Jhulelal 🙏
