
संसार में रहो पर सांसारिक मत बनो ,दादा जेपी वासवानीबिलासपुर :- परम पूज्य दादा जेपी वासवानी जी की 8 वी पावन पुण्यतिथि के अवसर पर साधु वासवानी सेंटर बिलासपुर इकाई के द्वारा सिंधी कॉलोनी में सत्संग कीर्तन का आयोजन किया गया कार्यक्रम की शुरुआत दादा साधु वासवानी दादा जेपी वासवानी जी के फोटो पर पुष्प अर्पित कर दीप प्रजवलित करके की गई चित्रा पंजवानी सरिता पंजवानी के द्वारा अंजलि संग्रह ग्रंथ का भोग लगाया गया भजन कीर्तन किया गया, श्रुति पंजवानी के द्वारा कई भक्ति भरे भजन गाऐ जिसे सुनकर उपस्थित भक्तजन भाव विभोर हो गए, टीवी के माध्यम से पूज्य दादाजी एवं पूज्य दीदी कृष्ण जी के अमृत उपदेशों का भक्तों ने श्रवण किया एक सत्संग में दादाजी फरमा रहे हैं उन्होंने एक कथा सुनाई की एक व्यक्ति करोड़पति था दुकान में बैठा था अपने बेटे से बढ़िया हंसी मजाक कर रहा था बातचीत कर रहा था अचानक उसकी तबीयत खराब हो गई और हाट अटैक आ गया मर गया बेटा जब गया देखा पिताजी पिताजी क्या हो गया तो वह चल बसा था अंतिम संस्कार किया गया तब बेटा सोचने लगा इतना सब कुछ होने के बाद भी मेरे पिता ऐसे चले गए क्या लेकर गए कुछ लेकर नहीं गए करोड़ों की संपत्ति यही छोड़कर गए फिर मैं क्यों इतनी हाए हाए करूं उसके मन में आया कि मुझे भगवान को प्राप्त करना है और इस सांसारिक जीवन का त्याग करना है वह चल पड़ा मन की शांति के लिए वन की ओर बहुत दिनों तक भटकते भटकते आगे बढ़ता गया तब एक व्यक्ति मिला उसने बताया कि अंदर घने जंगलों में एक कुटिया है वहां साधु रहता है वह तपस्वी साधु है वही तुम्हारी मंजिल है और वही तुम्हें अपना शिक्षय बन सकता है पर वह किसे अपना शिक्षय अभी तक नहीं बनाया है वह व्यक्ति आगे बड़ा और देखा दूर में कुटिया है और मन ही मन उस साधु को अपना गुरु मान लिया रोज सुबह अमृत वेले उस कुटिया के आसपास साफ सफाई करता झाड़ू करता पानी का छिड़काव करता और गायब हो जाता सुबह साधु उठता देखा कि यह कौन है कुटिया के बाहर रोज साफ सफाई करके जाता है एक दिन साधु ने सोचा कि आज में पता करके रहूंगा कि वह व्यक्ति कौन है साधु उस दिन रात भर नहीं सोया और जागता रहा जैसे 3:00 बजे अमृत वेले का समय हुआ आवाज आई और देखा एक व्यक्ति झाड़ू निकाल रहा है तुरंत साधु बाहर निकाला पूछा तुम कौन हो बेटा उसने तुरंत साधु के पांव पकड़ लिए और कहा बाबा मैंने आपको अपना गुरु माना है भली आप मुझे अपना शिक्षय मानो न मानो और इसलिए मैं यह सब साफ सफाई करता हूं तो साधु ने उसे उठाया और कहा आज तक मैंने किसी को अपना शिक्षय नहीं बनाया है कहीं मुझे अहंकार न आ जाए पर तुम्हें देखकर मुझे लग रहा है कि तुम्हें मैं अपना शिक्षय बना रहा हूं और अंदर ले गया और दोनों भक्ति में लीन होकर तपस्या करने लगे समय बितता गया 7 वर्ष पूर्ण हो गए तब साधु ने कहा बेटा अब तुम पक्के तपस्वी बन चुके हो और अब तुम अपने गांव वापस जाओ और जो बधे हैं उनको खोलो और जो खोले हैं उन्हें बाधो इसका तात्पर्य है कि जो लोग भक्ति से दूर हैं उन्हें भक्ति की ओर भगवान की ओर मोड़ो और जो लोग अपनी वाणी का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं उन्हें भक्ति की राह दिखाओ समझा ओ , चल पड़ा अपने गांव कि और गुरु के बताए मार्ग पर चलने लगा प्रभु के गीत भजन गाने लगा जगह जगह सत्संग कीर्तन करने लगा लोगों को मोह माया से दूर रहो और प्रभु के चरण में जाना है तो भक्ति की राह पकड़ो कहने लगा,कहने का तात्पर्य यह है कि आप संसार में जरूर रहो पूरा कर्तव्य का पालन करो पर सांसारिक मत बनो मतलब कोई वस्तु में मोह मत रखो किस भी चीज में मोह मत रखो यह मेरा है मेरा है मैंने बनाया है ऐसा मत बोलो यह कहो कि यह सब प्रभु का दिया हुआ है प्रभु का ही है मेरा कुछ नहीं है मैं तो खाली आया हूं खाली चला जाऊंगा और जिसके पास धन दौलत है वह उसका उपयोग दीन दुखियों की सेवा गरीबों निर्जोनो की सेवा में खर्च करें क्योंकि कुछ हिस्सा उनके धन दौलत में इनका भी है कार्यक्रम के आखिर में आरती की गई प्रसाद वितरण किया गया विश्व कल्याण के लिए प्रार्थना की गई आज के इस पूरे कार्यक्रम को सफल बनाने में साधु वासवानी सेंटर बिलासपुर इकाई का विशेष सहयोग रहा, इस पूरे कार्यक्रम को हमर संगवारी के संपादक विजय दुसेजा, गोविन्द दुसेजा ने विशेष रूप से पहुंचकर कर किया
