*कविता**

गिरने से पहले तूने मेरा हाथ थाम लियाभटके हुए कदमों को अपना नाम दिया।बेगानों की दुनियाँ में भी अपना बना लिया,तेरी हर रहमत,हर करम का शुकराना किया।अंग-संग रहकर तूने हर डर को दूर कियाआँधियों के बीच भी जीवन को नूर किया।हर दुःख की धूप में दया की छाँव बिछा दीतेरी हर मेहरबानी का दिल से शुकराना किया।जब-जब सिर पर तेरी रहमत का हाथ आया,टूटा हुआ विश्वास भी फिर से मुस्कुराया।आँसू भी इबादत बने,सजदे भी मुस्काएतेरे हर फ़ैसले को मैंने दिल से अपनाया।न धन का शुकराना,न शोहरत का अफ़सानाबस तेरी रज़ा में ही है मेरा ठिकाना।किशन,आख़िरी साँस तक बस इतनी सी दुआ रहे,ईश्वर-अल्लाह,तेरा हर पल..हर साँस..हर जन्म शुकराना। *क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए (एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र 9226229318*
